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जनता से झूठे वादे करने में माहिर हैं अखिलेश यादव, 2012 में जिन घोषणाओं को करके सत्ता के सिंहासन पर आए, कुर्सी मिली तो उनको भूले…फिर दिखा रहे मुंगेरीलाल के हसीन सपने

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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव में एक बार फिर वादों के ख्याली पुलाव पका रहे हैं। मतदाताओं का मन भरमाने के लिए वे ऐसे-ऐसे वादे कर रहे हैं, जिनका पूरा हो पाना मुंगेरी लाल के हसीन सपनों जैसा ही है। वास्तविकता के धरातल पर वोटर सच्चाई जानता है कि अखिलेश ने ऐसे ही सपने एक दशक पहले 2012 में भी दिखाए थे। तब अखिलेश पर भरोसा कर जनता ने उन्हें सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाया। लेकिन अफसोस, सत्ता पाते ही अखिलेश जनता से किए कई वादों को भूल गए। इसके कारण वह पांच साल में पूरे ही नहीं हो पाए। अखिलेश यादव का कार्यकाल वादे पूरे न करने और घोटाले पर घोटाले होने के रूप में जनता को याद रहा।

आइये, अखिलेश सरकार के उन वादों पर एक नजर डालते हैं, जो उन्होंने जनता से किए तो थे, लेकिन पांच साल में पूरे ही नहीं किए। सपा ने 2012 विधानसभा चुनाव में बसपा राज के भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाया था। अखिलेश ने वादा किया कि बसपा राज में मायावती के भ्रष्टाचार की जांच के लिए आयोग गठित करेंगे। इसके अलावा मुसलमानों को दलितों की तरह सुविधाएं, किसानों को लाभकारी उपज के लिए किसान आयोग, राजकीय सुरक्षा बलों में मुसलमानों की भर्ती के विशेष अभियान जैसे तमाम वादे अभी ‘वादे’ ही बने हुए हैं। दसवीं पास छात्रों को टैबलेट, किसानों की जमीन लेने पर सर्किल रेट का छह गुना मुआवजा और दूसरे राज्यों के समान वैट के वादे भी पूरे नहीं किए।

किसान आयोग के गठन का वादा भूले, योगी ने बनाया कृषक समृद्धि आयोग
वादा – किसान आयोग का गठन करेंगे…..सपा ने किसान की उपज का लागत मूल्य तय करने के लिए आयोग के गठन का वादा किया था। लागत मूल्य का 50 प्रतिशत जोड़कर जो राशि आएगी, उस आधार पर फसलों का समर्थन मूल्य तय होना था।
सच्चाई- अखिलेश यादव ने सिर्फ किसान आयोग बनाने का वादा किया था, लेकिन पांच साल में वे इस वादे को पूरा नहीं कर पाए। हकीकत में इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवंबर-2017 में कृषक समृद्धि आयोग बनाकर पूरा किया।

माया के खिलाफ आयोग तो दूर, लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट पर भी कुंडली मारी
वादा – सपा ने कहा था कि बसपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक आयोग बनेगा। यह आयोग निश्चित समयसीमा में जांच करेगा।
सच्चाई – सत्ता में आने के बाद सपा सरकार न सिर्फ यह आयोग बनाना भूल गई, बल्कि बसपा से जुड़े नेताओं की लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट पर भी कुंडली मार कर बैठ गई

मुसलमानों को दलितों की तरह आरक्षण न देने पर सपा को मिला कानूनी नोटिस
वादा – मुसलमानों को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से अत्यधिक पिछड़ा मानते हुए दलितों की तरह आरक्षण दिए जाने का सपा सरकार ने वादा किया था।
सच्चाई – सच्चर कमेटी की सिफारिशों की रोशनी में सभी मुसलमानों को दलितों की तरह अलग से आरक्षण देने का सपना तो दिखाया। साथ ही राजकीय सुरक्षा बलों में मुसलमानों की भर्ती के लिए विशेष कैंप लगाने का प्रावधान करने का भी वादा किया। हकीकत में इनमें से किसी पर अमल नहीं हो पाया और मुस्लिमों को आरक्षण न देने पर सपा को कानूनी नोटिस भी मिला।सपा सरकार 17 पिछड़ी जातियों को एससी की सुविधाएं नहीं दे पाई
वादा – 17 पिछड़ी जातियों को एससी की सुविधाओं देंगे……सपा ने पिछड़ी जातियों में राजभर, निषाद, प्रजापति, मल्लाह, कहार, कश्यप, कुम्हार, धीमर, बिंद, भर, केवट, धीवर, बाथम, मछुआ, मांझी, तुरहा और गौड़ को अनुसूचित जाति में शामिल कर सभी सुविधाएं देने का वादा किया था।
सच्चाई – इस मामले में केंद्र को चिट्ठी लिखने के सिवाय कोई और ठोस पहल नजर नहीं आई। सरकार ने इन जातियों को मात्रात्मक आरक्षण का एक शासनादेश जरूर जारी किया, लेकिन ज्यादातर विभागों में इस पर अमल तक शुरू नहीं हो पाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के नोटिफिकेशन को सही न मानते हुए इस पर भी रोक लगा दी थी।भूमि अधिग्रहण पर न छह गुना मुआवजा और न ही दंपति को आजीवन पेंशन
वादा – सपा ने वादा किया था कि दो फसल देने वाली किसानों की जमीन का उद्योग व इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट के लिए अधिग्रहण पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा। इसका मुआवजा भी सर्किल रेट से छह गुना होगा।
सच्चाई – भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा छह गुना करने के अलावा उस क्षेत्र में उद्योग लगने पर किसान परिवार के एक युवक को नौकरी और बुजुर्ग दंपति को आजीवन पेंशन देने के भी सिर्फ सपने ही दिखाए गए। हकीकत में अखिलेश सरकार में इस पर कोई नीति लागू नहीं कर पाई।

