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मोदी सरकार ने किसानों को फिर दिया दिवाली गिफ्ट, किसान सम्मान निधि के बाद अब रबी फसलों की MSP में बढ़ोतरी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार किसानों के हित के लिए समर्पित है। दीपावली से पहले मोदी सरकार ने किसानों को दोहरी खुशी दी है। क‍िसानों के खाते में पीएम क‍िसान की 12वीं क‍िस्‍त जारी करने के एक द‍िन बाद एक और दिवाली गिफ्ट दिया है। केंद्रीय कैब‍िनेट ने गेहूं और दाल समेत 6 रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। जहां गेंहू के एमएसपी में 110 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, वहीं सबसे अधिक एमएसपी 500 रुपये प्रति कुंतल मसूर की फसल पर बढ़ाई गई है। पिछले दिनों हुई भारी बारिश से फसलों को नुकसान को देखते हुए इसे किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (18 अक्टूबर, 2022) को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल की समिति (सीसीईए) की बैठक हुई। इस बैठक में एमएसपी बढ़ाने का फैसला किया गया। सीसीईए ने फसल वर्ष 2022-23 (जुलाई-जून) और विपणन सत्र 2023-24 में छह रबी फसलों के लिए एमएसपी में वृद्धि को मंजूरी दी। एक बयान में कहा गया कि किसानों के उत्पादन और आय को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला किया गया। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने रबि फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी के इस फैसले की जानकारी दी। 

फसल वर्ष 2022-23 के लिए गेहूं का एमएसपी 110 रुपये बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो फसल वर्ष 2021-22 में 2,015 रुपये प्रति क्विंटल था। बयान में कहा गया है कि गेहूं की उत्पादन लागत 1,065 रुपये प्रति क्विंटल रहने का अनुमान है। इसके अलावा सरकार ने सरसों की एमएसपी में 400 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी की है। मसूर की एमएसपी में 500 रुपये प्रति कुंतल, जौ की एमएसपी में 100 रुपये प्रति कुंतल, कुसुम की एमएसपी में 209 रुपये प्रति कुंतल और चना की एमएसपी में 105 रुपये प्रति कुंतल का इजाफा किया गया है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य का ऐलान सरकार की तरफ से कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिश पर साल में दो बार रबी और खरीफ के मौसम में किया जाता है। गन्ने का समर्थन मूल्य गन्ना आयोग तय करता है।कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने गेहूं समेत सभी रबी फसलों की एमएसपी में 3 से 9% बढ़ोतरी की सिफारिश की थी। मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और उद्देश्यपूर्ण बनाने के लिए पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन किया था।

गौरतलब है कि एमएसपी वह न्यूनतम मूल्य है, जिस पर सरकार किसानों से फसल खरीदने की गारंटी देती है। बाजार में आनाज का दाम चाहे जितना भी कम हो, सरकार द्वारा दी जाने वाली एमएसपी से किसान का हित काफी हद तक सुरक्षित होता है। किसी फसल का एमएसपी सरकार इसलिए तय करती है ताकि किसानों का हक न मारा जाए और किसी भी हालत में उनको फसल का उचित न्यूनतम मूल्य मिलता रहे। इससे बाजार में फसलों की कीमतों में होने वाली गिरावट का असर किसानों पर नहीं पड़ता और वे काफी हद तक किसी नुकसान से बचे रहते हैं।

 

 

 

 

 

 

जानकारी के अनुसार, सरकार ने सरसों की एमएसपी में 400 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी की है। वहीं, मसूर की एमएसपी में 500 रुपये प्रति कुंतल, गेहूं की एमएसपी में 110 रुपये कुंतल, जौ की एमएसपी में 100 रुपये प्रति कुंतल, कुसुम की एमएसपी में 209 रुपये प्रति कुंतल और चना की एमएसपी में 105 रुपये प्रति कुंतल का इजाफा किया गया है।

 

 

कैब‍िनेट ने सरसों की MSP में 400 रुपये प्रत‍ि क्‍व‍िंटल की बढ़ोतरी की है. इसके अलावा मसूर की MSP में 500 रुपये प्रत‍ि क्‍व‍िंटल और जूट की MSP में 110 रुपये प्रत‍ि क्‍व‍िंटल का इजाफा क‍िया गया है.

 

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