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काप-26 शिखर सम्मेलन : इंडिया ग्रीन गारंटी की शुरुआत, भारत में स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बढ़ावा

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मोदी सरकार देश में स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए फेम-इंडिया स्‍कीम के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के खरीदारों को कई तरह की रियायतें दे रही हैं। वहीं मोदी सरकार के इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी प्राप्त हो रहा है। ग्लासगो में आयोजित काप-26 शिखर सम्मेलन में ब्रिटेन ने सहायता-समर्थित निजी अवसंरचना विकास समूह (पीआईडीजी) के तहत भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों सहित विकासशील देशों में परिवर्तनकारी हरित परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए के लिए 21 करोड़ पाउंड से अधिक के नये निवेश की प्रतिबद्धता जताई।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने काप-26 शिखर सम्मेलन में ‘एक्शन एंड सॉलिडेरिटी राउंडटेबल’ में विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त पोषण, हरित तकनीक के लोकतंत्रीकरण और जलवायु संकट के अन्य समाधानों के महत्व पर जोर दिया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के अलावा 24 अन्य देशों के शासनाध्यक्ष उपस्थित थे।

विकासशील देशों को हरित प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने और उनकी अर्थव्यवस्थाओं को स्थायी रूप से विकसित करने में मदद करने के लिए काप-26 में ‘स्वच्छ हरित पहल’ की शुरुआत हुई। भारत में हरित परियोजनाओं के लिए 75 करोड़ पाउंड (लगभग 7,500 करोड़ रुपये) की अतिरिक्त राशि के वास्ते ब्रिटेन विश्व बैंक को ‘इंडिया ग्रीन गारंटी’ प्रदान करेगा। हरित गारंटी वित्त पोषण स्वच्छ ऊर्जा, परिवहन और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में स्वच्छ और लचीले बुनियादी ढांचे का समर्थन करेगा। 

इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2070 में नेट जीरो इमिशन लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने की अपील की। इसके तहत भारत वर्ष 2030 तक अपनी इकोनॉमी में कार्बन की मात्रा 45 प्रतिशत घटा लेगा। इसके लिए सौ करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन को कम किया जाएगा। साथ ही वर्ष 2030 तक देश की ऊर्जा जरूरत का 50 प्रतिशत गैरपारंपरिक ऊर्जा स्त्रोतों से पूरा किया जाएगा। इसके लिए वर्ष 2030 तक नवीकरणीय स्रोतों यानि सोलर, विंड, हाइड्रो आदि से पांच लाख मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। अभी तक यह लक्ष्य 4.50 लाख मेगावाट का था।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत सहित अधिकतर विकासशील देशों के लिए जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती है, इससे खेती के तौर तरीकों में बदलाव आ रहा है, फसलें तबाह हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर वैश्विक चर्चाओं में अनुकूलन को उतना महत्व नहीं दिया गया, जितना उसके प्रभावों को कम करने को दिया गया। उन्होंने इसे जलवायु परिवर्तन से अधिक प्रभावित विकासशील देशों के साथ ‘अन्याय’ करार दिया।

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