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अब समझ में आया ममता-केजरी क्यों कर रहे नोटबंदी का विरोध

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस दिन नोटबंदी का फैसला लिया। उस दिन से लगातार तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल इस फैसले का विरोध कर रहे थे। नोटबंदी के फैसले का विरोध करने के लिए जितना सरकार पर दबाव बनाया जा सकता था, जो कुछ किया जा सकता था, इन लोगों ने किया।

केजरीवाल और ममता बनर्जी दोनों हाथ धोकर नोटबंदी के फैसले के पीछे क्यों पड़े थे। देश की जनता को अब समझ में आ रहा है। इन पार्टियों और इसके नेताओं के काले कारनामे अब एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। हालांकि देश की जनता, पहले से ही इनकी चाल समझ रही थी कि नोटबंदी के विरोध के पीछे उनका व्यक्तिगत स्वार्थ होगा। शायद यही वजह है कि देशवासी प्रधानमंत्री के नोटबंदी के फैसले के साथ खड़े रहे। तमाम परेशानियों का सामना करने के बाद भी शांति और सद्भाव के साथ पैसे के लिए बैंकों की लाइनों में लगे रहे, ई-पेमेंट के तरीकों को सीख रहे हैं और आजमा भी रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद तापस पाल को सीबीआई ने चिटफंड कंपनियों से गलत तरीके से पैसा लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि रोजवैली कंपनी का निदेशक बनने के लिए पैसे लिए थे। इसको लेकर सीबीआई ने सांसद के सामने सबूत भी रखे लेकिन तापस पाल ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। तृणमूल कांग्रेस के एक और सांसद हैं सुदीप बंदोपाध्याय। सीबीआई ने उन्हें भी पूछताछ के लिए नोटिस दिया है।

पश्चिम बंगाल चिटफंड कंपनियों की राजधानी है। यहां चिटफंड कंपनियों को पनपने के लिए राज्य सरकार से लेकर तमाम पार्टियां अपनी भूमिका निभाती हैं। शारदा, रोजवैली तो एक उदाहरण हैं। देशभर में चलने वाली जितनी भी चिटफंड कंपनियां हैं, अधिकतर कंपनियों का मुख्यालय पश्चिम बंगाल में ही है। जिन कंपनियों का मुख्यालय पश्चिम बंगाल में नहीं है, तो भी उसके बड़े कार्यालय पश्चिम बंगाल में जरूर होते हैं। क्योंकि यहां उसे पालने वाले मिल जाते हैं।

अरविंद केजरीवाल का भी दामन उतना ही काला दिख रहा है। अरविंद केजरीवाल की पार्टी चंदे के रूप में काला धन ले रही थी। जिन कंपनियों के माध्यम से करोड़ों में चंदा लिया गया। उस कंपनी का निदेशक एक मजदूर निकलता है। एक बेवसाइट रिपोर्ट4इंडिया के मुताबिक आम आदमी पार्टी को ग्लैमर स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी से 35 करोड़ रुपये दान में मिले। पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर इस कंपनी से केवल 71 हजार रुपये के डोनेशन लेने की बात स्वीकार की है। दूसरी कंपनी एक्यूरेट बिल्डवेल प्रा. लि. जिससे आप ने 35 करोड़ रुपये का चेक लिए। दोनों कंपनियां आम आदमी पार्टी की घोष्ट कंपनी है। चंदा देने वाली इन कंपनियों का डायरेक्टर रामचरण है। वह एक दिहाड़ी मजदूर है जो दिल्ली के अन्ना नगर की झुग्गियों में रहता है। यह वहीं कंपनियां है जिसने दिल्ली चुनाव के दौरान केजरीवाल की पार्टी को 50-50 लाख रुपए दिए थे। आम आदमी की पार्टी के चंदे का खेल विस्तार से जानना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें।

देश के इकलौते स्वघोषित ईमानदार नेता अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने चंदे की जानकारी हलफनामे के साथ जो चुनाव आयोग में जमा कराया गया। उसको लेकर चुनाव आयोग से लेकर आयकर विभाग की भृकुटी तनी हुई है। आयकर विभाग ने एक-एक करके चार नोटिस आम आदमी पार्टी को भेजा लेकिन एक नोटिस का भी जवाब केजरीवाल की पार्टी ने नहीं दिया। यहां तक कि नोटिस का जवाब न मिलने पर आयकर विभाग ने केजरीवाल की पार्टी से पूछा है क्यों न आयकर से मिलने वाली छूट को खत्म कर दिया जाए।

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