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राजस्थान-छत्तीसगढ़ को अपने हाल पर छोड़कर दिल्ली में राहुल गांधी की ‘चाकरी’ कर रहे हैं दो राज्यों के मुख्यमंत्री

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राजस्थान की जनता को इन दिनों ऐसा लग रहा है कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत को प्रदेश का मुख्यमंत्री उसने नहीं बनाया है, बल्कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बनाया है। तभी तो वो चार दिन से प्रदेश को अपने हाल पर छोड़कर दिल्ली की सड़कों पर राहुल गांधी को स्वामी-भक्ति दिखा रहे हैं। राहुल गांधी को ईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया है। सामान्य तौर पर पूछताछ चल रही है। ऐसा भी नहीं है कि ईडी ने किसी बड़े नेता को पूछताछ के लिए पहली बार बुलाया हो, लेकिन कांग्रेस पार्टी इसे ऐसे शो कर रही है, जैसे उस पर कोई आफत आ गई है। लाख टके का सवाल यह है कि राहुल-सोनिया गांधी यदि पाक-साफ हैं, तो उन्हें किसी से भी डरने की क्या जरूरत है ? और यदि उन्होंने कोई गड़बड़ी की है तो उसे स्वीकार करने के बजाए कांग्रेसियों के लाव-लश्कर से दबाव की राजनीति क्यों कर रहे हैं ? ?

सोनिया-राहुल गांधी पर 50 लाख लगाकर 2000 करोड़ रुपये बनाने का आरोप
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूछताछ के लिए ईडी के सामने पेश हो रहे हैं। ईडी ने इस मामले में पूछताछ के लिए इस महीने की शुरुआत में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी सांसद राहुल गांधी को समन जारी किया था। सोनिया गांधी के समन जारी होने के बाद कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से ED ने उनसे पूछताछ की तारीख 23 जून तक के लिए बढ़ा दी है। राहुल और सोनिया गांधी पर 50 लाख लगाकर 2000 करोड़ बनाने का आरोप है। वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका दाखिल करते हुए सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस के ही मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीज, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे पर घाटे में चल रहे नेशनल हेराल्ड अखबार को धोखाधड़ी और पैसों की हेराफेरी के जरिए हड़पने का आरोप लगाया था।

राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अपने ‘दिल्ली-दरबार’ को खुश करने में लगे
ईडी की इसी पूछताछ के खिलाफ कांग्रेस नेता सड़कों पर हैं। कांग्रेसी न सिर्फ अपने राज्यों में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि दिल्ली में जाकर भी दबाव की राजनीति करने में लगे हैं। यहां तक कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी सारा कामकाज छोड़कर दिल्ली-दरबार को खुश करने में लगे हैं। इसके लिए ट्वीटर पर कांग्रेस नेताओं को ट्रोल किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि कांग्रेस का यह प्रदर्शन दूसरे बड़े नेताओं के समर्थन मे क्यों नहीं होता। सिर्फ सोनिया-राहुल की चमचागिरी और हाजिरी लगाने की होड़ मची हुई है। किसी को टिकट चाहिए, किसी को कुर्सी और किसी को हिस्सा। लेकिन कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों को अपने राज्य की जनता का जरा भी फिक्र नहीं है।

गहलोत बताएं, राजस्थान को छोड़कर कौनसा शासकीय कार्य दिल्ली में कर रहे हैं- सुधांशु
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पूछा- दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री राज्य का सारा कामकाज छोड़ यहां क्यों डटे हैं? क्या ये उन राज्यों के साथ धोखा या छल नहीं है, जिन्होंने कांग्रेस को लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता के लिए चुना था? गहलोत जी क्या यह बताएंगे कि तीन दिन से आप राजस्थान को छोड़कर कौनसा शासकीय कार्य कर रहे हैं। जो आपके संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप और संविधान व राजस्थान सरकार की ओर से प्रदत्त आपकी सुविधाओं का वास्तविक व समुचित उपयोग प्रमाणित करता है।

इस धरना-प्रदर्शन से साबित कि कांग्रेस में पद और कद, दोनों का कोई महत्व नहीं
त्रिवेदी ने कहा- राहुल गांधी न कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और न ही नेता प्रतिपक्ष। वे केवल सांसद हैं और वरिष्ठ भी नहीं। उनसे कई सांसद काफी वरिष्ठ हैं। उनके लिए यहां धरना-प्रदर्शन करना, यानी स्पष्ट है कि कांग्रेस में पद और कद, दोनों का कोई महत्व नहीं। यह केवल परिवार की पार्टी है, यह इससे साबित हो गया। उन्होंने कहा कि सरकारी एजेंसी को काम करने से रोकने के लिए दबाव बनाना और दबाव झड़प और आगजनी की सीमा तक ले जाना, यह दर्शा रहा है कि जो ये तीन दिन से जमावड़ा हुआ था, इसका वास्तविक मतलब क्या था, वह क्रमश: उजागर होता चला गया।

सीएम का ‘दिल्ली-दरबार’ में बिजी, जयपुर कांग्रेस मुख्यालय पर बेरोजगारों का डेरा
एक ओर सीएम अशोक गहलोत दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं, तो दूसरी ओर राजस्थान सरकार के खिलाफ बेरोजगारों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 4 दिन से लंबित मांगों को लेकर शहीद स्मारक पर धरना दे रहे बेरोजगार सुबह प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पहुंच गए। जहां पुलिस ने उन्हें बाहर ही रोक दिया इससे नाराज बेरोजगारों ने पीसीसी मुख्यालय के बाहर ही धरना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार हमारी सभी मांगों को नहीं मान लेती, हम यहां से नहीं उठेंगे। राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन यादव ने बताया कि सरकार ने कई बार हमसे लिखित समझौता किया। बावजूद इसके अब तक हमारी लंबित मांगों को पूरा नहीं किया है। बेरोजगार इस बार सरकार की लॉलीपॉप के झांसे में नहीं आएंगे।

कांग्रेस सरकार में काफी समय से लंबित हो रही बेरोजगारों की प्रमुख मांगें
• टेक्निकल हेल्पर भर्ती में पद बढाकर 6000 किये जाए।
• पंचायतीराज विभाग JEN भर्ती की विज्ञप्ति जल्द से जल्द जारी करें l
• जूनियर अकाउंटेंट भर्ती को CET से बाहर किया जाए।
• राजस्थान की सरकारी नौकरियों में बाहरी राज्यों का कोटा फिक्स किया जाए।
• रेडियोग्राफर लैब टेक्नीशियन ईसीजी भर्ती की विज्ञप्ति जारी की जाए।
• शिक्षक भर्ती में विशेष शिक्षकों के पद बढ़ाए जाए।
• पंचायजी राज एलडीसी 2013 मुख्य परीक्षा का कलेंडर जारी किया जाए।
• लखनऊ और पूर्व में हुए लिखित समझौतों की तमाम मांगे जल्द से जल्द पूरी की जाएl

 

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