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दोगुनी रफ्तार से बढ़ रही है दिल्ली के ‘फकीर’ केजरीवाल की संपत्ति, केस भी 7 से बढ़कर हुए 13

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दावा करते रहे हैं कि वह फक्कड़ आदमी है। 2014 में बनारस लोकसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल करने निकले तो रोड शो में उन्होंने ने बार-बार कहा, “मैं तो फक्कड़ आदमी हूं। मेरे पास पैसे कहां। जेब में सिर्फ 500 रुपए पड़े हैं।” 2017 में पंजाब चुनाव के दौरान केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी के पास चुनाव लड़ने के लिए पैसा नहीं है। जनता को ही उनके लिए फंड की व्यवस्था करनी होगी। हम और हमारी पार्टी तो फक्कड़ है। लेकिन केजरीवाल के नामांकन ही उनके फक्कड़ होने के दावे की पोल खोल रहे हैं। चुनावी हलफनामे में घोषित उनकी संपत्ति ने फिर साबित कर दिया कि वह दिल्ली के करोड़पति ‘फकीर’ मुख्यमंत्री हैं।

केजरीवाल के पास 3.40 करोड़ रुपये की संपत्ति

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने मंगलवार यानी 21 जनवरी, 2020 को नई दिल्ली सीट से नामांकन दाखिल किया। उन्होंने चुनावी हलफनामे में अपनी कुल संपत्ति 3.40 करोड़ बताई। जिससे पता चलता है कि बीते पांच सालों में केजरीवाल की संपत्ति में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2015 के चुनाव में इनकी कुल संपत्ति 2.10 करोड़ रुपये थी, जिसमें 1.03 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल के पास नकदी और एफडी 2015 में 2.26 लाख रुपए की थी, जो 2020 में बढ़कर 9.65 लाख रुपये हो गई। जबकि केजरीवाल की अचल संपत्ति 92 लाख रुपये से बढ़कर 177 लाख रुपये हो गई। केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल के पास 2015 में नकदी और सावधि जमा (एफडी) 15 लाख रुपए थी, जो 2020 में बढ़कर 57 लाख रुपये हो गयी। जबकि उनके पास 1 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है,जिसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

सिसोदिया की पत्नी की संपत्ति में तीन गुनी बढ़ोतरी

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से ज्यादा उनकी पत्नी अमीर हैं। चुनाव के लिए दाखिल हलफनामे में उन्होंने दावा किया कि उनके पास करीब 21 लाख की अचल संपत्ति है जबकि उनकी पत्नी के पास करीब 65 लाख रुपये की अचल संपत्ति है। अपने हलफनामे में बताया कि उनकी कुल संपत्ति 25.74 लाख रुपये हैं। इसमें चल 4,74,888 और अचल संपत्ति 21 लाख रुपये हैं। वहीं पत्नी के पास 67.66 लाख रुपये की संपत्ति है। इसमें चल 2,66,010 और अचल संपत्ति 65 लाख रुपये हैं।

गोपाल राय की चल संपत्ति में 12 गुनी वृद्धि

केजरीवाल सरकार के श्रम मंत्री गोपाल राय की चल और अचल संपत्तियों में पिछले पांच सालों में बढ़ोतरी हुई है। हलफनामे के मुताबिक 2015 में गोपाल राय के पास चल संपत्ति 2.17 लाख रुपये थी, जो पांच साल बाद बढ़कर 23.86 लाख रुपये हो गई। वहीं उनकी पत्नी के पास करीब सवा पांच लाख रुपये की चल संपत्ति थी। 2015 में गोपाल राय के पास 45 लाख रुपये की अचल संपत्ति थी, जो पांच साल बाद बढ़कर 58 लाख रुपये हो गयी है। 

राजेंद्र पाल गौतम की अचल संपत्ति में चार गुनी बढ़ोतरी

केजरीवाल सरकार के समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम के 2015 के हलफनामे के मुताबिक उनके पास चल संपत्ति करीब 11 लाख रुपये थी, जो पांच साल में बढ़कर 23.5 लाख हो गई। वहीं पांच साल पहले राजेंद्र पाल गौतम के पास 15 लाख रुपये की अचल संपत्ति थी, जो पांच सालों में बढ़कर 66 लाख रुपये हो गई है। 

