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कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए वेब पोर्टल ‘युक्ति’ लॉन्च

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कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए मोदी सरकार ने वेब पोर्टल ‘युक्ति’ “YUKTI” (Young India Combating COVID with Knowledge, Technology, and Innovation) लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य कोविड-19 की विभिन्न चुनौतियों से समग्रता और व्यापकता के साथ निपटना है। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने रविवार को नई दिल्ली में वेब पोर्टल युक्ति का लोकार्पण किया। इस पोर्टल के माध्यम से यूथ इंडिया कम्बेटिंग कोविड विद नॉलेज टेक्नालॉजी एंड इनोवेशन पर मंत्रालय के प्रयासों और पहलों की निगरानी की जा सकेगी। इस अवसर पर निशंक ने कहा कि कोरोना वायरस के खतरे के संदर्भ में प्राथमिक उद्देश्य शैक्षिक समुदाय को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखना तथा शिक्षा के लिए गुणवत्ता युक्त माहौल बनाए रखना है।

मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि यह विशेष रूप से कोविड से संबंधित शिक्षा, अनुसंधान में संस्थानों की विभिन्न पहलों एवं प्रयासों, संस्थानों द्वारा सामाजिक पहलों और छात्रों के समग्र कल्याण में बेहतरी के लिए उठाये जाने वाले कदमों को कवर करेगा। यह पोर्टल व्यापक रूप से शैक्षणिक समुदाय को सेवाओं के गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों ही मानदंडों को कवर करेगा।

उन्होंने कहा कि यह पोर्टल विभिन्न संस्थानों को कोविड-19 की अभूतपूर्व स्थिति के कारण उत्पन्न विभिन्न चुनौतियों और भविष्य की अन्य पहलों के लिए उनकी कार्यनीतियों को साझा करने की भी अनुमति देगा। मानव संसाधन विकास मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह पोर्टल बेहतर योजना निर्माण के लिए इनपुट प्रदान करेगा और मानव संसाधन विकास मंत्रालय को आगामी छह महीनों के लिए प्रभावी तरीके से अपने कार्यकलापों की निगरानी करने में सक्षम बनायेगा।

श्री निशंक ने कहा कि यह पोर्टल मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं संस्थानों के बीच एक दुतरफा संचार चैनल की भी स्थापना करेगा जिससे कि मंत्रालय संस्थानों को आवश्यक सहायता प्रणाली उपलब्ध करा सके। उन्होंने कहा कि हमें भरोसा है कि यह पोर्टल इस चुनौतीपूर्ण समय में छात्र संवर्धन नीतियों, प्लेसमेंट से संबंधित चुनौतियों एवं छात्रों के शारीरिक एवं मानसिक कल्याण से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों में सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि वेब प्लेटफार्म युक्ति अपने नाम को साकार करेगा एवं अंतिम हितधारकों, जो हमारे देश के नागरिक हैं, तक अनुसंधान को ले जाने में एक महान सक्षमकर्ता साबित होगा।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत बना विश्व का संकटमोचक

कोरोना संकट के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरे विश्व के लिए संकटमोचक बनकर उभरे हैं। आइए देखते हैं- 

संकट के समय हाइड्रोक्सीक्लोक्वीन देना का फैसला
कोरोना महामारी से भारत खुद पीड़ित है, इसके बावजूद कोरोना मरीजों की मदद के लिए विश्व के कई देशों को हाइड्रोक्सीक्लोक्वीन दवा देने का फैसला किया है। संकट के समय भारत ने अमेरिका, ब्राजील, इजरायल, स्पेन, श्रीलंका, नेपाल समेत कई देशों के आग्रह पर हाइड्रोक्सीक्लोक्वीन दवा देने का फैसला किया है। हालांकि, इसके पहले घरेलु जरूरतों को देखते हुए हाइड्रोक्सीक्लोक्वीन दवा के निर्यात पर बैन लगा दिया था लेकिन संकट को देखते हुए भारत ने मानवीय आधार पर इन देशों को हाइड्रोक्सीक्लोक्वीन देने का फैसला किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को थैंक्स कहा 
कोरोना वायरस संकट पर भारत से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा मिलने पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने थैंक्यू इंडिया कहा। इसपर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं कि इस तरह के समय में दोस्त और करीब आते हैं। भारत और अमेरिका की साझेदारी पहले से ज्यादा मजबूत है। भारत कोरोना महामारी के खिलाफ मानवता की लड़ाई में हरसंभव मदद करेगा। हम लोग मिलकर इस लड़ाई को जीतेंगे। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ट्वीट संदेश में भारत और प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद कहा था। 

