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अब 25 किसान संगठनों ने किया नए कृषि कानून का समर्थन

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नए कृषि कानून पर जारी किसान आंदोलन के बीच जहां 24 किसान संगठन इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं, वहीं इसके समर्थन में देशभर के 25 किसान संगठनों ने आज, 28 दिसंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। इन 25 किसान संगठनों के किसानों ने कृषि मंत्री तोमर को अपना समर्थन पत्र सौंपा।

इससे पहले हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के कई किसान संगठनों ने कृषि कानून का समर्थन करते हुए कृषि मंत्री को सहमति पत्र सौंपा था और रद्द किए जाने पर दी प्रदर्शन की धमकी दी थी।

मोदी सरकार को मिला रहा किसानों का व्यापक समर्थन, रद्द किए जाने पर दी प्रदर्शन की धमकी
14 दिसंबर को देशभर के करीब 10 किसान यूनियनों के नेताओं ने तीन नये कृषि कानूनों पर कृषि मंत्री तोमर को एक समर्थन पत्र सौंपा और उन्होंने सरकार से इन कानूनों को बरकरार रखने की मांग की।

अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के इन किसानों ने कृषि मंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने कहा कि कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन पूरी तरह राजनीति से प्रभावित हैं।

किसान यूनियनों से बात करन के बाद नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि ऑल इंडिया किसान समन्वय समिति के किसान आए थे। उन्होंने हमारे कृषि कानून का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ये बिल पूरी तरह से किसानों के हित में है और इन्हें किसी भी कीमत पर वापस नहीं लिया जाना चाहिए। 

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Posted by Narendra Singh Tomar on Monday, December 14, 2020

सरकार के लिए राहत की बात है कि उत्तराखंड के किसानों के एक प्रतिनिधमंडल ने भी रविवार 13 दिसंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात कर नए कृषि कानूनों को अपना समर्थन दिया।

उत्तराखंड के किसानों का कहना है कि सितंबर में बने तीनों कानून कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होंगे। कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड से आए किसान भाई मुझसे मिले और उन्होंने कृषि सुधार को समझा और अपनी राय दी। केंद्र सरकार की ओर से भी सभी किसान भाइयों का आभार व्यक्त करता हूं। किसानों के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं। 

उत्तराखंड के किसान नेताओं ने कृषि मंत्री को बताया कि तीनों कानून सरकार ने किसानों के हित में बनाए हैं। सुधार भले हो सकते हैं, लेकिन कानून को वापस लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। उत्तराखंड के किसानों ने सरकार से इस मामले पर दबाव में न आने की अपील की। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि विपक्षी दल आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। 


इससे पहले हरियाणा के किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पद्मश्री से सम्मानित सोनीपत के प्रगतिशील किसान क्लब के अध्यक्ष कंवल सिंह चौहान की अगुवाई में कृषि मंत्री तोमर से मुलाकात की और सितंबर में बने तीनों कृषि कानूनों का समर्थन किया। कृषि मंत्री तोमर से मुलाकात के बाद कंवल सिंह चौहान ने कहा कि विरोध कर रहे किसानों को गुमराह किया जा रहा है। किसान संगठनों ने कृषि मंत्री से कृषि कानून रद्द नहीं करने की मांग की। किसान संगठनों ने इस संबंध में कृषि मंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा।

हरियाणा के किसानों ने कहा कि सरकार आंदोलनकारी किसानों की मांग के अनुसार कानून में सुधार करना चाहे तो उसका स्वागत है, लेकिन अगर कानून निरस्त किए गए तो वो इसके खिलाफ आंदोलन करेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले और भी कुछ किसान संगठन कृषि कानूनों का समर्थन कर चुके हैं। जिसके बाद केंद्र सरकार ने कानून वापस न लेकर उनमें केवल संशोधन करने की हामी भरी है। 

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