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प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व को दिया LIFE यानी Lifestyle For Environment के साथ पंचामृत का मंत्र

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिटेन के ग्लासगो में आयोजित कॉप-26 शिखर सम्मेलन में विश्व को लाइफ यानी Lifestyle For Environment का मंत्र दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आज विश्व मान रहा है कि क्लाइमेट चेंज में लाइफ-स्टाइल की एक बहुत बड़ी भूमिका है। मैं आज आपके सामने एक, One-Word Movement का प्रस्ताव रखता हूं। यह One-Word एक शब्द, क्लाइमेट के संदर्भ में, One World- एक विश्व का मूल आधार बन सकता है, अधिष्ठान बन सकता है। ये एक शब्द है- LIFE…एल, आई, एफ, ई, यानि Lifestyle For Environment आज जरूरत है कि हम सभी लोग, एक साथ आकर, कलेक्टिव पार्टिसिपेशन के साथ, Lifestyle For Environment यानि LIFE को एक अभियान की तरह आगे बढ़ाएं। ये Environmental Conscious Life Style का एक Mass Movement बन सकता है। आज आवश्यकता है, माइंडलेस और डिस्ट्रक्टिव कन्जम्प्शन के बजाय, MindFul और डेलिबरेट Utilisation की। ये मूवमेंट एक साथ मिलकर, ऐसे लक्ष्य तय कर सकता है, जो Diverse Areas जैसे फिशिंग, एग्रीकल्चर, वेलनेस, Dietry Choices, पैकेजिंग, हाउसिंग, हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म, क्लोदिंग, फैशन, जल संसाधन और ऊर्जा जैसे अनेक सेक्टर्स में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने इसके साथ ही विश्व को पंचामृत का फॉर्मूला भी दिया। उन्होंने कहा, ‘क्लाइमेट चेंज पर इस वैश्विक मंथन के बीच, मैं भारत की ओर से, इस चुनौती से निपटने के लिए पांच अमृत तत्व रखना चाहता हूं, पंचामृत की सौगात देना चाहता हूं।
पहला- भारत, 2030 तक अपनी Non-Fossil Energy Capacity को 500 गीगावाट तक पहुंचाएगा।
दूसरा- भारत, 2030 तक अपनी 50 प्रतिशत energy requirements, renewable energy से पूरी करेगा।
तीसरा- भारत अब से लेकर 2030 तक के कुल प्रोजेक्टेड कार्बन एमिशन में एक बिलियन टन की कमी करेगा।
चौथा- 2030 तक भारत, अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेन्सिटी को 45 प्रतिशत से भी कम करेगा।
और पांचवां- वर्ष 2070 तक भारत, नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करेगा। ये पंचामृत, क्लाइमेट एक्शन में भारत का एक अभूतपूर्व योगदान होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज मैं आपके बीच, उस भूमि का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं, जिस भूमि ने हजारों वर्ष पहले ये मंत्र दिया था- सम्-गच्छ-ध्वम्, सम्-व-दद्वम्, सम् वो मानसि जानताम्। आज 21वीं सदी में ये मंत्र और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है, प्रासंगिक हो गया है। सम्-गच्छ-ध्वम् यानि सभी साथ मिलकर चलें सम्-व-दद्वम् यानि सभी मिल-जुलकर आपस में संवाद करें और सम् वो मनानसि जानताम् यानि सभी के मन भी आपस में मिले रहें।

उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व मानता है कि भारत एकमात्र, बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसने पेरिस कमिटमेंट पर लेटर एंड स्पिरिट में डिलिवर किया है। हम संकल्पबद्ध होकर हर संभव प्रयास कर रहे हैं, परिश्रम कर रहे हैं, और परिणाम लाकर दिखा रहे हैं। आज भारत installed renewable energy capacity में विश्व में चौथे नंबर पर है।बीते 7 वर्षों में भारत की Non Fossil Fuel Energy में 25 परसेंट से ज्यादा की वृद्धि हुई है।और अब ये हमारे एनर्जी मिक्स का 40 परसेंट पहुंच गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुनिया का सहयोग करने के लिए इंस्टीट्यूशनल सॉल्यूशन भी दिए हैं। सोलर पावर में एक क्रांतिकारी कदम के रूप में, हमने International Solar Alliance की पहल की। क्लाइमेट एडाप्टेशन के लिए हमने coalition for disaster resilient infrastructure का निर्माण किया है। ये करोड़ों जिंदगियों को बचाने के लिए एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण पहल है।

देखिए वीडियो-

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