केजरीवाल के ट्रांसपोर्ट मंत्री की सालाना आय हुई दोगुनी 

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में आयोग को दिए हलफनामे में केजरीवाल सरकार के ट्रांसपोर्ट मंत्री और नजफगढ़ से उम्मीदवार कैलाश गहलोत की सालाना आय पांच साल में दोगुनी हो गई है। अपने हलफनामे में गहलोत ने सालाना आय करीब 2 करोड़ 30 लाख बताई है। वहीं, पिछले चुनाव के हलफनामे में सालाना आय 96 लाख 26 हजार रुपए थी। कैलाश गहलोत की चल संपत्ति 8 करोड़ रुपए है।

अब आपको बताते हैं केजरीवाल के मंत्रियों द्वारा अर्जित की गई आय से अधिक संपत्ति और टैक्स चोरी के मामलों के बारे में…

करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा

सीबीआई ने स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के विभाग से जुड़ी दिल्ली डेंटल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ ऋषि राज और काउंसिल के वकील प्रदीप शर्मा को 4.73 लाख रुपये रिश्र्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। रजिस्ट्रार के लॉकर से करोड़ों की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए, जो सत्येंद्र जैन और उनकी पत्नी के नाम पर थे। इनमें 12 बीघा दो बिस्वा और आठ बीघा 17 बिस्वा जमीन की खरीद के दस्तावेज और 14 बीघा जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी के कागज थे। ये जमीनें बाहरी दिल्ली के कराला गांव में हैं। इसके अलावा, सीबीआइ के हाथ दो करोड़ रुपये की बैंक की डिपॉजिट स्लिप बुक भी मिली। इसके जरिये वर्ष 2011 में रुपये जमा कराये गए थे। यह डिपॉजिट स्लिप जैन, उनके परिवार व उन कंपनियों के नाम हैं, जिनमें जैन निदेशक थे। इसके अलावा, सत्येंद्र जैन व उनकी पत्नी के नाम की 41 चेक बुक भी मिली। आयकर विभाग ने पहले से ही बाहरी दिल्ली में सत्येंद्र जैन की कथित 220 बीघा जमीन बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत जब्त कर रखी है। साथ ही भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई में उनके खिलाफ पहले ही मामला दर्ज है। जांच एजेंसी उनके खिलाफ हवाला ऑपरेटरों से संबंधों और काले धन को सफेद करने के लिए बोगस कंपनियां बनाने के मामले में भी जांच कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्री का घोटाला छिपाया!

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ आयकर विभाग की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई। उनपर पर हवाला के जरिए 16.39 करोड़ रुपये मंगाने का आरोप है। इन मामलों में उनकी सघन जांच हो रही है। इसके अलावा जैन पर अपनी ही बेटी को दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक परियोजना में सलाहकार बनाने का भी आरोप है। इस केस की जांच भी सीबीआई के जिम्मे है। शुंगलू कमेटी ने भी इस मामले में दिल्ली सरकार पर उंगली उठाई। यहां ये बताना आवश्यक है कि केजरीवाल के पूर्व सहयोगी कपिल मिश्रा ने इन्हीं पर केजरीवाल को पैसे देने के आरोप लगाए थे। मिश्रा के अनुसार जैन ने अपनी करतूतों पर पर्दा डाले रखने के लिए केजरीवाल के किसी रिश्तेदार की 50 करोड़ रुपये की डील भी कराई।

कैलाश गहलोत पर 120 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का आरोप

आयकर विभाग ने दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश गहलोत के घर में छापेमारी की थी, इस दौरान 120 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के दस्तावेज मिले। मंत्री के घर से ऐसे दस्तावेज मिले, जिनसे पता चला कि ऑफिस ब्वॉय, चपरासी और अन्य कर्मचारियों के नाम पर कर्ज लिए गए थे। साथ ही विभिन्न फर्जी कंपनियों के 70 करोड़ के शेयर भी इनके नाम पर थे। आयकर विभाग को कर्मचारियों के नाम से बेनामी संपत्तियों और ड्राइवर के नाम पर एक जमीन का पता चला। साथ ही जांच में गहलोत की दुबई की संपत्ति में निवेश करने का भी पता चला।

