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कोरोना काल में अर्थव्यवस्था मजबूत, एडीबी ने जताया 11 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी से तेजी से उबर रही है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 11 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। ‘एशियन डेवलपमेंट आउटलुक 2021’ में एडीबी ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था के इस वित्त वर्ष में एक मजबूत वैक्सीन ड्राइव के बीच 11 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री यासुयुकी सवादा ने कहा कि एशिया में विकास हो रहा है, लेकिन कोविड 19 के बढ़ते प्रकोप से इस रिकवरी को खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अर्थव्यवस्थाएं परिवर्तन पर हैं। यह देखना होगा कि के समय उनके वैक्सीन रोलआउट की गति और वैश्विक रिकवरी से उन्हें कितना फायदा हो रहा है।

आइए एक नजर डालते हैं देश की अर्थव्यवस्था एक बार फिर से किस प्रकार पटरी पर लौटने लगी है…

चीन से 4 प्रतिशत ज्यादा रहेगी विकास दर- IMF
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने कहा है कि साल 2021 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 12.5 प्रतिशत रह सकती है। आईएमएफ ने कहा है कि यह वृद्धि दर चीन से 4 प्रतिशत ज्यादा होगी। आईएमएफ ने अपने सालाना वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कहा कि 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 8 प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन इस साल वृद्धि दर 12.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो काफी बेहतर है। आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि चीन की वृद्धि दर 2021 में 8.6 प्रतिशत और 2022 में 5.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

विश्व बैंक ने जीडीपी ग्रोथ अनुमान 5.4 से बढ़ाकर किया 10.1 प्रतिशत
अर्थव्यवस्था में मौजूदा सुधार को देखते हुए विश्व बैंक ने भी अपने अनुमानों में संशोधन किया है। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 4.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 10.1 प्रतिशत कर दिया है। इस अनुमान के पीछे निजी उपभोग में वृद्धि एवं निवेश को कारण बताया गया है। इससे पहले जनवरी में विश्व बैंक ने ही भारत की जीडीपी वृद्धि दर को 5.4 प्रतिशत बताया था।

अर्थव्यवस्था 2021 में करेगी 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज- मूडीज
मूडीज एनालिटिक्स ने अनुमान लगाया है कि देश की अर्थव्यवस्था 2021 में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेगी। मूडीज एनालिटिक्स ने कहा है कि दिसंबर, 2020 को समाप्त तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 0.4 प्रतिशत रही है। यह प्रदर्शन उम्मीद से कहीं बेहतर है। मूडीज ने कहा कि हमारा अनुमान है कि 2021 के कैलेंडर साल में जीडीपी की वास्तविक वृद्धि दर 12 प्रतिशत रहेगी। मूडीज ने कहा कि मौद्रिक और राजकोषीय नीतियां वृद्धि के अनुकूल रहेंगी। मूडीज ने कहा कि अंकुशों में ढील के बद देश और विदेश की मांग सुधरी है। इससे हालिया महीनों में विनिर्माण उत्पादन बढ़ा है।

विदेशी मुद्रा भंडार मामले में रूस को पीछे छोड़ चौथे स्थान पर भारत
विदेशी मुद्रा भंडार मामले में रूस को पीछे छोड़ भारत चौथे स्थान पर पहुंच गया है। 5 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 580.30 अरब डॉलर रहा। जबकि रूस का मुद्रा भंडार घटकर 580.1 अरब डॉलर पर आ गया। इस तरह रूस को पीछे छोड़ भारत चौथे स्थान पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में पहले स्थान पर चीन है। दूसरे स्थान पर जापान और तीसरे स्थान पर स्विटजरलैंड हैं। विदेशी मुद्रा भंडार ने 5 जून, 2020 को खत्म हुए हफ्ते में पहली बार 500 अरब डॉलर के स्तर को पार किया था। इसके पहले यह आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

