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ममता बनर्जी की खुली पोल, हुआ एक और झूठ का पर्दाफाश

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक और झूठ का पर्दाफाश हो गया है। चुनाव से पहले यह साबित करने के लिए कि तृणमूल कांग्रेस कोई हिंदू-विरोधी पार्टी नहीं है, पार्टी की ओर से कहा गया कि ममता बनर्जी स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण की 125वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने शिकागो जाएंगी, लेकिन ममता वहां नहीं गईं। पार्टी ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों के षडयंत्र के कारण ममता बनर्जी शिकागो नहीं जा पाई। अब यह बयान झूठा साबित हो गया है। विदेश मंत्रालय ने ममता के दावे की पोल खोल दी है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि उनके पास ममता बनर्जी की शिकागो यात्रा को मंजूरी देने का कोई अनुरोध आया ही नहीं था।

राष्ट्रपति चुनाव में भी हुई थी जग-हंसाई
राष्ट्रपति चुनाव के दौरान रामनाथ कोविंद को एनडीए की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने पर ममता बनर्जी ने कहा था कि किसी को समर्थन करने के लिए उसे जानना भी आवश्यक होता है। समाचार पत्रों की सूचना के अनुसार जब बीजेपी ने राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर बिहार के तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद के नाम का एलान किया तो ममता ने कहा कि, “उन्होंने अपना उम्मीदवार किसे चुन लिया? हम उन्हें नहीं जान पा रहे, हम उन्हें नहीं पहचाते। आसमान से टपका दिया। क्या कोई और नहीं था?”

इंडियन एक्सप्रेस में छपे समाचार के अनुसार वो रामनाथ कोविंद को न सिर्फ जानती हैं बल्कि, उनके साथ लंबे समय तक काम भी किया है। संसद के रिकॉर्ड से साफ है कि दोनों उस स्थाई समिति के सदस्य थे, जिसने 2004 में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (पद और सेवा में आरक्षण ) विधेयक, 2004 आठवीं रिपोर्ट दी थी। उस समिति में ममता निचले और कोविंद उपरी सदन का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इस खुलासे के बाद टीएमसी नेता की काफी किरकिरी हुई।

सैन्य अभ्यास पर भी खुली पोल
दो साल पहले नियमित सैन्य अभ्यास के दौरान पश्चिम बंगाल में 19 टोल नाके पर सेना तैनात हुई। राज्य के सचिवालय के सामने भी सेना ने अस्थायी तौर पर कैंप बनाया। ममता बनर्जी ने उस समय सेना की नियमित तैनाती को राज्य सरकार की तख्तापलट की कोशिश बताया था। उन्होंने कहा कि सेना ने राज्य पुलिस को बताए बिना ही बंगाल में सेना की तैनाती की। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह अघोषित आपातकाल लगाने की कोशिश है और केंद्र सरकार उन्हें डरा रही है, लेकिन सेना ने सबूत पेश कर ममता के झूठ का पर्दाफाश कर दिया। सेना ने सबूत पेश कर यह साफ कर दिया कि उसने अपने नियमित ड्रिल की जानकारी बंगाल पुलिस को दी थी और पुलिस के कहने पर उन्होंने अभ्यास की तिथि बदली है।

छवि सुधारने के लिए बेचैन ममता
दरअसल ममता बनर्जी की पूरी राजनीति मुस्लिम तुष्टिकरण के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन चुनाव करीब आने के साथ राज्य में भाजपा का दबदबा बढ़ता देख उन्हें हिंदू मतदाताओं की याद आने लगी है। ममता बनर्जी को लगने लगा है कि सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण से काम नहीं चलेगा। ऐसे में पिछले साल दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाने वाली ममता बनर्जी ने पहले तो राज्य की दुर्गा समितियों को अनुदान देने का ऐलान किया और पूजा समितियों से वसूले जाने वाला 28 करोड़ रुपया माफ कर दिया। फिर हिंदुओं को रिझाने के लिए एक और पासा फेंकते हुए शिकागो में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने की बात की।

आइये ममता बनर्जी के लिए गए कुछ उन निर्णयों पर नजर डालते हैं जो उन्होंने अपनी छवि सुधारने के लिए किए हैं-

  • रामनवमी पूजा करेगी टीएमसी
    तृणमूल कांग्रेस ने इस वर्ष रामनवमी मनाने की घोषणा की।
  • ब्राह्मण सम्मेलन से दिया संदेश
    9 जनवरी, 2018 को टीएमसी ने ब्राह्मण सम्मेलन किया।
  • गोदान से छवि सुधारने की कोशिश
    नवंबर, 2017 में ममता सरकार ने 2000 गाय बांटने का निर्णय लिया।
  • गंगा सागर मेला को कुंभ मेला कहा
    गंगा सागर में लगने वाले मेला को ममता बनर्जी ने कुंभ मेला कहा।
  • मंदिरों के लिए अलग बोर्ड का गठन
    तारापीठ तारकेश्वर और कालीघाट मंदिर के पुनर्रुद्धार के लिए बोर्ड बनावाने का फैसला किया। 
  • राजबंशी के लिए वेलफेयर बोर्ड
    एससी एडवायजरी काउंसिल बनाने और राजबंशी वेलफेयर बोर्ड बनाने का फैसला लिया।