‘प्रभु हनुमान की तरह पहुंचाई संजीवनी बूटी’
ब्राजील के राष्‍ट्रपति जायर एम बोल्‍सोनारो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना भगवान हनुमान से की करते हुए हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन दवा को संजीवनी बूटी बताया है। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से दी गई इस हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से लोगों के प्राण बचेंगे और इस संकट की घड़ी में भारत और ब्राजील मिलकर कामयाब होंगे। प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र में राष्‍ट्रपति बोल्‍सोनारो ने लिखा है कि जिस तरह हनुमान जी ने हिमालय से पवित्र दवा (संजीवनी बूटी) लाकर भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण की जान बचाई थी, उसी तरह भारत और ब्राजील एक साथ मिलकर इस वैश्विक संकट का सामना कर लोगों के प्राण को बचा सकते हैं।

इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने जताया भारत का आभार 
कोरोना वायरस महामारी को खत्म करने के लिए फिलहाल सबसे अहम दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन है। भारत ने इस दवा की खेप इजरायल को भिजवाई है। दवा मिलने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शुक्रिया अदा किया। इसके जवाब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें साथ मिलकर इस महामारी से लड़ना होगा। भारत अपने मित्रों के लिए जो संभव है, वह करने को तैयार है। इजरायल के लोगों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।

अमेरिका इजरायल और ब्राजील के अलावा भारत ने स्पेन, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव समेत कई देशों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा समेत दूसरी सहायता देने का फैसला किया है।   

पीएम मोदी की पहल पर वर्चुअल जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन 
वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ के लिए 26 मार्च को वर्चुअल जी20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस वर्चुअल मीटिंग के आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी भूमिका रही है। इस वीडियो संवाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वैश्विक समृद्धि, सहयोग के लिए हमारे दृष्टिकोण के केंद्र बिंदु में आर्थिक लक्ष्यों के स्थान पर मानवता को रखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके साथ ही दुनिया भर में कहीं अधिक अनुकूल, प्रतिक्रियात्मक और सस्ती मानव स्वास्थ्य सुविधा प्रणाली का विकास करने की वकालत की। सऊदी अरब की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में कोरोना वायरस महामारी को रोकने और लोगों की सुरक्षा के लिए G-20 नेताओं ने सभी आवश्यक उपाय करने पर सहमति व्यक्त की। बैठक के दौरान, जी20 के नेताओं ने महामारी को रोकने और लोगों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करने पर सहमति जताई। उन्होंने चिकित्सा आपूर्तियों की पहुंच, डायग्नोस्टिक उपकरण, इलाज, दवाएं और टीके समेत महामारी के खिलाफ लड़ाई में डब्लूएचओ को और मजबूत करने का समर्थन किया।

कोविड महामारी के मद्देजनर सार्क देशों की वर्चुअल मीटिंग  
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर कोरोना वायरस को लेकर सार्क देशों के नेताओं की वर्चुअल मीटिंग बुलाई गई। इस बैठक में श्रीलंका, मालदीव, नेपाल और भूटान के अलावा पाकिस्तान ने भी भाग लिया और कोरोना से लड़ने के लिए विचार विमर्श और मिलकर लड़ने का फैसला किया। कोरोना वायरस की महामारी से निपटने के लिए साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल को-ऑपरेशन (SAARC) ने आपातकालीन फंड बनाने के घोषणा की है। इस बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि हम इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं, मैं इस वायरस के प्रसार से निपटने के भारत के अनुभव को संक्षेप में साझा करना चाहूंगा। हमारा मार्गदर्शक मंत्र है- ‘तैयार रहें, मगर घबराएं नहीं।’

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