कोरोना काल में भी मोदी सरकार पर विदेशी निवेशकों ने जताया भरोसा
विदेशी निवेशकों ने कोरोना काल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया है। पिछले साल मार्च-अप्रैल 2020 के बाद कोरोना के कारण से दुनिया के ज्यादातर देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई। ऐसे में विदेशी निवेशक जहां दूसरे देशों में निवेश करने से बच रहे थे, वहीं इन्होंने भारत में जमकर निवेश किया। भारत में अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 के दौरान 72.12 अरब डॉलर का एफडीआई आया। यह किसी भी वित्तीय वर्ष के पहले 10 महीने में आया सबसे अधिक एफडीआई है। यह इसके पहले के वित्त वर्ष 2019-20 में 62.72 अरब डॉलर की तुलना में 15 प्रतिशत ज्यादा एफडीआई है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2020-21 के पहले 10 महीने में में 54.18 अरब डॉलर का एफडीआई इक्विटी प्रवाह आया है। जबकि इसी अवधि में वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान 42.34 अरब डॉलर एफडीआई इक्विटी प्रवाह से 28 प्रतिशत ज्यादा है

PMI सर्विस सूचकांक में जबरदस्त सुधार
भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना संकट से अब बाहर निकल चुकी है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर में सालाना आधार पर 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसमें देश के सर्विस सेक्टर की अहम भागीदारी रही है। देश के सर्विस सेक्टर में जबरदस्त सुधार दिखाई दे रहा है। भारत में सेवा संबंधी गतिविधियों में फरवरी महीने में एक साल की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। एक मासिक सर्वेक्षण के मुताबिक फरवरी में सर्विस सेक्टर का PMI Index 55.3 अंक रहा, जो जनवरी में 52.8 अंक था। फरवरी में सूचकांक लगातार पांचवें महीने 50 से ऊपर रहा। इसी बीच भारत के प्राइवेट सेक्टर के आउटपुट में फरवरी में पिछले चार महीने में सबसे ज्यादा तेज गति से वृद्धि दर्ज की गई। कम्पोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स फरवरी में 57.3 पर पहुंच गया, जो जनवरी में 55.8 पर था। इसमें मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर दोनों से जुड़े आंकड़े शामिल होते हैं।

जीएसटी कलेक्शन लगातार पांचवें महीने एक लाख करोड़ के पार
माल एवं सेवाकर (जीएसटी) राजस्‍व संग्रह के मामले में मार्च, 2021 में एक नया रिकॉर्ड बना है। मार्च में रिकॉर्ड 1,23,902 करोड़ रुपए का जीएसटी संग्रह हुआ है। वित्त मंत्रालय के अनुसार जीएसटी लागू होने के बाद बाद मार्च, 2021 में सबसे ज्‍यादा जीएसटी संग्रह हुआ है। मार्च में हुई 1,23,902 करोड़ रुपए जीएसटी वसूली में सीजीएसटी 22,973 करोड़ रुपए, एसजीएसटी 29,329 करोड़ रुपए, आईजीएसटी 62,842 करोड़ रुपए, 8,757 करोड़ रुपए की उपकर राशि शामिल है। यह कलेक्शन पिछले साल के इसी माह की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक है। जीएसटी राजस्व लगातार छठी बार एक लाख करोड़ के पार पहुंचा है और इसमें लगातार बढ़ोत्तरी महामारी के बाद आर्थिक सुधारों का साफ संकेत है।

नई ऊंचाई पर शेयर बाजार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है।15 फरवरी को शेयर बाजार ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का इंडेक्स सेंसेक्स खुलने के तुरंत बाद 52,000 के लेवल को पार कर गया। यह 492.58 अंकों की तेजी के साथ 52,036.88 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 127.65 अंकों की छलांग लगाकर 15,290.95 के स्तर पर कारोबार करने लगा नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही सेंसेक्स ने जून 2014 में पहली बार 25 हजार के स्तर को छुआ था। मोदी राज में पिछले 6 साल में 25 हजार से 50 हजार तक के सफर तय कर सेंसेक्स दो गुना हो गया है। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान अप्रैल 2014 में सेंसेक्स करीब 22 हजार के आस-पास रहता था।

