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देश को डरा रहा है केरल मॉडल: केरल बन सकता है तीसरी लहर का कारण, लगातार तीसरे दिन मिले 20 हजार से ज्यादा मामले

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कोरोना संकट काल में एक छोटा सा राज्य केरल देश को डरा रहा है। तथाकथित सेकुलर, लिबरल पक्षकारों के बल पर केरल मॉडल को लेकर वाहवाही लूटने वाली वामपंथी सरकार कोरोना प्रबंधन में पूरी तरह से फेल साबित हुई है। बकरीद पर मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण केरल में कोरोना मरीजों की संख्या जिस रफ्तार से एक बार फिर बढ़ने लगी है, उससे देशभर में चिंता की लहर फैल गई है। लोगों को डर है कि संभावित तीसरी लहर केरल से ही दस्तक दे सकती है।

देश में जहां कोरोना संक्रमण के मामले कम हो रहे हैं, वहीं केरल कोरोना हब बन गया है। कोरोना मामले में आगे होने के बाद भी यहां की वामपंथी सरकार ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए बकरीद पर प्रतिबंधों में छूट दे दी थी। इससे राज्य में एक बार फिर कोरोना विस्फोट हो गया है। केरल सरकार की लापरवाही के कारण यहां कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं।

केरल में लगातार तीसरे दिन 20,000 से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 44,230 नए मामले आए हैं, उसमें से 22,064 नए केस सिर्फ केरल से आए हैं, जो देश भर में मिले मामलों का आधा हैं। केरल के कारण देश भर के नए केसों का आंकड़ा भी 40 हजार से ऊपर बना हुआ है। देश में 4 लाख 5 हजार सक्रिय मामलों में से 1 लाख 55 हजार अकेले केरल से हैं, जो 38 प्रतिशत से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार है।

इन आंकड़ों से साफ है कि प्रोपगेंडा और लेफ्ट मीडिया के बल पर दुनिया भर में केरल मॉडल का बखान करने वाली केरल सरकार की पोल खुल गई है। बकरीद पर प्रतिबंधों में छूट को लेकर इसी महीने 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि ये डरावना है कि ऐसे हालात होने को बावजूद पाबंदियों में इस तरह छूट दी गई। कोरोना के इस हालात में रियायत देना सॉरी स्टेट ऑफ अफेयर है। कोर्ट ने कहा कि केरल सरकार द्वारा दिया हलफनामा चिंताजनक है। यह वास्तविक तरीके से भारत के सभी नागरिकों को जीने के अधिकार की गारंटी नहीं देता है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी भी तरह की अप्रिय घटना होने पर उसे हमारे संज्ञान में लाया जा सकता है और उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस सबके बावजूद केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन कोरोना को लेकर कितने गंभीर हैं, इसका नजारा पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी के साथ छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में देखने को मिला।

सीएम पी विजयन बैठक के दौरान चाय पीते और कुछ खाते दिखाई दिए। ऐसा लग रहा था कि वे सिर्फ बैठक में शामिल होने की औपचारिकता निभा रहे थे। उनकी हरकत से साफ लग रहा था कि बैठक में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं थी। देखिए वीडियो-

इतना सब होने के बाद भी लेफ्ट के करीबी पक्षकार केरल के सीएम का पक्ष ले रहे हैं और केरल मॉडल की प्रशंसा करने में जुटे हुए हैं। इसे क्या कहिएगा

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