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मुन्नवर राणा की हालत उस तवायफ जैसी हो चुकी है, जिसकी जवानी ढल गयी है और कोठा उजड़ चुका है

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मां पर शायरी लिखकर फेमस हुआ मुनव्वर राणा तो रंडियों का सौदागर निकलना। मुनव्वर राणा ने अयोध्या में श्री राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर अपनी जात दिखा दी है। उन्होंने कहा है कि भारत के पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई जितने कम दाम में बिके, उतने में हिन्दुस्तान की एक रंडी भी नहीं बिकती है। जिस मुनव्वर राणा को एक शायर समझता था वो तो कुछ और ही निकला। इस कथित शायर ने साबित कर दिया है कि वो एक मुसलमान से अधिक कुछ नहीं है।

इस शायर ने रंजन गोगोई को राज्यसभा सदस्य बनाए जाने पर कहा है कि राम मंदिर पर उनका फैसला अच्छा था या बुरा, उन्हें राज्यसभा की सदस्यता नहीं दी जानी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर मामले में न्याय नहीं हुआ बल्कि धोखाधड़ी हुई है। मुन्नवर राणा के इस दोगलेपन पर सोशल मीडिया में थू-थू हो रही है। प्रकाश शुक्ला नाम के एक यूजर ने लिखा है कि मुन्नवर राणा की हालत उस तवायफ जैसी हो चुकी है, जिसकी जवानी ढल गयी है और कोठा उजड़ चुका है।

 

वैसे आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि मुनव्वर राना ने जिन पंक्तियों पर जिंदगीभर वाह-वाही लूटी, वास्तव में वो लेखक आलोक श्रीवास्तव द्वारा लिखी गई ‘अम्मा’ कविता से चुराई गईं हैं। डीडी न्यूज के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने एक ट्वीट करते हुए लिखा कि जिस नज़्म ‘मेरे हिस्से में माँ आई’ की कमाई मुनव्वर राना, ज़िंदगी भर खाते रहे वो आलोक श्रीवास्तव, जी की कविता की कॉपी है। मुनव्वर राना ने खत का आज तक जवाब नहीं दिया, बेशर्मी से चुराई नज़्म पर पुरस्कार और तालियाँ बटोरते रहे।

 

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