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कर्नाटक में सरकार बनी नहीं और रंग दिखाने लगे कुमारस्वामी

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कर्नाटक में अभी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार का गठन हुआ भी नहीं है और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। कर्नाटक में जनादेश को ठेंगा दिखाकर कांग्रेस पार्टी ने जेडीएस को सरकार बनाने के लिए समर्थन दे दिया और एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। यह बेमेल और अवसरवादी गठबंधन कितने दिन चलेगा इस पर संदेह बना हुआ है। कुमारस्वामी का पूर्व का इतिहास देख कर तो ऐसा ही लगता है। 

बारी-बारी से नहीं बदला जाएगा मुख्यमंत्री
विधानसभा में बीजेपी के बहुमत सिद्ध करने तक चुप्पी साधे रहे जेडीएस नेता कुमारस्वामी ने अब अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं। कुमारस्वामी ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश देते हुए 30-30 महीने सरकार का नेतृत्व करने के फॉर्मूले को खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस बारे में कांग्रेस के नेताओं से कोई बात नहीं हुई है। इतना ही नहीं उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों के नामों और विभागों पर भी पेंच फंसता नजर आ रहा है। जाहिर है कि मीडिया में इस तरह की खबरें चल रही हैं कि कर्नाटक में गठबंधन सरकार में शुरू के ढाई साल जेडीएस का सीएम रहेगा और बाद के ढाई साल कांग्रेस का मुख्यमंत्री रहेगा, लेकिन कुमारस्वामी ने इन अटकलों को खारिज कर दिया है।

क्या कर्नाटक में चल पाएगा बेमेल गठबंधन?
कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने मुंह की खाने के बाद तिकड़बाजी दिखाकर अपने धुर विरोधी जेडीएस का दामन थाम लिया है। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे सिद्धारमैया, जनता दल सेक्युलर के नेताओं को पानी पी-पी कर कोसते थे। सिद्धारमैया और कुमारस्वामी चुनावी रैलियों में एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते नहीं थकते थे। चुनाव के बाद जब जेडीएस 40 से घटकर 37 सीटों पर सिमट गई और कांग्रेस पार्टी 122 से गिरकर 78 सीटों पर आ गई, तो दोनों दलों को अपनी हैसियत का अंदाजा हो गया। अब भाजपा को रोकने के लिए दोनों ने हाथ मिलाया है। पर जिन दलों में इतना अधिक विरोधाभास हो, विचारधारा अलग-अलग हो उनका बेमेल गठबंधन कितने दिन चल पाएगा, इस पर संदेह है।

जनादेश को धोखा देकर सरकार चला पाएंगे कांग्रेस-जेडीएस?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणामों से यह स्पष्ट है कि राज्य की जनता ने भाजपा के पक्ष में जनादेश दिया है। यह अलग बात है कि भाजपा को बहुमत के आंकड़े से कुछ कम सीटें मिली हैं, लेकिन वो 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। हर जगह पर भाजपा के प्रत्याशियों ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। कर्नाटक के शहरी इलाके हों या फिर ग्रामीण इलाके हर जगह भाजपा ने परचम लहराया है। भाजपा के नंबरों में पिछड़ने से कांग्रेस पार्टी की बाछें खिल गईं और उसने जेडीएस को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। ऐसा कर के कांग्रेस पार्टी ने कर्नाटक के लोगों के जनादेश का अपमान किया है। यह स्पष्ट है कि कर्नाटक के लोगों ने तीसरे नंबर की पार्टी की सरकार बनाने के लिए जनादेश नहीं दिया है, लेकिन कांग्रेस ने लोगों की भावनाओं को दरकिनार कर अपने फायदे के लिए जनादेश का मजाक उड़ा है। अब देखना यह है कि लोगों के जनादेश को धोखा देकर कांग्रेस-जेडीएस सरकार कितने दिन चल पाएगी।

भ्रष्टाचार का पर्याय हैं एचडी कुमारस्वामी
जिस कुमारस्वामी को कांग्रेस पार्टी आज अपना सबकुछ मान कर चल रही है, लगता है अपने फायदे के लिए कांग्रेस पार्टी उसके अतीत को भूल गई है। कुमारस्वामी कर्नाटक के भ्रष्टतम नेताओं में से एक हैं। indiatoday.in में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में एक ऑडियो सीडी सामने आई थी, इसमें कथित तौर से वे एक जेडीएस नेता से एमएलसी बनाए जाने के लिए 40 करोड़ रुपये मांगते सुने गए थे। इससे पहले भी 2006 में एचडी कुमारस्वामी पर 150 करोड़ रुपये घूस लेने के आरोप लगा था। कुमारस्वामी कई बार करप्शन से जुड़े विवादास्पद बयान भी देते रहे हैं। एक बार उन्होंने कहा था ‘अगर आज महात्मा गांधी जिंदा होते, वे अपनी राजनीतिक पार्टी चलाने के लिए भ्रष्ट हो चुके होते, अगर वे ऐसा नहीं करते तो उन्हें राजनीति छोड़ना पड़ता।’

अपने काले कारनामे छिपाने के लिए कांग्रेस ने दिया समर्थन!
अब सवाल यह उठता है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे रहे जेडीएस नेता कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री क्यों बना रही है कांग्रेस पार्टी? इसका सीधा सा जवाब है, पांच वर्षों में सिद्धारमैया की नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे हैं। कहा जाता है कि कांग्रेस सरकार में बगैर रिश्वत दिए एक भी काम नहीं होता था। चाहे खनन का मामला हो, या फिर निर्माण कार्यों का, एक भी काम घूस लिए नहीं होता था। सिद्धारमैया के आय्याशी के किस्से तो राजनीतिक गलियारे में खासे चर्चित रहे। ऐसे में अब माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी कुमारस्वामी को बिना शर्त समर्थन देकर पांच वर्षों के अपने काले कारनामों को छिपाने की कोशिश कर रही है।

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