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बीजेपी की चुनौती से डरे केजरीवाल, AAP और कांग्रेस में अंदरूनी साठगांठ

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, सियासी तस्वीर स्पष्ट होती जा रही है। बीते एक हफ्ते में दिल्ली की चुनावी हवा का रूख पूरी तरह बदल चुका है। बीजेपी से मिल रही कड़ी टक्कर को देखते हुए आम आदमी पार्टी ने भी अपनी रणनीति बदल दी है और कांग्रेस से अंदरूनी साठगांठ कर ली है। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि इस चुनावी शोरगुल में कांग्रेस की आवाज कहीं गुम हो गई है या फिर ये कहें कि ‘गुम’ कर दी गई है।

दिल्ली कांग्रेस के इंचार्ज पीसी चाको केजरीवाल को मार्केटिंग गुरु बता रहे हैं। यानी कांग्रेस, गुरु केजरीवाल के आगे नतमस्तक हो गई है और हथियार डाल दिए हैं। बात सीधी और साफ़ है। चुनाव के सबसे निर्णायक क्षणों में कांग्रेस का अरविंद केजरीवाल को गुरु कहना भर उसका मॉरल बूस्ट करता नजर आ रहा है। बात तब होती जब केजरीवाल से लड़ने के लिए उन्हीं के अंदाज में कांग्रेस अपनी रणनीति बनाती और चुनावों में उनसे कड़ा मुकाबला करती।

टिकट वितरण से पहले दिल्ली प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको का ये बयान गौर करने वाला है कि वो चुनाव से पहले तो नहीं, लेकिन चुनाव के बाद जरूर आप के साथ जरूरत पड़ने पर कोई गठबंधन कर सकते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि चाको पूर्व में भी आप के साथ जाने पर जोर देते रहे हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव-2020 को लेकर नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, शशि थरूर, नवजोत सिंह सिद्धू, शत्रुघ्न सिन्हा को इस सूची में शामिल किया गया है। इसके अलावा, स्टार प्रचारकों की सूची में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को रखा गया है।

चुनावी सरगर्मी के बीच राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी गायब नजर आ रहे हैं। राहुल और प्रियंका दोनों के ही ऑफिस से इस बात की पुख्ता जानकारी सामने नहीं रही है कि उनका दिल्ली में चुनाव रैली का शेड्यूल क्या है। वहीं, राहुल का हाल ही में जयपुर रैली के लिए जाना और अब रैली के लिए केरल जाने की तैयारी करना संकेत दे रहा है कि कांग्रेस दिल्ली को लेकर अपना मन बना चुकी है।

चुनाव प्रचार में कांग्रेस की टॉप लीडरशिप की खामोशी कांग्रेसी प्रत्याशियों के लिए मुसीबत बनी हुई है। हाल ये है कि प्रत्याशियों के निजी रिश्तों के आधार पर कांग्रेस के कुछ लीडर प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा कालकाजी से अपनी बेटी के चुनाव प्रचार में ज्यादा वक्त दे रहे हैं। वहीं, कांग्रेसी नेता राज बब्बर और जितिन प्रसाद ने कुछ जगह जरूर प्रचार किया है। हालांकि कांग्रेस की ओर से टॉप लीडरशिप के बचाव में बार-बार ये कहा जा रहा है कि सीनियर चुनाव अभियान के अंतिम चरण में प्रचार करेंगे।

चुनाव एक्सपर्ट की नजर में कांग्रेस रणनीतिक रूप से बीजेपी को मात देने के लिए ऐसा कर रही है। गौरतलब है कि 2015 दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत दो अंकों तक भी नहीं पहुंचा था, जबकि बीजेपी का वोट प्रतिशत 30 प्रतिशत से ऊपर तब भी रहा था। साफ है कि आप का बढ़ा वोट प्रतिशत दरअसल अधिकतर कांग्रेस के हिस्से से आया था। कांग्रेस पार्टी जानती है कि उसके वोट प्रतिशत में जरा भी उछाल आने का सीधा मतलब है कि आप की सीटें कम होना और बीजेपी की सीटें बढ़ना है, जो वो चाहती नहीं है। इसलिए दिल्ली में कांग्रेस मौन है। इसका फायदा आम आदमी पार्टी को मिलेगा यानी दिल्ली के इस चुनाव में कांग्रेस आप को परदे के पीछे से समर्थन दे रही है ताकि वो बीजेपी से मुकाबला करे।

उधर आम आदमी पार्टी चुनाव प्रचार में आगे नजर आ रही थी, लेकिन जैसे ही बीजेपी मुकाबले में आई केजरीवाल ने अपनी रणनीति बदल दी। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि केजरीवाल के निशाने पर सिर्फ बीजेपी है। वह बीजेपी पर लगातार हमले कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के खिलाफ उन्होंने कोई बयान नहीं दिया है। 

इस बार के चुनाव में जैसा रुख बीजेपी का है वो ये साफ़ बता रहा है कि उसने अपनी पुरानी गलतियों से प्रेरणा ली है। बीजेपी इस बात को भली प्रकार से समझती है कि बिना उग्र हुए चुनाव नहीं लड़ा जा सकता और अपनी नीतियों को अमली जामा पहनाने में वो कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

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