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मेड इन इंडिया प्रोडक्ट की विदेशों में धूम, एक साल में 17 प्रतिशत बढ़ा निर्यात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू की गई मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया अभियान का असर दिखने लगा है और भारत में मेड इन इंडिया प्रोडक्ट काफी तदाद में बनने लगे हैं। यही वजह है कि अब मेड इन इंडिया प्रोडक्ट की धमक विदेशों में दिखाई देने लगी है। भारत के आर्थिक विकास के लिए पीएम मोदी की दूरदर्शी सोच एवं कारोबार करने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की वजह से भारत में अब दुनिया भर की आधुनिक प्रौद्योगिकी में दक्ष कंपनियां मेक इन इंडिया अभियान के तहत वर्ल्ड क्लास उत्पाद बना रही हैं। इसके साथ ही देश की कंपनियां मेड इन इंडिया अभियान के तहत आधुनिक प्रौद्योगिकी से दक्ष होकर वर्ल्ड क्लास प्रोडक्ट किफायती व प्रतिस्पर्धी दरों पर बना रही हैं। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर भारत के मेक इन इंडिया प्रोडक्ट की धूम मच रही है।

निर्यात में एक साल में 17 प्रतिशत की वृद्धि

भारत ने जून 2022 में मेड इन इंडिया प्रोडक्ट के निर्यात में रिकार्ड कायम किया है। जून 2021 में जहां निर्यात 32.5 अरब डॉलर था वहीं जून 2022 में 37.9 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया। जून 2022 में निर्यात का यह आंकड़ा किसी एक माह में सर्वाधिक है। इसके साथ ही यह एक साल में 17 प्रतिशत की वृद्धि है। वर्ष 2021-22 में भारत ने 44 अरब डॉलर से अधिक राशि का एक्सपोर्ट किया और 2020-21 की तुलना में यह 41 प्रतिशत की वृद्धि है। 2020-21 की तुलना में कॉटन एक्सपोर्ट में 54 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई इसी तरह हथकरघा से बने कपड़े के निर्यात में 2020-21 की तुलना में 51 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

भारत के उत्पादों की मांग विश्व में बढ़ रहीः पीएम मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी ने 27 मार्च 2022 को मन की बात में कहा था कि देश के कोने-कोने से नए उत्पाद विदेश जा रहे हैं। चाहे वह असम के हैलाकांडी के चमड़े के उत्पाद हों या उस्मानाबाद के हथकरघा उत्पाद, बीजापुर के फल और सब्जियां, या चंदौली के काले चावल। सभी का निर्यात बढ़ रहा है। यह दर्शाता है कि भारत के उत्पादों की मांग विश्व में बढ़ रही है और हमारी सप्लाई चैन लगातार मजूबत हो रही है। अब आप दूसरे देशों में जाएंगे, तो मेड इन इंडिया प्रोडक्ट पहले की तुलना में कहीं ज्यादा नजर आएंगे। हमारे किसान, कारीगर, बुनकर, इंजीनियर, लघु उद्यमी, हमारा MSME सेक्टर, ढ़ेर सारे अलग-अलग प्रोफेशन के लोग, ये सब इसकी सच्ची ताकत हैं। इनकी मेहनत से ही 400 बिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट का लक्ष्य प्राप्त हो सका है और मुझे खुशी है कि भारत के लोगों का ये सामर्थ्य अब दुनिया के कोने-कोने में, नए बाजारों में पहुंच रहा है। जब एक-एक भारतवासी लोकल के लिए वोकल होता है, तब, लोकल को ग्लोबल होते देर नहीं लगती है।

चीन में भी बढ़ी मेड इन इंडिया प्रोडक्ट की मांग

एक समय था जब दुनियाभर में चीन के प्रोडक्ट का दबदबा था लेकिन अब चीन में भी मेड इन इंडिया प्रोडक्ट की मांग लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों से यह बात साफ हो जाती है। वर्ष 2021 में भारत से चीन को निर्यात वर्ष 2019 की तुलना में करीब 34 प्रतिशत बढ़कर 22.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2019 में यह आंकड़ा 17.1 अरब डॉलर रहा था। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2021 में भारत का चीन को निर्यात चीन से आयात की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ा है। भारतीय निर्यात संगठन महासंघ के उपाध्यक्ष खालिद खान ने कहा कि निर्यातकों के लिए चीन में निर्यात बढ़ाने की भरपूर संभावनाएं हैं। भारत के हैंडसेट निर्माण के 2022 में सालाना आधार पर 4 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।

रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया, 310 स्वदेशी हथियार बनाए जाएंगे

भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है। भारतीय तटरक्षक बल ने जून माह में गुजरात के पोरबंदर में मेड-इन-इंडिया एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (एएलएच) ध्रुव मार्क III के एक स्क्वाड्रन को सेवा में शामिल किया। इस स्क्वाड्रन को सेवा में शामिल किया जाना सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप समुद्री निगरानी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। भारतीय सेना ने लद्दाख क्षेत्र में अपनी क्षमता को बढ़ने के लिए मेड-इन-इंडिया इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल को शामिल किया है। यह वाहन लद्दाख सीमा पर सेना की गतिविधियों को बढ़ाने और सहायता पहुंचाने में तेजी लाने के लिए शामिल किए गए हैं। इन इन्फेंट्री कॉम्बैट वाहनों को लद्दाख की घाटियों में चलने के लिए खास तरह से बनाया गया है।

भारत को अब तक दुनिया के रक्षा उपकरणों के सबसे बड़े आयातक देश के तौर पर जाना जाता था, विश्व के आयातक देशों की सूची में भारत का स्थान सऊदी अरब के पश्चात दूसरा है। लेकिन हालिया दिनों में पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब भारत, रक्षा उपकरणों के निर्यात के मामले में दुनिया के शीर्ष 25 देशों की सूची में शामिल हो गया है। केंद्र सरकार ने 209 रक्षा उपकरणों की एक सूची भी बनाई है जिसके आयात को समयबद्ध तरीके से खत्म कर दिया जाएगा। भारत में ही निर्माण के लिए 460 से अधिक लाइसेंस जारी किए हैं। रक्षा उपकरणों का उत्पादन करने वाली कम्पनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकारी रक्षा कंपनियों को वित्तीय वर्ष 2023 तक अपने कुल राजस्व का 25 प्रतिशत हिस्सा, निर्यात के माध्यम से प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रक्षा क्षेत्र में पांच साल में 310 स्वदेशी हथियार बनाए जाएंगे। इसी के मद्देनजर मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए 310 रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक लगा दी है। इससे साबित होता है कि भारत रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर होने की ओर बढ़ रहा है।

‘मेड इन इंडिया’ स्मार्टफोन की निर्यात की योजना

मोबाइल फोन निर्माता कंपनी Vivo इस साल से ‘मेड इन इंडिया’ स्मार्टफोन का निर्यात शुरू करने की अपनी योजना की घोषणा की है। कंपनी का कहना है कि यह देश के लिए 7,500 करोड़ रुपये की प्रस्तावित विनिर्माण निवेश योजना के हिस्से के रूप में होगा। कंपनी की ओर से अपनी (Made in India Smartphone) विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए 2023 तक 3,500 करोड़ रुपये के निवेश को पूरा करने की संभावना है। Vivo ने कहा कि उसका लक्ष्य वार्षिक उत्पादन क्षमता को मौजूदा 5 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ स्मार्टफोन यूनिट करना है। इसके अलावा, वह चार्जर और डिस्प्ले जैसे घटकों (कंपोनेंट्स) की स्थानीय सोर्सिग को बढ़ाएगा। वीवो लगभग 1.4 लाख भारतीयों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्रदान करता है। कंपनी के प्रस्तावित 7,500 करोड़ रुपये के निवेश से लगभग 40,000 भारतीय रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। इस समय देश में 70,000 खुदरा विक्रेता और 30,000 से अधिक वीवो ब्रांड एंबेसडर हैं। स्मार्ट डिवाइस ब्रांड ओप्पो 2022 की पहली तिमाही में मेड इन इंडिया स्मार्टफोन शिपमेंट में अग्रणी के रूप में उभरा है। इसने 22 प्रतिशत (साल-दर-साल) की वृद्धि दर्ज की है। वैश्विक पुर्जो की कमी के बावजूद, स्थानीय स्मार्टफोन निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र लचीला बना रहा और ओप्पो ने शीर्ष पर उभरते हुए एक असाधारण प्रदर्शन प्रदर्शित किया, क्योंकि इसने स्मार्टफोन शिपमेंट का अधिकतम हिस्सा हासिल किया। ओप्पो भारत में अपनी निर्माण इकाई के साथ आत्मनिर्भर भारत पहल में भी योगदान दे रही है।

2022 की पहली तिमाही में स्मार्टफोन शिपमेंट 4.8 करोड़ यूनिट के पार

काउंटरपॉइंट की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, ‘मेड इन इंडिया’ स्मार्टफोन शिपमेंट में 2022 की पहली तिमाही में 7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। बाजार में स्मार्टफोन शिपमेंट 48 मिलियन (4.8 करोड़) यूनिट को पार कर गया। लोकल मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम पर सीनियर रिसर्च एनालिस्ट प्रचिर सिंह ने कहा कि भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रहा है। 2021 में, ‘मेड इन इंडिया’ स्मार्टफोन की शिपमेंट 190 मिलियन (19 करोड़) यूनिट को पार कर गई थी। भारत में स्मार्टफोन की बढ़ती मांग के साथ-साथ निर्यात में वृद्धि निरंतर वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए भारत सरकार की विभिन्न पहलों से भी समर्थन मिला है।