आइये अब हम ममता की हिंदू विरोध और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति पर नजर डालते हैं-

सरकारी पैसे से ‘मुस्लिम परस्ती’
ममता सरकार 2013 से पहले 30 हजार मुस्लिम इमामों और  15 हजार मुअज्जिनों को क्रमश: 2500 और 1500 रुपये का स्टाइपेंड यानी जीविका भत्ता देती थी। वहीं हिंदू पुरोहितों ने जब ये स्टाइपेंड मांगा तो उन्होंने साफ मना कर दिया। हालांकि हाईकोर्ट ने इसे फिजूलखर्जी करार देते हुए इस फैसले पर रोक लगा दी है।

छठ पूजा पर लगाई रोक
पिछले वर्ष ममता बनर्जी सरकार ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में महानंदा नदी में छठ पूजा मनाने पर रोक लगा दी थी। एक अखबार की खबर के अनुसार मता सरकार ने एनजीटी के आदेश का हवाला देकर महानंदा नदी में छठ पूजा मनाने पर बैन कर दिया।

दशहरे में शस्त्र जुलूस पर रोक
हिंदू धर्म में दशहरे पर शस्त्र पूजा की परंपरा रही है, लेकिन मुस्लिम प्रेम में ममता बनर्जी  ने दशहरा के दिन पश्चिम बंगाल में शस्त्र जुलूस निकालने की इजाजत नहीं दी। 

कांगलापहाड़ी में दुर्गा पूजा पर रोक
बीरभूम जिले के कांगलापहाड़ी गांव में 300 घर हिंदुओं के हैं और 25 परिवार मुसलमानों के हैं, लेकिन मुसलमानों को खुश करने के लिए इस गांव में चार साल से दुर्गा पूजा पर पाबंदी है। 

रामनवमी पूजा पर लगाई रोक
‘लेक टाउन रामनवमी पूजा समिति’ ने पिछले वर्ष 22 मार्च को पूजा की अनुमति के लिए आवेदन दिया था, लेकिन जब राज्य सरकार के दबाव में नगरपालिका ने पूजा की अनुमति नहीं दी तो कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूजा शुरू करने की अनुमति देने का आदेश दिया।

हनुमान जयंती में जुलूस पर रोक
11 अप्रैल, 2017 को पश्चिम बंगाल में बीरभूम जिले के सिवड़ी में हनुमान जयंती के जुलूस पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण ममता सरकार से हिन्दू जागरण मंच को हनुमान जयंती पर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी। 

हिंदुओं पर कानूनी डंडे की चोट
ममता बनर्जी ने 6 अप्रैल, 2017 को बयान दिया – भगवान राम ने दुर्गा की पूजा फूलों के साथ की थी, तलवारों के साथ नहीं। ममता सरकार का इशारा मिलते ही पुलिस ने हनुमान जयंती जुलूस में शामिल होने पर 12 हिन्दुओं को गिरफ्तार कर लिया। उन पर आर्म्स एक्ट समेत कई गैर जमानती धाराएं लगा दीं।

धूलागढ़ दंगे में एंटी हिंदू एक्शन
धूलागढ़ दंगे मेंहिन्दू परिवारों पर आक्रमण हुए। उनके घर जलाए गए, उन्हें मारा-पीटा गया, महिलाओं के साथ बलात्कार हुए, लेकिन ममता सरकार ने हिन्दुओं के बचाव के लिए कुछ नहीं किया। उल्टा हिंसा में 65 आरोपियों को गिरफ्तार करने पर हावड़ा के एसपी (ग्रामीण) सब्यसाची रमन मिश्रा का तबादला कर दिया गया। रिपोर्ट कवर करने गए जी न्यूज की रिपोर्टर, संपादक पर केस दर्ज कराया गया। उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की गयी। 

पुस्तकालयों में नबी दिवस-ईद अनिवार्य
11 जनवरी 2017 को ममता सरकार ने आदेश जारी किया कि नबी दिवस को सरकारी पुस्तकालयों में भी मनाया जाएगा। राज्य के सभी 2480 सरकारी पुस्तकालयों को इसके लिए सरकारी खजाने से फंड देने की भी व्यवस्था की गई। 

