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इमरान खान का कबूलनामा- पाक आतंकियों का पनाहगाह

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पाकिस्तान को दुनिया भर में अलग-थलग करने की कूटनीति अब पूरी तरह सफल साबित हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी की सख्ती का ही असर है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिकी थिंक टैंक यूएस इंस्‍टीट्यूट ऑफ पीस के साथ बातचीत में कबूल किया कि पाकिस्तान में 40 आतंकी संगठन काम कर रहे थे, लेकिन ये सच्चाई कभी बताई नहीं गई। इमरान ने यह भी कहा कि पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे आतंकी संगठनों का पर सरकार का कोई कंट्रोल नहीं था।

अमेरिकी दौरे पर गए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कबूल किया कि आतंकी अफगानिस्तान से कश्मीर तक सक्रिय हैं। इमरान खान ने यह भी माना कि जैश-ए- मोहम्मद से जुड़े लोग भारत के खिलाफ काम कर रहे हैं और पुलवामा हमले में जैश का हाथ था। अपने कबूलनामें में इमरान खान ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अपनी धरती पर आतंकी ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी के बारे में पता था।

जैश-ए-मोहम्मद और जमात- उद दावा जैसे आतंकी संगठन काफी समय से पाकिस्तानी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करते रहे हैं। लेकिन इस बारे में भारत के दावे से पाकिस्तान इनकार करता रहा है। इमरान खान के इस कबूलनामे को आतंक के खिलाफ भारत की बड़ी जीत माना जा सकता है।

इमरान से पहले इस तरह का कबूलनामा पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ भी कर चुके हैं-

भारत में बम धमाके में आईएसआई का हाथ-मुशर्रफ
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष रहे परवेज मुशर्रफ ने हाल ही में यह मानकर पाकिस्तानी हुक्मरान और खुफिया एजेंसी की पोल खोल दी कि भारत में कराए गए बम धमाके में आईएसआई का हाथ रहा है। उन्होंने अपने एक साक्षात्कार में साफ शब्दों में कहा है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा तो महज मोहरा भर है असल हाथ तो आईएसआई का है। अपने साक्षात्कार के दौरान मुशर्रफ ने स्वीकार किया कि भारत में कराए गए बम धमाके में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के साथ आईएसआई का हाथ रहा है।

हम न्यूज चैनल पर किया चौंकाने वाला खुलासा
हम न्यूज चैनल पर पाकिस्तानी पत्रकार नदीम मल्लिक को दिए साक्षात्कार के दौरान परवेज मुशर्रफ ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि भारत में कराए गए बम धमाके में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ रहा है। जिन दोनों आतंकवादी संगठनों के खिलाफ अभी कार्रवाई की जा रही है ये तो महज मोहरा भर है। इसके साथ उन्होंने यह भी खुलासा किया है कि 2003 में उन पर भी जो जानलेवा हमला किया गया उसे भी जैश-ए-मोहम्मद ने ही अंजाम दिया था। उन्होंने कहा कि मैं तो इन दोनों संगठनों को शुरू से ही आतंकी संगठन मानता रहा हूं। इसलिए पाकिस्तान इन आतंकवादी संगठनों के खिलाफ जो भी कार्रवाई कर रही है वह सही दिशा में उठाया गया सही कदम है।

पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ ने खोली आईएसआई की पोल
भले ही पाकिस्तान ने आतंक पर नकेल कसने के अपना ढोंग दिखाने के लिए मुंबई में आतंकवादी हमले को अंजाम देने वाले मास्टरमाइंड हाफिज सईद के आतंकी संगठन जमात-उद-दावा और उसके दूसरे संगठन फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को औपचारिक रूप से प्रतिबंधित किया हो। लेकिन यह भी सच है कि पाकिस्तान की यह सख्ती प्रधानमंत्री मोदी की सख्त प्रहार का असर है। नहीं तो इससे पहले तो पाकिस्तान आतंकी संगठनों पर कार्रवाई तो दूर यह मानने को तैयार नहीं होता था कि इसमें पाकिस्तान में पनाह लेने वाले आतंकी संगठन ने किया है। 

आईएसआई और जैश-ए-मोहम्मद में सांठगांठ
परवेज मुशर्ऱफ से जब यह पूछा गया कि आपने इन आतंकी संगठनों पर तब पाबंदी क्यों नहीं लगाई जब आप पावर में थे। इस सवाल पर उन्होंने और भी चौंकाने वाली बात कही। उन्होंने कहा कि उस समय की परिस्थिति बिल्कुल भिन्न थी। उन्होंने कहा कि उस समय आईएसआई और जैश-ए-मोहम्मद के बीच काफी गहरे संबंध थे। एक तरह से जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन का आईएसआई से बैक-अप मिलता था। उस दौरान आईएसआई ने जैश-ए-मोहम्मद के माध्यम से भारत में बम धमाका कराया था। इसलिए उस समय उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। वैसे भी आईएसआई से संबंध होने के कारण उस समय उसके खिलाफ सख्त कदम उठाना आसान नहीं था।

जेईएम और एलईटी ने मिलकर किया था संसद पर हमला
इंटरव्यू के दौरान मुशर्रफ ने यह भी खुलासा किया है कि 2001 में भारतीय संसद पर जो आतंकी हमले किए गए थे उसमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने मिलकर अंजाम दिया था। गौरतलब है कि पुलवामा में आतंकी हमले के तुरंत बाद ही जैश-ए-मोहम्मद के सरगना ने दावा किया था कि इस घटना को उसने ही अंजाम दिया है। अपने शहीद जवानों का बदला लेने के लिए ही भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर पर एयर स्ट्राइक की थी।

 

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