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केरल-महाराष्ट्र में बढ़ते कोरोना केस ने बढ़ाई चिंता, देश में आधे से ज्यादा नए मामले सिर्फ इन दो राज्यों से

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केरल और महाराष्ट्र में कोरोना के मामले कम नहीं हो रहे हैं। इन दो राज्यों में बढ़ते कोरोना के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। देश में जहां हर जगह कोरोना के मामलों में कमी आ रही है, वहीं छोटा सा राज्य केरल देश को डरा रहा है। केरल शुरू से ही कोरोना हब बना हुआ है। पौने चार करोड़ से भी कम की आबादी वाला केरल 65.58 लाख मामलों के साथ कोरोना के मामले में देश में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। केरल में पिछले 24 घंटे में 1,370 नए मामले सामने आने के साथ ही राज्य में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 65,59,623 हो गई, जबकि 6 और मरीजों की मौत के बाद मृतकों की संख्या 69,753 पर पहुंच गई है। कोरोना से मौत के मामले में यह छोटा सा राज्य देश में दूसरे स्थान पर है।

महाराष्ट्र में भी कोरोना विस्फोट की स्थिति है। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में 1045 नए मामले सामने आए हैं। यहां कोरोनो से अब तक1,47,861 लोगों की मौत हो चुकी है। केरल और महाराष्ट्र के कारण देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 4,041 नए मामले सामने आए हैं।

पिछले 24 घंटों में दिल्ली में कोरोना के 373 नए मामले सामने आए हैं, इससे दिल्ली में अब तक कोरोना के कुल 19,07,637 मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही दिल्ली में अभी तक कोरोना से 26,212 लोगों की मौत हो चुकी है।

देश में तेज रफ्तार से जारी कोरोना टीकाकरण के कारण अब तक 193.83 करोड़ से अधिक कुल 1,93,83,72,365 टीके लगाए जा चुके हैं। 12 से 14 आयु वर्ग के 3,42,27,853 से ज्यादा बच्चों को पहली खुराक दी जा चुकी है। 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 5,95,51,915 किशोरों को पहली खुराक और 4,60,19,813 किशोरों को दूसरी खुराक भी दी जा चुकी है।

टीकाकरण के कारण देश में सक्रिय मामले 21,177 पर हैं। सक्रिय मामले अब कुल मामलों के 0.05 प्रतिशत हैं। पिछले 24 घंटों में 2,363 रोगियों के ठीक होने के साथ ही स्वस्थ होने वाले मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 4,26,22,757 हो गई है। इससे देश में स्वस्थ होने की दर 98.74 प्रतिशत पर है। लेकिन केरल और महाराष्ट्र के कारण कोरोना केस कम नहीं हो रहे हैं। आपको हैरानी होगी की देश में आधे से ज्यादा कोरोना के नए मामले सिर्फ केरल और महाराष्ट्र से आ रहे हैं। राज्य सरकार की लापरवाही के कारण इन राज्यों में कोरोना के मामले कम नहीं हो पा रहे हैं।

केरल ने तो कोरोना मौत के मामले को दबाने की भी कोशिश की। अदालत की सख्ती के बाद केरल ने बैकलॉग जोड़ने शुरू किए। इससे कोरोना से मौत के मामले अचानक काफी बढ़ गए। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 21 अक्तूबर, 2021 से लेकर 11 नवंबर, 2021 के बीच 21 दिनों में सरकारी डेटा में दिखाई गई 7,838 मौतों में सिर्फ 1,257 ताजा मामले थे। इनमें से 6,581 मौतें पहले के थे। लेफ्ट सरकार इसी तरह आंकड़े को कम दिखाकर केरल मॉडल पर पक्षकारों से वाहवाही प्राप्त कर अपने पक्ष में माहौल बनाती थी।
कोरोना मामले में आगे होने के बाद भी यहां की वामपंथी सरकार ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए बकरीद पर प्रतिबंधों में छूट दे दी थी। इससे राज्य में एक बार फिर कोरोना विस्फोट हो गया। तथाकथित सेकुलर, लिबरल पक्षकारों के बल पर केरल मॉडल को लेकर वाहवाही लूटने वाली वामपंथी सरकार कोरोना प्रबंधन में पूरी तरह से फेल साबित हुई है।

इन आंकड़ों से साफ है कि प्रोपगेंडा और लेफ्ट मीडिया के बल पर दुनिया भर में केरल मॉडल का बखान करने वाली केरल सरकार की पोल खुल गई है। बकरीद पर प्रतिबंधों में छूट को लेकर 20 जुलाई, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि ये डरावना है कि ऐसे हालात होने को बावजूद पाबंदियों में इस तरह छूट दी गई। कोरोना के इस हालात में रियायत देना सॉरी स्टेट ऑफ अफेयर है। 

इस सबके बावजूद केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन कोरोना को लेकर कितने गंभीर हैं, इसका नजारा पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी के साथ छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में देखने को मिला।

सीएम पी विजयन बैठक के दौरान चाय पीते और कुछ खाते दिखाई दिए। ऐसा लग रहा था कि वे सिर्फ बैठक में शामिल होने की औपचारिकता निभा रहे थे। उनकी हरकत से साफ लग रहा था कि बैठक में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं थी। देखिए वीडियो-

इतना सब होने के बाद भी लेफ्ट के करीबी पक्षकार केरल के सीएम का पक्ष ले रहे हैं और केरल मॉडल की प्रशंसा करने में जुटे हुए हैं। इसे क्या कहिएगा

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