आयकर विभाग के छापे से जो खुलासा हुआ है, उससे सवाल उठता है कि केजरीवाल के इन मंत्रियों ने कैसे इतनी संपत्ति अर्जित कर ली। इसका जवाब केजरीवाल सरकार के तहत हुए घोटालों से मिल सकता है।

दस हजार करोड़ का बिजली घोटाला

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बिजली कंपनियों को 10 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि केजरीवाल सरकार ने 200 यूनिट बिजली सब्सिडी देने के नाम पर में बड़े घोटाले को अंजाम दिया है जिसकी सीबीआई जांच जरूरी है। केजरीवाल सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व ऊर्जा मंत्री हारून यूसुफ ने बताया कि निजी बिजली कंपनियों को 8532 करोड़ रुपए की सब्सिडी देना आपने आप में एख बड़ा घोटाला है।

सब्सिडी घोटाले का आरोप

पूर्व ऊर्जा मंत्री हारून यूसुफ ने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली से ये वादा किया था कि सब्सिडी सीधे उनके खाते में डाली जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्या वजह है कि उपभोक्ताओं के खाते में सब्सिडी की राशि नहीं दी जा रही है?

मास्क की खरीद में घोटाला

दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर मास्क खरीद में घोटाले का आरोप लगा है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने कहा कि दिल्ली सरकार ने स्कूली बच्चों को मास्क बांटने के लिए 10 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन बच्चों को मास्क नहीं मिला। प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने 40 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च किए, अगर उस पैसे से मास्क खरीदा गया होता तो दिल्ली वालों को राहत मिली होती। कांग्रेस ने इस घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। साथ ही कहा कि दिल्ली की रेड लाइट पर सिविल डिफेंस के जो लोग खड़े रहते हैं वे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं, जिन्हें 600 रुपए दिया जाता है।

2000 करोड़ रुपये का स्कूल घोटाला

दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर शिक्षा के नाम पर 2000 करोड़ रुपये के स्कूल घोटाले का आरोप है। केजरीवाल सरकार पर आरोप है कि 5 लाख का कमरा 25 लाख रुपये में बनवाया गया। वहीं कई स्कूलों में बिना बनाए ही कमरों का भुगतान कर दिया गया। इस सिलसिले में एसीबी ने विजिलेंस विभाग से शिकायत भी की और जांच के लिए इजाजत मांगी। जिसके बाद स्कूलों में कमरों के निर्माण में हुए घोटालों की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को सौंपी गई। दरअसल एक आरटीआई में ये खुलासा हुआ कि एक स्कूल का कमरा 24,85,323 रुपए में बनाया है। आरटीआई से पता चला है कि 312 कमरे 77,54,21,000 रुपये में और 12748 कमरे 2892.65 करोड़ रुपये में बनाए गए हैं। 

Punit Agarwal

@Punitspeaks

RTI exposes the massive corruption of Rs 2000 cr of @ArvindKejriwal and @msisodia in the name of education

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इलेक्ट्रिक बस प्रोजेक्ट में घोटाला

दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर बस खरीदने के ठेके में 6 हज़ार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा। आरोप है कि यह घोटाला 1000 बसों की खरीद के लिए जारी टेंडर में हुआ है। बीजेपी ने बसों की खरीद पर सवाल उठाते हुए पूछा कि एक साथ 1000 बसों के टेंडर का क्या मतलब है, पहले 100 मंगाते उसके बाद अगली खरीद की जाती। बीजेपी ने केजरीवाल सरकार को चुनौती देते हुए कहा, इस बस सौदे में डीटीसी को शामिल क्यों नहीं किया गया ?

