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राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में पीएम मोदी ने कहा, “नमामि गंगे की धारा अब अर्थ गंगा की ओर मुड़ने जा रही है।”

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मई 2014 में केंद्र की सत्ता संभालते ही मां गंगा की सेवा में जुट गए। उन्होंने गंगा की सफाई के लिए एक अलग मंत्रालय बनाने का निर्णय लिया और नमामि गंगे योजना के तहत कई परियोजनाओं की शुरूआत की। 14 दिसंबर, 2019 को राष्ट्रीय गंगा परिषद की पहली बैठक में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री मोदी कानपुर पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी ने न सिर्फ ‘नमामि गंगे’ के तहत हुए कार्यों की समीक्षा की, बल्कि अविरल-निर्मल गंगा के सहारे विकास का खाका भी खींचा।

पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले दिनों में यह योजना आय का सबसे बड़ा जरिया बनने की जा रही है। उन्होंने कहा-‘नमामि गंगे की धारा अब अर्थ गंगा की ओर मुड़ने जा रही है।’ इसके साथ ही साफ किया कि अविरल-निर्मल धारा किसानों और सामान्य जनों के लिए कैसे आय का बड़ा साधन बनेगी।

पीएम मोदी ने जीरो बजट खेती, ईको-एडवेंचर टूरिज्म, रिवर फ्रंट बेसिन का विकास और डॉल्फिन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। कहा कि आय का साधन बढ़ाने के लिए गंगा के किनारे फलदार वृक्ष लगाएं, नर्सरी बनाएं। इसमें महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों व पूर्व सैनिक संगठनों को प्राथमिकता दें। गंगा किनारे एडवेंचर स्पोर्ट्स, साइकिलिंग, वाकिंग पाथ-वे की व्यवस्था करें। गंगा में जलयान यानी क्रूज टूरिज्म का रोमांच दें।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिन पांच राज्यों से गंगा होकर बहती है, वहां जल प्रवाह को ठीक बनाए रखने के लिए 2015-20 के लिए 20 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था करने वाली यह पहली केंद्र सरकार है। अब तक नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए 7,700 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। उन्होंने जिला गंगा समितियों को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया।

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने गंगा को साफ करने के लिए क्लीन गंगा फंड बनाया है। इसमें व्यक्तिगत, एनआरआइ, कॉर्पोरेट संस्थाएं योगदान कर सकती हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद 2014 से अब तक मिले उपहारों की नीलामी और सियोल शांति पुरस्कार से प्राप्त धनराशि से 16.53 करोड़ रुपये इस फंड में दिए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने गंगा को स्वच्छ, निर्मल बनाने की दिशा में जन जागरुकता को जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि इसके लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में जागरुकता कार्यक्रम निरंतर चलाए जाने चाहिए। बच्चों, महिलाओं, किसानों सभी को इससे जोड़ने की जरूरत है।

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