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आतंकी संगठनों को नहीं मिल रहे कश्मीरी युवा, अनुच्छेद 370 हटने के बाद भर्ती में 40 प्रतिशत की कमी

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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने वाले ऐतिहासिक फैसले को 5 अगस्त को एक वर्ष हो जाएगा। इस एक वर्ष में कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने का असर दिखने लगा है। कश्मीर में सुरक्षा हालात पहले से बेहतर हुए हैं। 5 अगस्त, 2019 के बाद से घाटी में हिंसा में कमी आई है, वहीं कश्मीर के युवाओं का आतंकी संगठनों से मोहभंग होने लगा है। पिछले एक साल में आतंकी संगठनों में कश्मीरी युवाओं की भर्ती में 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

पिछले साल (जनवरी से 15 जुलाई तक) घाटी में कुल 105 युवा आतंकी संगठनों में भर्ती हुए, जबकि इस साल इसी अवधि में 67 युवा आतंकी गतिविधियों में शामिल हुए। इसी तरह पिछले साल (जनवरी से 15 जुलाई तक) घाटी में कुल 188 आतंकवाद से जुड़ी घटनाएं हुई थीं, वहीं इस साल इसी अवधि में 120 आतंकी घटनाएं हुईं। 

इस अवधि में 2019 में 126 आतंकी मारे गए, जबकि इस साल इसी अवधि में 136 आतंकियों का खात्मा हुआ। मारे गए आतंकियों में सबसे अधिक 50 से ज्यादा आतंकी हिज्बुल मुजाहिद्दीन के थे। लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद से करीब 20-20 आतंकी मारे गए। वहीं ISJK और अंसार गजवात-उल-हिंद के 14 आतंकी मारे जा चुके हैं। मारे गए आतंकियों में 110 स्थानीय आतंकी थे और बाकी पाकिस्तान से थे।

इस एक साल में सुरक्षाबलों को मिली कामयाबी में हिज्बुल मुजाहिद्दीन का कमांडर रियाज नाइकू, लश्कर का कमांडर हैदर, जैश का कमांडर कारी यासिर और अंसार गजवात-उल-हिंद का बुरहान कोका भी मारे गए। इसके अलावा 22 आतंकी और करीब उनके 300 मददगार गिरफ्तार किए गए।

पिछले साल 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को हटने के बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों-जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया था। नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर घुसपैठ के काफी प्रयास हो रहे हैं। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन घाटी में और अधिक आतंकवादियों को भेजने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और लगातार कार्रवाई से उनके प्रयास नाकाम हो रहे हैं।

 

 

 

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