CCTV प्रोजेक्ट में घोटाला 

दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर सीसीटीवी लगाने के नाम पर 571 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे। दिल्ली सरकार की ओर से चीन की कंपनी को सीसीटीवी लगाने का ठेका देने के मामले में सारे नियमों को ताक पर रखा गया और कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ये करार किया गए।

टिकट के बदले करोड़ों रुपये लेने का आरोप

केजरीवाल पर आरोप लगा कि आम आदमी पार्टी ने पश्चिम दिल्ली संसदीय सीट पर बलवीर जाखड़ को उम्मीदवार बनाने के लिए 6 करोड़ रुपए लिए। यह आरोप खुद बलबीर जाखड़ के बेटे उदय जाखड़ ने लगाया है। उदय का दावा है कि आम आदमी पार्टी और उसके प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने उनके पिता से टिकट के बदले 6 करोड़ रुपये लिए थे। उदय जाखड़ ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में बताया, ‘मेरे पिता ने पश्चिमी दिल्‍ली संसदीय सीट से टिकट हासिल करने के लिए 6 करोड़ रुपये अरविंद केजरीवाल को दिए। कुछ समय पहले जब मैंने उन्‍हें (बलबीर) कहा था कि मुझे पढ़ाई के लिए पैसों की जरूरत है, तो उन्‍होंने मना कर दिया। उन्‍होंने सोचा कि वो पैसा इलेक्‍शन में लगा पाएंगे।’ उदय ने कहा कि ‘मेरे पास पक्‍के सबूत हैं कि उन्‍होंने इस टिकट के लिए पैसे दिए हैं।’

खुद केजरीवाल पर रिश्वत लेने का आरोप

सीएम अरविंद केजरीवाल सरकार पर भ्रष्टाचार का सबसे गंभीर 2 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप उनके अपने ही कैबिनेट सहयोगी कपिल मिश्रा ने लगाया था। सबसे बड़ी बात ये है कि दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने केजरीवाल से जिस व्यक्ति से रिश्वत लेने का आरोप लगाया, वो उन्हीं की सरकार में सीएम के चहते मंत्री सत्येंद्र जैन हैं। कपिल मिश्रा के आरोपों में कितना दम है ये तो जांच के बाद पता चलेगा। लेकिन कुछ तथ्य ऐसे हैं जिससे ईमानदारी का चोला ओढ़े केजरीवाल की कलई खुल जाती है। जैसे इतने गंभीर आरोप पर न तो उन्होंने ठीक से सफाई देने की जरूरत समझी और न ही कपिल मिश्रा के विरोध में किसी कानूनी कार्रवाई की ही हिम्मत जुटा पाए।

हवाला के जरिए पैसे जुटाने का आरोप

दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा दावा कर चुके हैं कि केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने फर्जी कंपनी बनाकर हवाला के जरिए पैसा जुटाया। उन्होंने इसके संबंध में दस्तावेज होने के भी दावे किए। यही नहीं कपिल मिश्रा ने पार्टी के नेताओं के विदेश यात्राओं की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए। लेकिन हैरानी की बात है कि केजरीवाल ने अबतक सार्वजनिक रूप से कपिल मिश्रा के एक भी सवाल का जवाब देने की हिम्मत नहीं दिखाई है।

सीएनजी घोटाला

केजरीवाल सरकार में मंत्री रह चुके कपिल मिश्रा ने दिल्ली सरकार के एक और बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया। अंग्रेजी समाचार पोर्टल टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में 10,000 कारों में जो सीएनजी किट लगावाए हैं, वो फर्जी कंपनी ने तैयार किए हैं। ये सारे सीएनजी किट 10 महीनों के भीतर कारों में फिट किए गए थे। सबसे बड़ी बात ये है कि फर्जी सीएनजी किट कंपनी को इसका ठेका ऑड-इवन के फौरन बाद दिया गया था। जाहिर है कि इसके समय को लेकर भी दिल्ली सरकार की मंशा संदेहों से परे नहीं है। अपने आरोपों के समर्थन में कपिल ने कुछ दस्तावेज भी दिखाए।