रोज रिकॉर्ड तोड़ता शेयर बाजार इस बात का सबूत है कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है, उससे तमाम क्षेत्रों की कंपनियों में विश्वास जगा है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारों के कदम उठाने के बाद कोरोना काल में भी आर्थिक जगत में मोदी सरकार की साख मजबूत हुई है, और कंपनियां, शेयर बाजार, आम लोग सभी सरकार की नीतियों पर भरोसा कर रहे हैं। जाहिर है यह भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है।

जीडीपी में 12.6 प्रतिशत की होगी बढ़ोतरी- ओईसीडी
कोरोना महामारी काल में भी भारत की अर्थव्यवस्था प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मजबूत बनी हुई है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन-ओईसीडी ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर में 4.7 प्रतिशत अंको की वृद्धि के साथ 12.6 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया है। इससे भारत विश्व में सबसे तेजी से विकसित होने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान फिर हासिल कर लेगा। भारत के सकल घरेलू उत्पाद के लिए अपने पूर्वानुमानों को बढ़ाते हुए ओईसीडी ने कहा है कि भारत में महामारी के बाद की स्थिति में सुधार होने से वित्तीय, विनिर्माण और निर्माण कार्यों की बहाली से अर्थव्यवस्था में सुधार होने में मदद मिली है। आर्थिक पू्र्वानुमान के बारे में जारी अंतरिम रिपोर्ट में आईसीडी ने कहा कि हाल के महीनों में कोरोना वायरस वैक्सीन तैयार होने और कई आर्थिक प्रोत्साहन पैकेजों की घोषणा के बाद आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। ओईसीडी ने कहा कि भारत और कुछ अन्य देशों में घोषित वित्तीय उपायों से 2021-22 में अर्थव्यवस्था में वृद्धि में मदद मिलेगी।

एशियाई देशों में भारत की विकास दर सबसे बेहतर रहने की संभावना
कोरोना महामारी और तमाम विपरीत परिस्थियों के बावजूद मोदी सरकार की नीतियों के चलते देश की इकोनॉमी वृद्धि कर रही है। मोदी राज में एशियाई देशों में भारत की विकास दर सबसे बेहतर रहने की संभावना है। जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा ने कहा है कि साल 2021 में देश की विकास दर 12.8 प्रतिशत हो सकती है। नोमुरा की भारत और एशिया पूर्व जापान एमडी और मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा ने कहा है कि हमने भारतीय बाजार में एक महत्वपूर्ण रैली देखी है। अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार सोनल वर्मा ने कहा कि हमें लगता है कि भारत की वृद्धि इस वर्ष एशिया के अन्य देशों को पीछे छोड़ देगी और हम कैलेंडर वर्ष 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 12.8 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।

ईपीएफओ में योगदान देने वाली कंपनियां बढ़ीं
ईपीएफओ में योगदान बढ़ने का मतलब होता है कि कंपनियां नए लोगों को नौकरी पर रख रही हैं, यानि कंपनियां वृद्धि करती है, तभी लोगों को रोजगार देती है। आंकड़ों के मुताबिक जुलाई के महीने में ईपीएफओ में योगदान देने वाली कंपनियों की संख्या में इजाफा हुआ है, जो इस बात का संकेत है कि कंपनयों की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है। नियमों के मुताबिक 20 से अधिक कर्मचारी वाली कंपनियों को मूल वेतन का 12 फीसदी योगदान कर्मचारी के ईपीएफओ खाते में आशंदान के तौर पर करना पड़ता है। ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में व्यक्तिगत अंशधारकों की संख्या 3.8 करोड़ रह गई थी, जो अब अगस्त में बढ़कर 4.6 करोड़ पर पहुंच गई है।

