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बिहार, झारखंड और तमिलनाडु में विदेशी मौलवियों की मौजूदगी से हड़कंप, कोरोना टेस्ट में दो को पाया गया पॉजिटिव

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कोरोना वायरस के आतंक की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन घोषित किया गया है। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए हर तरह के उपाय किए जा रहे हैं। विदेशों खासकर चीन से आने वाले लोगों की गहन जांच की जा रही है। इसी दौरान बिहार, झारखंड और तमिलनाडु के मस्जिदों में छिपे विदेशी मौलवियों की सूचना से हड़कंप मच गया है। इनमें से दो को कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है। कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित चीन के मौलवियों की मौजूदगी से लोगों के मन में उत्सुकता के साथ ही भय व्याप्त हो गया है। पुलिस ने सभी विदेशी मौलवियों को हिरासत में लेकर कोरोना वायरस की जांच के लिए अस्पताल भेज दिया है।

झारखंड में रांची पुलिस ने तमाड़ स्थित राड़गांव मस्जिद में छिपे 11 मौलवियों को हिरासत में लिया, जिसमें 3 मौलवी चीन से हैं, जबकि 4-4 किर्गिस्तान और कजाकिस्तान से हैं। जांच के दौरान प्राप्त पहचान पत्रों से इनकी शिनाख्त चीन के मा मेंनाई, ये देहाइ, मा मेरली, किर्गिस्तान के नूर करीम, नारलीन, नूरगाजिन, अब्दुल्ला और कजाकिस्तान के मिस्नलो, साकिर, इलियास आदि के रूप में हुई है। डीएसपी अजय कुमार ने बताया कि सभी के कागजात की जांच की जा रही है। तमाड़ चिकित्सा प्रभारी आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि सभी 11 विदेशियों की प्रारंभिक जांच कर ली गई है। किसी के कोरोना संक्रमित रोग के लक्षण नही मिले हैं। फिर भी सभी मौलवियों को क्वारनटाइन के लिए मुसाबनी स्थिति कांस्टेबल ट्रेनिंग स्कूल भेज दिया गया।

इन मौलवियों ने भी खुद को अब तक पूछताछ में मजहब प्रचारक बताया है। इनका कहना है कि इन्होंने 1 महीने से भारत के विभिन्न मस्जिदों में पनाह ली और 19 मार्च को रांची से बस द्वारा जमशेदपुर जाने के दौरान तमाड़ में राड़गांव के पास स्थित एक मस्जिद में रुके। यानि ये सभी रांची के इस मस्जिद में पिछले 5 दिन से थे।

इससे पहले बिहार के पटना में 12 विदेशियों को एक मस्जिद से हिरासत में लिया गया था। जानकारी के मुताबिक, ये मामला राजधानी के भीड़भाड़ वाले इलाके कुर्जी का है। यहां गेट नं 74 के पास स्थित एक मस्जिद में कुछ विदेशी लोगों को छिपाकर रखा गया था। छिपे हुए विदेशी लोगों की संख्या 12 बताई जा रही है। जब आसपास के मोहल्ले वालों को इसका पता चला तो लोगों ने विरोध किया और हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस आई जिसके बाद पुलिस ने 12 विदेशियों को अपनी कस्टडी में ले लिया।

इनसे पूछताछ में पता चला कि सभी तजाकिस्तान के निवासी हैं और पटना में धार्मिक प्रचार प्रसार के लिए आए थे। दीघा थानेदार मनोज कुमार सिंह ने बताया कि एहतियातन जाँच के लिए सभी को एम्स भेजा गया। ये सभी चार महीने पूर्व धार्मिक प्रचार के लिए भारत आए थे और सोमवार की सुबह नमाज के लिए दीघा मस्जिद गए थे, पुलिस ने सूचना पर जाँच के लिए एम्स भिजवाया।

उधर तमिलनाडु के अंबुर, इरोड और सलेम से 38 इस्लामिक प्रचारकों को हिरासत में लिया गया है। जिनमें 23 इंडोनेशिया, 8 म्यांमार और 7 थाईलैंड से हैं। जिनमें से दो को कोरोना वायरस की जांच में पॉजिटिव पाया गया है।

इरोड जिले के एक अस्पताल में दो मस्लिम प्रचारकों को कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद प्रशासन ने पेरुदुरई में नौ सड़कों को सील कर दिया, जिनका इस्तेमाल मुस्लिम धर्मप्रचारकों ने किया था। सात प्रचारक 12 मार्च को थाईलैंड से इरोड जिले पहुंचे थे। 15 मार्च तक वे पेरुदुरई के तीन मस्जिदों में रुके थे और उनमें से एक की बाद में कोयंबटूर सरकारी अस्पताल में मौत हो गई थी। 

पड़ोसी सलेम जिले में 11 इंडोनेशियाई नागरिकों को मोहन कुमारमंगलम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 5 अन्य स्थानीय मुसलमानों के साथ क्वेरेंटाइन किया गया था । जिलाधिकारी ने बताया कि इंडोनेशिया के 11 नागरिकों की यह टीम शहर का दौरा कर धार्मिक सभाओं में हिस्सा ले रही थी। इस टीम ने आसपास के इलाकों और संन्यासी कुंडू स्थित एक मस्जिद का भी दौरा किया। जिलाधिकारी के मुताबिक मुस्लमि धर्मप्रचारकों ने शेवपेट, पोनममापेट और एरूमालियाम गांवों के तीन मस्जिदों में धार्मिक बैठकों में भाग लिया था।

 

 

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