पीडब्ल्यूडी घोटाले में केजरीवाल का रिश्तेदार गिरफ्तार

घोटाला और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे पर भरोसा करके दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल का सिर पर बिठाया लेकिन सत्ता में आते ही केजरीवाल का चेहरा बेनकाब होने लगा है। हाल ही में पीडब्ल्यूडी घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के साढू सुरेन्द्र बंसल के बेटे विनय बंसल को एसीबी ने गिरफ्तार किया। मुख्यमंत्री के रिश्तेदार पर जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियों के नाम से ठेके लेने और उसके लिए जाली बिल बनाकर सरकारी खजाना लूटने का आरोप का आरोप है। इस मामले में एसीबी ने तीन एफआईआर दर्ज की थी। जिनमें से एक सुरेंद्र बंसल की कंपनी के खिलाफ थी। एसीबी ने पिछले साल 9 मई को कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। 

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई। यह अनियमितता आउटसोर्स या कांट्रेक्ट पर रखे गए कर्मचारियों से जुड़ी है। स्वास्थ्य विभाग में 15 हजार कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा, लेकिन ठेकेदार ने इन कर्मचारियों को ईपीएफ (इंप्लॉई प्रोविडेंट फंड), इंश्योरेंस और बोनस का लाभ नहीं दिया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों के बीच साठ-गांठ के जरिए हजारों करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इतना ही नहीं कामगारों का शोषण भी किया गया।

स्कूटर और बाइक से पहुंचाया गया राशन

कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दिल्ली में राशन ढुलाई के लिए कागजों में जिन गाड़ियों का जिक्र किया गया है वह जांच के दौरान स्कूटर और बाइक पाए गए। कैग ने कहा है कि इससे सन्देह पैदा होता है कि राशन का वितरण हुआ ही नहीं और अनाज चोरी की आशंका से नकारा नहीं जा सकता। इसके साथ ही माल ढुलाई के लिए जिन गाड़ियों को दिखाया गया है वह फर्जी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान राशन वितरण केंद्रों पर 1589 क्विंटल ढुलाई के लिए नौ ऐसी गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया जिनका रजिस्ट्रेशन नम्बर बस, तिपहिया वाहन, मोटर साइकिल और स्कूटर का था।

दवा घोटाला

केजरीवाल सरकार ने अपनी मोहल्ला क्लीनिक का खूब ढिंढोरा पीटा है। वो दावा करते रहे हैं कि गरीब जनता के स्वास्थ्य के ख्याल से उठाया गया ये कदम बहुत फायदेमंद साबित होगा। लेकिन अब पता चल रहा है कि केजरीवाल और उनके गैंग के लोग भले ही इसका फायदा उठा रहे हों, उनकी गंदी नीयत के चलते अब गरीबों की जान पर बन आई है। इसका खुलासा तब हुआ जब 1 जून, 2017 को एसीबी ने दवा प्रोक्योरमेंट एजेंसी के ताहिरपुर, जनकपुरी और रघुवीर नगर स्थित सेंटर के गोदामों पर छापा मारा। एसीबी को यहां से भारी मात्र में एक्सपाइरी मेडिसिन के साथ दवाओं की खरीद-फरोख्त के बिल भी मिले हैं। ये दवा घोटाला करीब 300 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि विवादित सीएम ने अपने खासम-खास और कई घोटालों के आरोपी स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के दबाव में ही दवाई खरीदने का काम मेडिकल सुपरिन्टेंडेन्ट से छीनकर, सेन्ट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी को दे दिया था। यानी लूट के लिए ऊपर से नीचे तक पूरी तैयारी की गई थी।

मोहल्ला क्लिनिक घोटाला

मोहल्ला क्लीनिक को लेकर एबीपी न्यूज ने एक बड़ा खुलासा किया।
एबीपी न्यूज के अनुसार दिल्ली में आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक वैसे तो लोगों की सुविधाओं के लिए बनाया गया, लेकिन मोहल्ला क्लीनिक की हालत ही ठीक नहीं है। विजिलेंस विभाग इसमें धांधली की जांच कर रहा है। विजिलेंस की जांच का दायरे में दो मुख्य आरोप हैं।

  1. मोहल्ला क्लीनिक परिसर का किराया बाजार किराए से ज्यादा क्यों है?
  2. पार्टी कार्यकर्ताओं के परिसर किराए पर क्यों लिए गए?         