ममता राज में सरस्वती पूजा पर बैन
हावड़ा के एक सरकारी स्कूल  पिछले 65 सालों से सरस्वती पूजा मनायी जा रही थी, लेकिन मुसलमानों को खुश करने के लिए ममता सरकार ने 2016 की फरवरी में पूजा पर रोक लगा दी। जब स्कूल के छात्रों ने सरस्वती पूजा मनाने को लेकर प्रदर्शन किया, तो मासूम बच्चों पर डंडे बरसाए गए। 

ममता ने बदला ‘राम’ का नाम
तीसरी क्लास में पढ़ाई जाने वाली किताब अमादेर पोरिबेस (हमारा परिवेश) ‘रामधनु’ (इंद्रधनुष) का नाम बदल कर ‘रंगधनु’ कर दिया गया। साथ ही ब्लू का मतलब आसमानी रंग बताया गया है। दरअसल साहित्यकार राजशेखर बसु ने सबसे पहले ‘रामधनु’ का प्रयोग किया था, लेकिन अब एक समुदाय विशेष को खुश करने के लिए किताब में इसका नाम ‘रामधनु’ से बदलकर ‘रंगधनु’ कर दिया है।

गोहत्या को ममता का समर्थन
18 दिसंबर 2016 को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हुगली में मुसलमानों को संबोधित करते हुए बीफ खाने के प्रति अपना समर्थन दोहराया, ”यह पसंद का मामला है। मेरा अधिकार है मछली खाना। वैसे ही, आपका अधिकार है मांस खाना। आप जो कुछ भी खाएं – बीफ या चिकन, यह आपकी पसंद है।” 

8,000 गांवों से विलुप्त हुए हिंदू
पश्चिम बंगाल के 38,000 गांवों में 8,000 गांव अब इस स्थिति में हैं कि वहां एक भी हिन्दू नहीं रहता, या यूं कहना चाहिए कि उन्हें वहां से भगा दिया गया है। बंगाल के तीन जिलों में आबादी का संतुलन बिगड़ गया है। मुर्शिदाबाद में 47 लाख मुस्लिम और 23 लाख हिन्दू, मालदा में 20 लाख मुस्लिम और 19 लाख हिन्दू, और उत्तरी दिनाजपुर में 15 लाख मुस्लिम और 14 लाख हिन्दू हैं। 

बंगाल में घटती जा रही हिंदुओं की संख्या
पश्चिम बंगाल में 1951 की जनसंख्या के हिसाब से 2011 में हिंदुओं की जनसंख्या में भारी कमी आयी है। अखिल भारतीय स्तर पर भारत की हिन्दू आबादी 0.7 प्रतिशत कम हुई है तो वहीं सिर्फ बंगाल में ही हिन्दुओं की आबादी में 1.94 प्रतिशत की गिरावट हुई है, जो कि बहुत ज्यादा है। राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों की आबादी में 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि सिर्फ बंगाल में मुसलमानों की आबादी 1.77 फीसदी की दर से बढ़ी है, जो राष्ट्रीय स्तर से भी दोगनी है।

बंगाल में लगातार बढ़ती जा रही मुस्लिम आबादी
पश्चिम बंगाल में 1951 की जनसंख्या के हिसाब से 2011 में हिंदुओं की जनसंख्या में भारी कमी आई है। 2011 की जनगणना ने खतरनाक जनसंख्यिकीय तथ्यों को उजागर किया है। जब अखिल स्तर पर भारत की हिन्दू आबादी 0.7 प्रतिशत कम हुई है तो वहीं सिर्फ बंगाल में ही हिन्दुओं की आबादी में 1.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो कि बहुत ज्यादा है। राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों की आबादी में 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि सिर्फ बंगाल में मुसलमानों की आबादी 1.77 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जो राष्ट्रीय स्तर से भी कहीं दुगनी दर से बढ़ी है। प्रदेश में हिंदुओं की आबादी 2001 में 75 प्रतिशत थी, जो 2011 में 70 प्रतिशत हो गई, और आज 2018 में हिंदुओं की आबादी 68 प्रतिशत ही है।

बंगाल में उठने लगी मुगलिस्तान की मांग
कश्मीर के बाद पश्चिम बंगाल में अब गृहयुद्ध होने की आशंका होने लगी है। बड़े पैमाने पर हिंदुओं का कत्लेआम होगा और मुगलिस्तान की मांग की जाएगी। क्योंकि 2013 से पहली बार बंगाल के कुछ कट्टरपंथी मौलानाओं ने अलग ‘मुगलिस्तान’ की मांग शुरू कर दी है। इसकी पृष्ठभूमि भी तैयार होती जा रही है। वर्ष 2017 में हुए दंगों में सैकड़ों हिंदुओं के घर और दुकानें लूट लिए गए और कई मंदिरों को भी तोड़ दिया गया। इन दंगों में सरकार द्वारा पुलिस को आदेश दिये गए कि वो दंगाइयों के खिलाफ कुछ ना करें।

 

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