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राजस्थान में गहलोत सरकार में तुष्टीकरण की सारी हदें पार, चिकित्सा विभाग ने धार्मिक आधार पर किए डॉक्टरों के तबादले, विधायक के आगे चिकित्सा मंत्री को झुकना पड़ा

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राजस्थान में कांग्रेस नेताओं की गुटबाजी और मनमुटाव कम होने का नाम नहीं ले रही है। विधायक अमीन कागज़ी अपने समर्थकों के साथ चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा के जयपुर स्थित सरकारी आवास पर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस विधायक कागजी के अपनी ही सरकार के मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोलने की वजह तबादले हैं। विधायक अपने इलाके के चार मुस्लिम डॉक्टर के तबादले से नाराज हैं। इसको लेकर चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा और विधायक अमीन कागज़ी के बीच नोकझोंक भी हुई। दोनों नेता मुस्लिम डॉक्टरों के तबादले को लेकर आमने-सामने हुए और इसका वीडियो वायरल हुआ तो दबाव में आकर चिकित्सा मंत्री ने मुस्लिम डॉक्टरों के तबादले रद्द कर दिए। बीजेपी ने इसे तुष्टिकरण की इंतेहा बताया है। पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा है कि अब गहलोत सरकार तबादले भी हिंदू-मुस्लिम के आधार पर कर रही है।

धार्मिक आधार पर चार मुस्लिम डॉक्टरों के तबादले से भड़के कांग्रेस विधायक
दरअसल कांग्रेस विधायक अमीन कागजी अपने क्षेत्र के चार मुस्लिम डॉक्टरों के तबादले से इतने भड़के कि अपनी ही सरकार के चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीना के बंगले पर समर्थकों के साथ जा पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम डॉक्टरों के तबादले जानबूझकर किए गए हैं। इन तबादलों को तत्काल रद्द किया जाए। इस पर चिकित्सा मंत्री ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है, तबादला आदेश नियमानुसार हैं। इसे आप अनावश्यक मुद्दा बना रहे हैं। इससे विधायक कागजी और भड़क गए और समर्थकों के साथ मंत्री के बंगले पर धरने पर बैठ गए।

अपनी ही सरकार के चिकित्सा मंत्री के आवास पर धरने पर बैठे विधायक
इसी बीच विधायक और मंत्री में हुई नौक-झौंक का किसी ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। विधायक अमीन कागजी ने चिकित्सा मंत्री के बंगले पर पहुंचे मीडिया से कहा कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाएगी तब तक वे धरने पर बैठे रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी पसंद के डाक्टर उनके इलाके में तैनात होने चाहिए और जिन चार मुस्लिम डॉक्टरों का तबादला किया गया है उसे तत्काल निरस्त किया जाए। इसके बाद गतिरोध दूर करने के लिए दोनों नेताओं के बीच बैठक भी हुई, लेकिन वार्ता में सहमति नहीं बन पायी। विधायक के समर्थकों ने नारेबाजी भी शुरू कर दी।

विधायक के दबाव में चिकित्सा मंत्री को तबादला आदेश तत्काल करना पड़ा रद्द
कागजी का गुस्सा देख चिकित्सा मंत्री परसादी मीणा धरना स्थल पर पहुंचे। पहले तो परसादी मीना ने इन चार मुस्लिम डॉक्टर्स के तबादले को लेकर अपनी सफाई दी और कहा कि तबादलों में कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन अमीन कागजी चारों मुस्लिम डॉक्टर्स के तबादला आदेश रद्द करने की मांग पर अड़ गए और कहा कि अभी तबादला आदेश निरस्त करने के आदेश किए जाएं। मंत्री ने विधायक को धरने से उठाने के प्रयास भी किए, लेकिन विधायक समर्थकों के साथ ही धरने पर बैठे रहे। आखिरकार अपने जिन तबादला आदेशों को चिकित्सा मंत्री परसादी मीना नियमानुसार बता रहे थे, उन चार मुस्लिम डॉक्टर्स के ट्रांसफर उनको रद्द करना पड़ा। चिकित्सा मंत्री ने पहले इन डॉक्टर्स को बाहर लगा दिया था।

डॉक्टर धर्म देखकर इलाज नहीं करते तो तबादलों में हिंदू-मुस्लिम कार्ड क्यों- देवनानी
पूर्व शिक्षा मंत्री और अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि जब सरकारी नौकरी में इस बात को कोई तवज्जो नहीं दी जाती है कि नौकरी पाने वाला किस धर्म का है, तो फिर तबादलों में हिन्दू-मुस्लिम कार्ड क्यों अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर मानव जाति को सर्वोपरि मानकर मरीजों की सेवा करते हैं। इलाज करते हुए यह नहीं पूछते और देखते हैं कि मरीज किस जाति या धर्म का है, तो फिर तबादले हिन्दू-मुस्लिम के आधार पर करने का औचित्य समझ में नहीं आता है।

चिकित्सा ही नहीं अन्य विभागों में भी धार्मिक आधार पर हो रहे तबादलों पर रोक लगे
देवनानी ने कहा कि किशनपोल से कांग्रेस विधायक अमीन कागजी खुद चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा द्वारा अपनाई गई नीति से खासे नाराज हैं। देवनानी ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को धर्म और जाति के आधार पर बांटना ठीक नहीं है। यदि सरकार ऐसी ही नीति पर चलती रही, तो यह उसके लिए ही सबसे ज्यादा घातक होगा। केवल चिकित्सा विभाग ही नहीं, शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग सहित अन्य विभागों में भी धर्म के आधार पर कार्मिकों के तबादले किए जा रहे हैं। इससे कर्मचारियों में वैमनस्य पैदा होने का खतरा बना रहेगा। साथ ही उन कार्मिकों में कुंठा पनपेगी, जो राज्य के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि तबादलों में पूरी तरह पारदर्शिता होनी चाहिए।

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