मोबाइल कंपनियों ने निवेश और रोजगार के अवसर बढ़े
कोरोना काल में मोदी सरकार की पॉलिसी ने मोबाइल कंपनियों के लिए भारत में अवसरों के दरवाजे खोल दिए हैं। यही वजह है कि मेक इन इंडिया अभियान में शामिल होने के लिए नामी मोबाइल कंपनियों में निवेश करने और रोजगार देने की होड़ लग गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक दूरसंचार मंत्रालय को 22 मोबाइल कंपनियों ने आवेदन दिया है। इसके तहत तीन लाख प्रत्यक्ष और नौ लाख अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे। एप्पल के लिए फोन बनाने वाली ताइवान की व्रिस्टॉन ने बेंगलुरु स्थित कंपनी के नारासापुरा प्लांट में नए आईफोन का उत्पादन शुरू कर दिया है। इस प्लांट में कंपनी ने करीब 2,900 करोड़ रुपये का निवेश किया है। उसकी इस नए प्लांट में करीब 10 हजार कर्मचारियों को रखने की योजना है। इसी तरह अन्य कंपनयों ने भी नौकरियां देने की योजना बनाई है जिसके तहत साल के अंत तक कम से कम 50 हजार लोगों को नौकरियां मिलेंगी।

2021-22 में 9.5 प्रतिशत रह सकती है विकास दर-फिच
रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की विकास दर 9.5 प्रतिशत रह सकती है। फिच रेटिंग्स ने हालांकि कोरोना संकट के कारण चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था के पांच प्रतिशत सिकुड़ने का अनुमान जताया है। लेकिन फिच ने कहा कि कोरोना संकट के बाद देश की जीडीपी वृद्धि दर के वापस पटरी पर लौटने की उम्मीद है। इसके अगले साल 9.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने की उम्मीद है।

स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स ने जताया भारत पर भरोसा
रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स ने (S&P) ने भारत की सॉवरिन रेटिंग को BBB माइनस पर बरकरार रखा है। S&P ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर विश्वास जताते हुए आउटलुक को स्थिर रखा है। स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फिलहाल ग्रोथ रेट पर दबाव है, लेकिन अगले साल 2021 से इसमें सुधार दिखने को मिलेगा। फिच ने कहा है कि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए विकास दर का 8.5 प्रतिशत रह सकती है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन वृद्धि भारत में होगी
प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक नीतियों से देश की इकोनॉमी और कारोबारी माहौल लगातार बेहतर हो रहा है। यही वजह है कि जहां कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, वहीं कर्मचारियों की सैलरी भी निरंतर बढ़ रही है। प्रमुख वैश्विक एडवाइजरी, ब्रोकिंग और सोल्यूशंस कंपनी विलिस टॉवर्स वॉटसन की ताजा तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 में कर्मचारियों के वेतन में रिकॉर्ड 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ये वेतन वृद्धि पूरे एशिया-पैसिफिक में सबसे अधिक होगी। विलिस टॉवर्स वॉटसन ने अपनी यह रिपोर्ट विभन्न औद्योगिक क्षेत्रों और कंपनियों की प्रगति का अध्ययन और सर्वे करने के बाद तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में वेतन वृद्धि 8 प्रतिशत, चीन में 6.5 प्रतिशत, फिलीपींस में 6 प्रतिशत और हांगकांग व सिंगापुर में 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। जाहिर है कि मोदी सरकार की सफल आर्थिक नीतियों की वजह से ही इस वर्ष भारत में औसत वेतन वृद्धि 9 प्रतिशत से अधिक रही।