लोकायुक्त संस्था को मजबूत किया न ही वैट कम कर महंगाई को बोझ घटाया
वादा – लोकायुक्त संस्था को न केवल मजबूत बनाया जाएगा, बल्कि इसे बहु-सदस्यीय बनाएंगे। और लोगों को महंगाई के बोझ से निजात दिलाने के लिए वैट को घटाककर पड़ोसी राज्यों के बराबर करेंगे।
सच्चाई – लोकायुक्त संस्था को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार कभी भी प्रयास करती नहीं दिखी। उल्टे लोकायुक्त चयन विवाद ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। सुप्रीम कोर्ट तक फजीहत हुई। इसी तरह टैक्स की दरें न घटाए जाने से न खाने की थाली सस्ती हुई और न हीं पेट्रोल-डीजल का खर्च कम हुआ। गेहूं पर जहां चार फीसद वैट व 2.50 फीसद मंडी शुल्क है वहीं कई पड़ोसी राज्यों से तेल यहां महंगा ही है।ये काम दिखावे भर के लिए शुरू तो किए….बाद में सपा सरकार ने पैर खींचे

  • 10वीं पास मुस्लिम बालिकाओं को आगे की शिक्षा अथवा विवाह के लिए 30 हजार रुपये अनुदान का वादा किया था। सरकार बनी तो इस पर अमल के लिए ‘हमारी बेटी-उसका कल’ योजना शुरू की। मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगे तो तीसरे ही साल बंद कर दिया।
  • इसी तरह 35 साल पूरा कर चुके युवाओं को हर साल 12 हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। सरकार ने भर्ती की उम्र 40 साल कर दी और एक साल बेरोजगारी भत्ता भी दिया। इसके बाद पंजीकृत बेरोजगारों के भत्ते की योजना बंद कर दी गई।
  • इंटरमीडिएट उत्तीर्ण सभी छात्रों को लैपटाप देने का वादा किया गया था। पहले साल दिया भी गया। मगर, अगले ही साल सरकार ने इसे मेधावी छात्रों तक सीमित कर दिया।
  • हाईस्कूल तक शिक्षा प्राप्त कर चुकी लड़कियों को कन्या विद्याधन दिया जाएगा। सरकार ने पहले साल सभी के लिए यह योजना शुरू भी की। अगले साल से इसे मेधावी छात्राओ तक सीमित कर दिया गया।

CAG रिपोर्ट में खुलासा, अखिलेश सरकार में हुआ 97 हजार करोड़ का घोटाला
उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के दौरान सरकारी धन के इस्तेमाल में भारी घपला हुआ। कैग रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अखिलेश सरकार में सरकारी धन की जमकर लूट हुई। सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जीवाड़ा कर 97 हजार करोड़ रुपए के सरकारी धन का बंदरबांट हुआ। 97 हजार करोड़ की भारी-भरकम धनराशि कहां-कहां और कैसे खर्च हुई, इसका कोई हिसाब-किताब ही नहीं है. कैग की इस रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा घपला समाज कल्याण, शिक्षा और पंचायतीराज विभाग में हुआ है। सिर्फ इन तीन विभागों में 25 से 26 हजार करोड़ रुपये कहां खर्च हुए, विभागीय अफसरों ने हिसाब-किताब की रिपोर्ट ही नहीं दी।पीएफ़ घोटाला: 45,000 कर्मचारियों का पैसा निजी कंपनी में पहुंचा
अखिलेश सरकार में बिजली कर्मचारियों के भविष्य निधि यानी पीएफ़ में घोटाला हुआ। 21 अप्रैल, 2014 को उत्तर प्रदेश स्टेट पावर सेक्टर एम्पलाइज ट्रस्ट के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में कर्मचारियों के जीपीएफ और सीपीएफ का पैसा ज्यादा ब्याज देने वाले फाइनेंशियल कॉरपोरेशन में लगाने का फैसला हुआ है। उस समय एमडी एपी मिश्रा थे। इससे पहले कर्मचारियों के पीएफ़ की राशि का निवेश राष्ट्रीयकृत बैंकों में किया जाता था, बाद में इसे दीवान हाउसिंग फ़ाइनेंस लिमिटेड कंपनी यानी डीएचएफ़एल में किया जाने लगा. इस घोटाले के आरोप में उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन के पूर्व एमडी एपी मिश्र और दो अन्य अधिकारी गिरफ्तार भी हुए।

लखनऊ का गोमती रिवर फ्रंट में करोड़ों रुपये का घोटाला
सपा सरकार ने इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताया था जिसमें करीब 1438 करोड़ खर्च हुए थे, हालांकि इस पर काम शुरू होने के बाद से ही कई बार घोटाले के आरोप लगते रहे हैं। सपा शासन में हुए चर्चित गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में सुबूत जुटाने के लिए सीबीआई ने ताबड़तोड़ छापे मारे। सिंचाई विभाग के इस प्रोजेक्ट से जुड़े रहे तत्कालीन 16 इंजीनियरों समेत 189 फर्म्स और कंपनियों के प्रतिनिधियों के ठिकानों पर छानबीन की गई। यूपी के 13 शहरों के अलावा अलवर (राजस्थान) और कोलकाता में एक साथ 40 जगहों पर सीबीआई की टीमों ने पड़ताल की।

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