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अपनी विफलता छिपाने के लिए रेलवे को निशाना बनाने वाले सीएम उद्धव ठाकरे को रेल मंत्री का करारा जवाब

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की नाकारापन की वजह से जहां एक तरफ महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण बेकाबू हो गया है, वहीं दूसरी तरफ प्रवासी मजदूरों के पलायन की समस्या भी विकराल होती जा रही है। अपनी नाकामी को छिपाने के लिए सीएम उद्धव ठाकरे कभी केंद्र सरकार, कभी रेल मंत्रालय, कभी स्वास्थ्य मंत्रालय पर ठीकरा फोड़ते रहे हैं। इस बार भी मजदूरों के पलायन और रेलवे स्टेशनों के बाहर बार-बार मजदूरों की भीड़ बेकाबू होने के लिए उद्धव ठाकरे ने रेलवे मंत्रालय को जिम्मेदार बताया है।

उद्धव ठाकरे ने रेलवे पर ट्रेनें नहीं देने का आरोप लगाया है। जबकि सच्चाई यह है कि मुंबई और महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए रेलवे लगातार श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चला रही है। लाखों मजदूरों को अभी तक उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा चुका है। ऐसे में ठाकरे ने आरोप लगाया है कि उन्होंने रेवले को 200 ट्रेने चलाने को कहा है, लेकिन रेलवे ऐसा नहीं कर रहा है।

सीएम उद्धव ठाकरे के इस आरोप को झूठा बताते हुए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र सरकार पर एक तरह से झूठ बोलने का आरोप भी लगाया है। रेल मंत्री ने महाराष्ट्र सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें 200 ट्रेनों की लिस्ट देने की बात कही गई थी।

रेल मंत्री पीयूष गोयल का मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को संबोधित करते हुए लिखा है, “उद्धव जी, आशा है आप स्वस्थ हैं। आपके अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभेच्छा। कल हम महाराष्ट्र से 125 श्रमिक स्पेशल ट्रेन देने के लिए तैयार हैं। अपने बताया कि आपके पास श्रमिकों की लिस्ट तैयार है। इसलिए आपसे अनुरोध है:
सभी निर्धारित जानकारी जैसे, कहां से ट्रेनें चलेंगी, यात्रियों की ट्रेनों के हिसाब से सूची, उनका मेडिकल सर्टिफ़िकेट और कहां ट्रेन जानी है, यह सब सूचना अगले एक घंटे में मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को पहुंचाने की कृपा करें। इससे हम ट्रेनों की योजना समय पर कर सकें।

उम्मीद है कि पहले की तरह ट्रेन स्टेशन पर आने के बाद, वापिस ख़ाली ना जानी पड़े। आपको आश्वस्त करना चाहूंगा कि आपको जितनी ट्रेन चाहिए वो उपलब्ध होंगी। टीवी के माध्यम से पता चला है कि महाराष्ट्र सरकार ने 200 ट्रेनों की लिस्ट भारतीय रेल को देने का दावा किया है। पर कल चलने वाली एक भी ट्रेन के यात्रियों की लिस्ट जीएम मध्य रेल के पास फ़ॉलोअप के बाद भी नहीं आई है। कृपया लिस्ट जल्दी देने की कृपा करें।

महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार की नाकामी के कुछ और सुबूत आपको दिखाते हैं-

कोरोना मरीजों के आंकड़े छिपा रही है महाराष्ट्र की उद्धव सरकार
देश में सबसे अधिक महाराष्ट्र में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए बीएमसी (Brihanmumbai Municipal Corporation)ने निजी अस्पतालों को भी इलाज की अनुमति दी है। लेकिन इसी बीच एक डॉक्टर को भेजे गए नोटिस ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या उद्धव सरकार कोरोना मरीजों की वास्तविक संख्या को छिपाना चाहती है? क्या उद्धव सरकार नहीं चाहती कि राज्य में कोरोना की वास्तविक स्थिति के बारे में लोगों को जानकारी हो ?

बीएमसी ने घाटकोपर के एक डॉक्टर चेतन वेलानी को कोविड 19 के स्वैब टेस्ट की सिफारिश करने पर नोटिस भेजा है, जिसमें आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। साथ ही बीएमसी ने 24 घंटे में नोटिस का जवाब नहीं देने पर डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की धमकी दी है। बीएमसी की इस नोटिस के बाद विवाद उत्पन्न हो गया है। कई डॉक्टरों ने बीएमसी के इस नोटिस पर सवाल खड़ा किया है और ज्यादती करने का आरोप लगाया है।

नोटिस मिलने के बाद डॉक्टर चेतन वेलानी ने कहा कि मैं प्रति दिन 40 रोगियों को देख रहा हूं। मैं उन्हीं मरीजों को टेस्ट के लिए सिफारिश करता हूं, जिन्हें कोरोना के संक्रमण के कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। मैंने जिनकी सिफारिश की है, उनमें से अधिकतर कोरोना पॉजीटिव पाये गए हैं। 

डॉ वेलानी के एक सहयोगी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि बीएमसी हमें डराने की कोशिश कर रही है। बीएमसी चाहती है कि हम कोरोना टेस्ट की सिफारिश नहीं करें, ताकि कोरोना मरीजों की संख्या को कम-से-कम दिखा सके। अगर हम अपने प्रोफेशनल अनुभव के आधार पर टेस्ट की सिफारिश करते हैं, तो बीएमसी को हमें रोकने का कोई अधिकार नहीं है।

नियम के मुताबिक किसी डॉक्टर के लाइसेंस को रद्द करने का अधिकार सिर्फ इंडियन मेडिकल काउंसिल को है। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डॉक्टर शिवकुमार अत्रे ने कहा कि बीएमसी डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं कर सकती। डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार सिर्फ हमारे पास है।

21 मार्च को जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने निजी लैब्स में कॉविड-19 टेस्ट के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसमें कहा गया था, “लैब्स टेस्ट सिर्फ  आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी योग्य डॉक्टर द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर किया जाना चाहिए।” 

 

 

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