5 साल में भारत में 5 अरब डॉलर का निवेश करेगी फेयरफैक्स
प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का ही असर है कि आज भारत में विदेशी कंपनियां खूब निवेश कर रही हैं। कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स अगले पांच साल में भारत में 5 अरब डॉलर का निवेश करने जा रही है। कंपनी पिछले पांच साल में भारत में 5 अरब डॉलर का निवेश कर चुकी है और इतनी ही रकम वह अगले पांच साल में लगाने जा रही है। कंपनी के प्रमुख और अरबपति निवेशक प्रेम वत्स ने इकनॉमिक टाइम्स के साथ इंटरव्यू में भारत में आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यहां ‘शानदार मौके’ हैं। उन्होंने कहा कि मेरे हिसाब से भारत दुनिया का नंबर वन देश है। प्रेम वत्स ने कहा, ‘दुनिया की जीडीपी में भारत का योगदान 3 प्रतिशत है, लेकिन कुल वैश्विक निवेश में इसकी हिस्सेदारी 1 प्रतिशत ही है। अगर इसे बढ़ाकर 2 प्रतिशत भी कर दिया जाए तो भारत में 3 लाख करोड़ डॉलर का निवेश बढ़ेगा।’ उन्होंने कहा कि आज चीन और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर कुछ मतभेद चल रहे हैं। ऐसे में लोग भारत में पैसा नहीं लगाएंगे तो कहां लगाएंगे? वे किसी बड़े बाजार में निवेश करना चाहते हैं, जहां लोकतंत्र हो। जहां कानून का राज हो। प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि भारत खुशकिस्मत है कि उसे मोदीजी जैसे बिजनस-फ्रेंडली नेता मिला है। उनका पूरा ध्यान देश के लिए अच्छा करने पर है। वत्स ने कहा कि इस तरह का तजुर्बा ग्लोबल लीडर में कम ही होता है।

FDI के मोर्चे पर 20 वर्ष में पहली बार भारत ने चीन को पछाड़ा
भारत 20 साल में पहली बार एफडीआई हासिल करने के मामले में चीन से आगे निकल गया। वर्ष 2018 में वालमार्ट, Schneider Electric और यूनीलीवर जैसी कंपनियों से भारत में आए निवेश के चलते ये संभव हो सका। इस दौरान भारत में 38 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ, जबकि चीन सिर्फ 32 अरब डॉलर ही जुटा सका। पीएम मोदी के नेतृत्व में मजबूत सरकार और नए क्षेत्रों में भारी अवसरों के कारण भारत विदेशी निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पिछले साल भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के 235 सौदे हुए। पिछले 20 वर्षों से चीन विदेशी निवेशकों की पसंदीदा जगह बना हुआ था। पिछले साल चीन के बाजारों में आंशिक मंदी और अमेरिका के साथ ट्रेड वार के चलते विदेशी निवेशकों का रुख भारत की ओर बढ़ा है।

NPA के मामलों में सरकार को मिली बड़ी कामयाबी
रिजर्व बैंक आफ इंडिया की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों का ग्रॉस एनपीए घटकर 9.1 फीसदी पर आ गया है। यह एक साल पहले 11.2 फीसदी पर था। रिपोर्ट के अनुसार बैंकों के फंसे कर्ज के बारे में जल्द पता चलने और उसका जल्द समाधान होने से एनपीए को नियंत्रित करने में मदद मिली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरूआती कठिनाइयों के बाद इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) बैंकिंग सिस्टम का पूरा माहौल बदलने वाला कदम साबित हो रहा है। पुराने फंसे कर्ज की रिकवरी में सुधार आ रहा है और इसके परिणामस्वरूप, संभावित निवेश चक्र में जो स्थिरता बनी हुई थी, उसमें सुगमता आने लगी है।

बेहतर हुआ कारोबारी माहौल
पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं। सबसे खास यह है कि केंद्र और राज्य सहकारी संघवाद की संकल्पना को साकार रूप दिया गया है।

पारदर्शी नीतियां, परिवर्तनकारी परिणाम
कोयला ब्लॉक और दूरसंचार स्पेक्ट्रम की सफल नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई। इस प्रक्रिया से कोयला खदानों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत 82 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी आवंटन के तहत 3.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।

जीएसटी ने बदली दुनिया की सोच
जीएसटी, बैंक्रप्सी कोड, ऑनलाइन ईएसआइसी और ईपीएफओ पंजीकरण जैसे कदमों कारोबारी माहौल को और भी बेहतर किया है। खास तौर पर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानि GST ने सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं को दर्जनों करों के मकड़जाल से मुक्त कर एक कर के दायरे में लाया गया।

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