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देश में सुधरी रोजगार की स्थिति, जून महीने में EPFO से जुड़े रिकॉर्ड 12.83 लाख नए सदस्य

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पिछले डेढ़ साल से जारी कोरोना महामारी के असर से देश अब उबरने लगा है। मोदी सरकार के प्रयासों और प्रोत्साहन पैकेज से जहां अर्थव्यवस्था में तेजी दिखाई दे रही है, वहीं रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। इसका नतीजा है कि देश में रोजगार की स्थिति बेहतर हुई है और जून के महीने में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ने वाले नए सदस्यों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। श्रम मंत्रालय द्वारा शुक्रवार (20 अगस्त, 2021) को जारी ईपीएफओ के अस्थायी वेतन खाते के आंकड़े से पता चलता है कि देश में इस साल जून के महीने में निवल रूप से 12.83 लाख नए नामांकन दर्ज किए गए।

8.11 लाख सदस्य पहली बार हुए शामिल

मंत्रालय के मुताबिक मई की तुलना में जून में सदस्यों की कुल संख्या में शुद्ध रूप से 5.09 लाख की वृद्धि हुई। जून में शुद्ध रूप से जोड़े गए 12.83 लाख सदस्यों में से लगभग 8.11 लाख पहली बार कर्मचारी भविष्य निधि योजना के सामाजिक सुरक्षा दायरे के तहत आए हैं। जून के दौरान करीब 4.73 लोगों ने ईपीएफओ की सदस्यता छोड़ी, लेकिन फिर उन कंपनियों में नौकरियां लेकर दोबारा ईपीएफओ में शामिल हो गए जो ईपीएफओ के दायरे में आती हैं। महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जून महीने में 7.78 लाख ग्राहकों को जोड़कर रोजगार सृजन में अग्रणी बने हुए हैं, जो सभी आयु समूहों में कुल शुद्ध सैलरी वृद्धि का लगभग 60.61 प्रतिशत है।

ईपीएफओ से सबसे अधिक जुड़े 18 से 25 साल के युवा

जून महीने में ईपीएफओ से जुड़ने वालों में सबसे ज्यादा संख्या 18 से 25 साल के युवाओं की रही। कुल नए सदस्यों में 6.15 लाख इसी आयु वर्ग के रहे जो कि कुल शामिल सदस्यों का 47.89 प्रतिशत रहा। इसके बाद सबसे अधिक 2.55 लाख नए जुड़े सदस्य 29 से 35 वर्ष की आयु वर्ग से रहे। आयु के हिसाब से पेरोल डेटा यह बताता है कि पहली बार नौकरी चाहने वाले बड़ी संख्या में संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों में शामिल हो रहे हैं। वहीं जून माह के दौरान महिला- पुरुषों के लिहाज से यदि बात की जाए, तो निवल रूप से 2.56 लाख महिलाओं ने ईपीएफओ के वेतन रजिस्टर में आईं। यह संख्या मई के मुकाबले 79 हजार अधिक है।

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