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हिंदू बच्ची से रेप पर राहुल गांधी और केजरीवाल की खामोशी से भड़का लोगों का गुस्सा!

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दिल्ली की एक 11 वर्ष की बच्ची अपने घर से कुछ खरीदने बाहर निकलती है और वापस नहीं लौटती है.. जब घर वाले पुलिस की मदद लेते हैं तो पुलिस घटना की कड़ियां जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद पहुंचती है। यहां अर्थला इलाके के एक मदरसे से बच्ची को बेहद बुरी हालत में बरामद किया गया। गौरतलब है कि मुस्लिम बहुल इलाके का यह मदरसा एक मस्जिद के परिसर का ही हिस्सा है। जांच में पता लगा कि बच्ची नशे की दवाई दी गई और इस हिन्दू बच्ची से मौलवी शाहबाज खान और 17 साल के एक युवक ने 5 दिनों तक रेप किया।

घटना के विरोध में लोग सड़कों पर हैं और थाने का घेराव कर रहे हैं। लोग आरोपियों को सख्त सजा देने के लिए लगातार अपनी मांग बुलंद कर रहे हैं।  उनका गुस्सा दिनों दिन बढ़ता जा रहा है, क्योंकि इस पूरे मामले पर तथाकथित सेक्यूलर मीडिया खामोश है। राहुल गांधी की चुप्पी से लोग खुद को ठगा हुा महसूस कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या राहुल गांधी इसलिए चुप हैं कि पीड़ित हिंदू है और आरोपी मुस्लिम समुदाय से है? लोग यह भी सवाल कर रहे हैं कि क्या पीड़ित मुस्लिम होती और आरोपी हिंदू समुदाय से, तो राहुल इसी तरह चुप रहते?

हिंदू बच्ची से रेप के विरुद्ध राहुल गांधी ने क्यों नहीं निकाला कैंडल मार्च?
जम्मू के कठुवा में रेप की पुष्टि भी नहीं हुई थी, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने विरोध प्रदर्शन किए, बहन प्रियंका के साथ मिलकर कैंडल मार्च तक निकाला। मंदिर को बदनाम करने का काम किया और हिंदुओं को निशाना बनाया, लेकिन यहां एक मौलवी द्वारा एक हिंदू बच्ची के बलात्कार पर चुप हैं। मस्जिद से सटे हुए मदरसे में रेप किया गया, लेकिन किसी की जबान तक नहीं खुल रही है। सवाल उठ रहा है कि देश के एक बड़े पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आखिर एक जैसे मामले में दोहरा रवैया कैसे अपना सकते हैं? सवाल यह भी कि राहुल गांधी धर्म देखकर ही अपनी जुबान खोलते और बंद रखते हैं?

‘सिलेक्टिव सेक्यूलरिज्म’ की पोल खोलता है अर्थला मदरसा बलात्कार कांड!
दिल्ली की बच्ची का मौलवी ने रेप किया, लेकिन सूबे के सीएम अरविंद केजरीवाल खामोश हैं। उन्होंने न तो पीड़ित परिवार से मुलाकात की और न ही किसी तरह की सहायता की ही घोषणा की। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने भी इस मामले पर अनशन नहीं किया और न ही फेसबुक और ट्विटर पर अलका लांबा के आंसू ही छलके। दरअसल ये सिलेक्टिव सेक्यूलरिज्म की पोल खोलने का वो नमूना है जो बलात्कार जैसे घृणित अपराध में भी धर्म देखता है। बच्ची हिंदू समुदाय से है, इसलिए ही शायद बलात्कारी मौलवी को फांसी देने की भी मांग लेकर कोई ‘महिलावादी गैंग’ भी सामने नहीं आ रहा। हैरतपूर्ण बात यह भी है कि कठुआ कांड पर जिस तरह से हिंदू समाज का हर व्यक्ति इंसाफ की मांग लेकर सामने आया उस तरह से मुस्लिम समुदाय की ओर से कोई सामने नहीं आया। 

मौलवी द्वारा हिंदू बच्ची के रेप पर सेक्यूलरों की खामोशी क्या कहती है?
अर्थला में मदरसा-मस्जिद में रेप, सासाराम में मेराज आलम द्वारा रेप, मुंबई में एक मुस्लिम द्वारा रेप… ये सभी घटनाएं एक चरित्र की हैं, लेकिन मीडिया ने इसे नहीं दिखाया। दरअसल फर्क सिर्फ यह है कि इन तीनों जगहों पर पीड़ित हिंदू समुदाय से है और बलात्कार का आरोपी मुस्लिम समुदाय का। लेकिन मीडिया के इस तथाकथित सेक्यूलर धड़े को मुस्लिमों में कोई बुराई नहीं दिख रहा है। हालांकि किसी एक भी हिंदू का नाम आ जाए तो मीडिया की नजर में पूरा समुदाय बलात्कारी हो जाता है और हिंदू धर्म ही कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है। दरअसल ये वही कुनबा है जो असम, बंगाल, कश्मीर में हिंदू महिलाओं पर हो रहे अत्याचार-बलात्कार पर भी खामोश रहता है।

बॉलीवुड के कलाकारों ने अपने गले में क्यों नहीं टांगी विरोध की तख्ती?
15-16 अप्रैल को पूरे देश ने देखा कि किस तरह बॉलीवुड से जुड़े कुछ अभिनेता और अभिनेत्रियों ने कठुआ कांड को पूरे हिंदू समुदाय से जोड़ दिया था। करीना कपूर खान, श्रुति सेठ आलम, जावेद अख्तर और फरहान अख्तर जैसे लोगों को भारतीय होने में भी शर्म आ रही थी। बॉलीवुड का यह धड़ा भारत को ‘बलात्कारी देश’ तक कह रहा था। इन्हें हिंदू धर्म में सिर्फ बुराइयां नजर आ रही थीं। देव स्थान को ‘बलात्कार का स्थान’ घोषित करने की आतुरता थी। परन्तु अब सब खामोश हैं। कहीं कोई विरोध की तख्ती नहीं, कोई शर्मिंदगी नहीं, कोई न्याय की मांग नहीं। 

अपने ही देश में हिंदुओं को नीचा दिखाने की साजिश कर रहे सेक्यूलरवादी!
बलात्कार जैसे घृणित अपराध को धर्म की नजरों से देखना कतई सही नहीं है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या कठुआ कांड में पूरे हिंदू समुदाय को बदनाम करने की साजिश रची गई थी? अगर नहीं तो मस्जिद में रेप पर ये खामोशी क्यों? दरअसल देश में ऐसी शक्तियां लगातार सक्रिय हैं जो लगातार दुष्प्रचार कर रही हैं। तथाकथित सेक्यूलर पत्रकार या फिर देश के भीतर के विभाजनकारी तत्व हों, सभी देश को बदनाम करने के एजेंडे पर चल रहे हैं। इस एजेंडे के चेहरे भी कमोबेश वही हैं जिन्हें कठुआ कांड में पूरा हिंदू समुदाय दोषी नजर आता है, लेकिन अर्थला कांड में ये खामोश रहते हैं। ये वही धड़ा है जो कठुआ कांड के आरोपियों की सीबीआई जांच और नार्को टेस्ट की मांग को खुद ही खारिज कर देता है और हिंदू समुदाय को बलात्कारी और हिंदू धर्म को नीचा दिखाने का कुत्सित प्रयास करता है।

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