एबीपी न्यूज की पड़ताल में पता चला कि कार्यकर्ता अपने मकान को बाजार दर से दो से तीन गुना ज्यादा किराये पर मोहल्ला क्लीनिक को दिए हुए हैं। इस तरह से मोहल्ला क्लीनिक खोलने में आम आदमी पार्टी के नेताओं को जमकर फायदा पहुंचाया गया है.दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का आरोप है कि मोहल्ला क्लिनिक एक बड़ा घोटाला है। माकन ने आरोप लगाया कि ये क्लिनिक ‘आप’ कार्यकर्ताओं की बिल्डिंगों में चलाए जा रहे हैं। उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए मार्केट से कई गुना ज्यादा किराया दिया जा रहा है।

विज्ञापन घोटाला

केजरीवाल पर विज्ञापनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप लगा। जांच में पाया गया कि सरकारी विज्ञापनों के माध्यम से केजरीवाल ने अपनी और अपनी पार्टी का चेहरा चमकाने की कोशिश की। इनमें से उनकी पार्टी की ओर से दिए गए कई झूठे और बेबुनियाद विज्ञापन भी शामिल हैं। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार भी केजरीवाल सरकार पर दूसरे राज्यों में अपने दल का प्रचार करने के लिए दिल्ली की जनता के खजाने पर डाका डालने का आरोप है। पहले साल के काम-काज पर तैयार रिपोर्ट कहती है कि पहले ही साल में केजरीवाल सरकार ने 29 करोड़ रुपये दूसरे राज्यों में अपने दल के विज्ञापन पर खर्च किए। 2015-16 में केजरीवाल ने जनता के 522 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च कर किए थे।

‘टॉक टू ए के’ घोटाला

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ भी सीबीआई भ्रष्टाचार के मामले दर्ज कर जांच कर रही है। आरोपों के अनुसार सिसोदिया ने केजरीवाल के टॉक टू एके कार्यक्रम के प्रचार के लिए 1.5 करोड़ रुपये में एक पब्लिक रिलेशन कंपनी को काम सौंप दिया। जबकि मुख्य सचिव ने इसके लिए इजाजत नहीं देने को कहा था।

बीआरटी कॉरीडोर तोड़ने का घोटाला

केजरीवाल सरकार पर दिल्ली में बीआरटी कॉरीडोर को तोड़ने के लिए दिए गए ठेके में भी धांधली का आरोप लग चुका है। आरोपों के अनुसार इस मामले में दिल्ली सरकार ने ठेकेदार को तय रकम के अलावा कंक्रीट और लोहे का मलबा भी दे दिया, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में थी। इस मामले में पिछले साल एसीबी छापेमारी करके कुछ दस्तावेज भी जब्त कर चुकी है।

स्ट्रीट लाइट घोटाला

आम आदमी पार्टी नेता राखी बिड़लान पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। आरोपों के अनुसार उन्होंने मंगोलपुरी में 15 हजार की सोलर स्ट्रीट लाइट को एक लाख रुपये और 10 हजार में लगने वाली सीसीटीवी कैमरों पर सरकार के 6 लाख रुपये उड़ा दिए। जब आम आदमी पार्टी में केजरीवाल की मर्जी के बगैर एक पत्ता भी नहीं हिलता है तो फिर राखी पर लगे आरोपों की सही जांच होने देने से किसने रोका है ?

संसदीय सचिव घोटाला ?

13 मार्च, 2015 को आप सरकार ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया। ये जानते हुए भी कि यह लाभ का पद है, उन्होंने ये कदम उठाया। दरअसल उनकी मंशा अपने सभी साथियों को प्रसन्न रखना था। उनका इरादा अपने विधायकों को लालबत्ती वाली गाड़ी, ऑफिस और अन्य सरकारी सुविधाओं से लैस करना था, ताकि उनके ये भ्रष्ट साथी ऐश कर सकें। लेकिन कोर्ट में चुनौती मिली तो इनकी हेकड़ी गुम हो गई। हालांकि केजरीवाल सरकार ने ऐसा कानून भी बनाने की कोशिश कि जिससे संसदीय सचिव का पद संवैधानिक हो जाए। लेकिन हाई कोर्ट के आदेश से मजबूर होकर ये फैसला निरस्त करना पड़ा। 

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