मेड इन इंडिया कार का विदेशों में बंपर डिमांड

भारत में बनीं कारों की विदेशों में अच्छी डिमांड है और मार्च 2022 में सबसे ज्यादा निर्यात की जानें वालीं कारों में मारुति सुजुकी की दो कारें मारुति डिजायर और मारुति स्विफ्ट टॉप 5 में रही। मारुति डिजायर सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट की गई कार रही, जिसकी कुल 6,578 कार विदेशों में भेजी गईं। इसके बाद मारुति स्विफ्ट का नंबर रहा, जिसकी कुल 4,962 कार एक्सपोर्ट की गई। तीसरे नंबर पर फॉक्सवैगन वेंटो रही, जिसकी कुल 4484 कार एक्सपोर्ट की गई। निसान सनी चौथे नंबर पर रही, जिसकी कुल 4280 कार एक्सपोर्ट की गई। पांचवें स्थान पर किआ सेल्टॉस रही, जिसकी कुल 3300 कार एक्सपोर्ट की गई।

भारत का विविध निर्यात पोर्टफोलियो

भारत का विविध निर्यात पोर्टफोलियो भारत की विनिर्माण क्षमताओं के साथ-साथ अत्याधुनिक सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों में वृद्धि को दर्शाता है। अप्रैल-मार्च 2020-21 की तुलना में अप्रैल-मार्च 2021-2022 के दौरान सकारात्मक वृद्धि दर्ज करने वाली प्रमुख वस्तुओं के निर्यात में पेट्रोलियम उत्पाद (152.1%), सूती धागे / कपड़े / मेडअप, हथकरघा उत्पाद आदि (55.1%), अन्य अनाज (52.2%), रत्न और आभूषण (49.6%), मानव निर्मित यार्न / फैब / मेडअप आदि (46.9%), इंजीनियरिंग सामान (45.5%), कॉफी (49%), इलेक्ट्रॉनिक सामान (40.5%), फ्लोर कवरिंग सहित जूट विनिर्माण (36.2%), चमड़ा और चमड़ा निर्माण (32.2%), कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन (32.0%), प्लास्टिक और लिनोलियम (31.1%), समुद्री उत्पाद (30.0%), सभी वस्त्रों का आरएमजी (29.9%), हस्तशिल्प खासकर हाथ से बने कालीन (22.0%) और अनाज की तैयारी तथा विविध संसाधित मद (21.9%) शामिल हैं।

मेड इन इंडिया पहल ने भारत के प्रोडक्ट को पहचान दी

‘मेड इन इंडिया’ पहल ने भारत में निर्मित उत्पादों को पहचान दी है। यह कार्यक्रम विदेशी निवेशको को आकर्षित नहीं करता साथ ही इसमें देश के उपलब्ध संसाधनों का पूर्णतः उपयोग नहीं होता है। यह घरेलू निर्माताओं को भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यमिता, और प्रौद्योगिकी जैसे उत्पादन कारकों का उपयोग करके देश में ही माल का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे भारतीय जनता के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों। इस कार्यक्रम से भारतीय स्वदेशी ब्रांडों को पहचान मिली है। यह घरेलू निर्माताओं को विदेशी उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा करने और अपने उत्पादों के मानक को बढ़ाने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

मेक इन इंडिया की शुरुआत

मेक इन इंडिया 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक पहल है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के मुद्दे से निपटने के लिए लांच की गई थी। इस पहल का उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए भारत को एक आकर्षक स्थान बनाने और विदेशी नीतियों की विभिन्न व्यापारिक बाधाओं को हटाकर आसानी से व्यापार करने के साथ-साथ विश्वसनीय व्यापार का वातावरण भी तैयार करना है। विदेशी निवेशकों को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के माध्यम से भारत की विनिर्माण क्षमता का उपयोग करने और देश को दुनिया भर में एक विश्वसनीय विनिर्माण स्थल बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इस योजना के प्रचार से देश को लाभ भी मिला और दुनिया भर की कंपनियों ने भारी निवेश किया जिससे भारत विनिर्माण कंपनियों के लिए एक केंद्र बन गया।

मेक इन इंडिया के लाभ

– मेक इन इंडिया पहल भारत की लगातार बढ़ती आबादी के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करती है।
– भारत के विभिन्न वाणिज्यिक उत्पादों के विनिर्माण केंद्र में रूपांतरण।
– उन क्षेत्रों और पड़ोसी स्थानों का विकास जहां उद्योगों की स्थापना की जाएगी।
– यह कार्यक्रम भारतीय अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ावा देगा क्योंकि विदेशी निवेश से आय की काफी बढ़ोत्तरी होगी।
– इस पहल के तहत एफडीआई अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व के खिलाफ रुपये को मजबूत करेगा।
– चूंकि दुनिया भर के देश नवीनतम तकनीक को साथ में लाएंगे, भारत को इसका उपयोग करने का अवसर मिलेगा क्योंकि यहां पर विभिन्न परीक्षण मशीनीकरण का अभाव है।
– इस पहल के तहत उद्योगों की स्थापना एवं ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करने में मदद करेगी।

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