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जल जीवन मिशनः पीएम मोदी की परिकल्पना हो रही साकार, देश के 51 प्रतिशत ग्रामीण घरों में पहुंचा नल से जल, महिलाओं को सिर पर पानी ढोने से मिली मुक्ति

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वर्ष 2024 तक देश के हर घर तक नल से स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना को साकार करने के लिए तीन साल से भी कम अवधि तथा कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन की दिक्कतों के बावजूद जल जीवन मिशन ने 6.44 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों तक नल से जल उपलब्ध करा दिया है। परिणामस्वरूप आज देश के करीब 10 करोड़ ग्रामीण घरों को नल से साफ पानी की आपूर्ति का लाभ मिल रहा है और इसके तहत अब तक 1.51 लाख गांवों में हर घर में नल से जल पहुंच चुका है। यही नहीं पीएम मोदी की दूरदर्शिता से ग्रामीण महिलाओं को सिर पर पानी ढोने से भी मुक्ति मिली है। जनता और खासतौर से महिलाओं तथा ग्रामीण समुदायों की सक्रिय भागीदारी की बदौलत, जल जीवन मिशन एक जन आंदोलन बन गया है। दीर्घकालीन पेयजल सुरक्षा, स्थानीय समुदाय और ग्राम पंचायतें एक साथ मिलकर यह काम कर रही हैं तथा वे सब मिलकर गांवों में जलापूर्ति प्रणालियों, अपने जल स्रोतों और इस्तेमालशुदा पानी के प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रही हैं। वर्ष 2024 तक हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता पूरी करने की दिशा में जल जीवन मिशन तेजी से काम कर रहा है।

15 अगस्त, 2019 को मिशन की घोषणा होने के वक्त भारत में 19.27 करोड़ ग्रामीण घरों में से केवल 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) घरों में ही पानी का कनेक्शन था। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की प्रधानमंत्री की परिकल्पना के तहत छोटी सी अवधि में ही 98 जिले, 1,129 प्रखंड, 66,067 ग्राम पंचायतें और 1,36,135 गांव ‘हर घर जल’ के दायरे में आ चुके हैं। गोवा, हरियाणा, तेलंगाना, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, पुदुच्चेरी, दादर एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव में हर ग्रामीण घर में नल से जलापूर्ति हो रही है। पंजाब (99 प्रतिशत), हिमाचल प्रदेश (92.4 प्रतिशत), गुजरात (92 प्रतिशत) और बिहार (90 प्रतिशत) जैसे कई अन्य राज्य भी 2022 में ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को पूरा करने के करीब हैं।

देश के 51 प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल से जल मिलने लगा

जल जीवन मिशन के अंतर्गत अब देश के 51.01 प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल से जल मिलने लगा है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह ग्रामीण भारत की नई, सुखमय कहानी है कि 51% से अधिक घरों में नल से शुद्ध पानी पहुंच गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि शुद्ध पेयजल हर गरीब का अधिकार है और पीएम मोदी जी दशकों से वंचित करोड़ों गरीबों को उनका अधिकार दे रहे हैं। इसी दिशा में यह एक अहम पड़ाव तय हुआ है। शेखावत ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल को जीवन के साथ-साथ एक मिशन भी निरूपित किया था। जल जीवन मिशन के राष्ट्रव्यापी संकल्प से तीन साल से भी कम समय में नल से हर घर जल का आंकड़ा 3.23 करोड़ से 9.80 करोड़ पर पहुंच गया। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने बताया कि मिशन शुरू होने के चंद महीने बाद कोरोना महामारी की चुनौती आ खड़ी हुई। इसके बावजूद देश के 6.56 करोड़ से अधिक नए ग्रामीण परिवारों में नल से जल की आपूर्ति सुनिश्चित कर दी गई है।

कई राज्यों में 100% नल कनेक्शन

शेखावत ने बताया कि गोवा, तेलंगाना, हरियाणा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पुडुचेरी, दमन व दीव और दादरा नगर हवेली ऐसे राज्य और केंद्रशासित प्रदेश हैं, जहां 100% कनेक्शन लगाए जा चुके हैं। गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार में 90% से अधिक ग्रामीण आवासों को नल कनेक्शन से जोड़ा जा चुका है। सिक्कम में 85% तो महाराष्ट्र, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, उत्तराखंड, आंध्रप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, त्रिपुरा और कर्नाटक में 50% से अधिक ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचने लगा है।

‘हर घर जल’ के लिए 3.60 लाख करोड़ आवंटित

पांच वर्षों की अवधि में हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने के इस भगीरथी कार्य को पूरा करने के लिये 3.60 लाख करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। केंद्रीय बजट 2022-23 में 3.8 करोड़ घरों तक नल से जल पहुंचाने के लिये ‘हर घर जल’ को 60,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई

वर्ष 2021-22 में राज्यों को 26,940 करोड़ रुपये आवंटित किये गये, जो ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थानों को जल तथा स्वच्छता सम्बंधी अनुदान दिये जाने की 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों से जुड़ा है। अगले पांच वर्षों, यानी 2025-26 तक के लिये 1,42,084 करोड़ रुपये के आश्वस्त वित्तपोषण का प्रावधान है। देश के ग्रामीण इलाकों में होने वाले इस भारी निवेश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था बढ़ रही है तथा आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। साथ ही गांवों में रोजगार के अवसर भी बन रहे हैं।

लद्दाख की दुर्गम पहाड़ियों पर भी पहुंचा नल से जल

लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर की दुर्गम पहाड़ियों तक नल से जल पहुंच चुका है। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने सोशल मीडिया पर लद्दाख का वीडियो शेयर किया था, जिसमें सुदूर पहाड़ी इलाकों में खच्चरों पर लादकर पानी की पाइप और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा था।

अमरनाथ यात्रियों को भी मिल रहा नल से जल

लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर की दुर्गम पहाड़ियों तक नल से जल पहुंचाने के साथ ही जल जीवन मिशन बाबा अमरनाथ के दर्शन करने जा रहे यात्रियों को संगम टॉप की 12,200 फीट ऊंचाई पर नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल की नियमित सेवा प्रदान कर रहा है।

15 अगस्त 2019 को हुआ था मिशन का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2019 को लालकिले की प्राचीर से जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। उन्होंने वर्ष 2024 तक देश के सभी 19.32 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से शुद्ध जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया। जल जीवन मिशन की घोषणा के समय देश में 3.23 करोड़ ग्रामीण आवासों में नल से जल की आपूर्ति हो रही थी। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मई 2022 में कहा था कि मिशन शुरू होने के कुछ महीने बाद कोरोना महामारी आ गई। इसके बाद भी हमने तीन साल से कम समय में देश के 6.34 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को जल की आपूर्ति सुनिश्चित की है।

पानी सिर पर ढोने से महिलाओं को मिली मुक्ति

पूर्व के जलापूर्ति कार्यक्रमों से हटकर, जल जीवन मिशन का पूरा ध्यान जल सेवा आपूर्ति के साथ ही जलापूर्ति अवसंरचना के निर्माण तक है। जल जीवन मिशन का मूलमंत्र है ‘कोई पीछे न छूट जाये,’ और इस तरह, वह सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर हर घर को नल से जल की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है। सदियों से घरों के लिये पानी ढोकर लाने के कठिन श्रम से माताओं और बहनों को मुक्ति दिलाने तथा उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में सुधार लाने के लिये जल जीवन मिशन निरंतर प्रयास कर रहा है। मिशन ग्रामीण परिवारों के लिये जीवन को सुगम बना रहा है तथा उन्हें गौरव और सम्मान के साथ जीने का अवसर दे रहा है।

यूपी के 36 लाख घरों में नल के कनेक्शन से मिलने लगा शुद्ध पेयजल

यूपी में इस गर्मी से ढाई करोड़ से अधिक आबादी को बड़ी राहत मिली है। इतनी बड़ी आबादी को शुद्ध पानी मिलने लगा है। योजना से अकेले विंध्य और बुंदेलखंड के नौ जिलों को जोड़ कर लाभ दिया जा रहा है। ‘हर घर नल-हर घर जल’ के संकल्प को पूरा करते हुए जल शक्ति विभाग ने अब तक यूपी के 36 लाख घरों में नल के कनेक्शन पहुंचा दिए हैं। इस गर्मी प्रदेश की 2 करोड़ 51 लाख से अधिक आबादी को शुद्ध पीने का पानी मिलने से बड़ी राहत मिली है। योजना से अकेले विंध्य और बुंदेलखंड के नौ जिलों में 18.67 लाख घरों को पाइप्ड पेयजल से जोड़ दिया गया है। साथ ही 57.62 लाख घरों में योजना का लाभ दिए जाने का कार्य चल रहा है। बुंदेलखंड और विंध्य में हर घर नल की 63 परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इन दोनों क्षेत्रों की कुल 3895 ग्राम पंचायतों और 6831 गांवों के घर-घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचने की तैयारी है।

पीने का शुद्ध पानी नहीं मिलने से बुंदेलखंड और विंध्य में फैलता था बीमारियों का प्रकोप

हर घर नल योजना से बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, महोबा और विंध्य क्षेत्र के मिर्जापुर और सोनभद्र में पुरानी योजनाओं को नए सिरे से शुरू किया गया है। इसमें रेट्रोफिटिंग के तहत अब तक 102445 से अधिक फंक्शनल हाउसहोल्ड टैब कनेक्शन दिए गए हैं, जिनसे लगभग 512,225 से अधिक लोगों को नल से शुद्ध पेयजल मिलने लगा है। पीने का शुद्ध पानी नहीं मिलने से बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्रों में गर्मी शुरू होते ही जलजनित बीमारियों का प्रकोप फैल जाता था। हर घर नल योजना के तहत इन क्षेत्रों में बीमारी से प्रभावित क्षेत्रों में जारी योजनाओं का 65 प्रतिशत काम पूरा कराया गया है। 28008 से अधिक घरों तक फंक्शनल हाउसहोल्ड कनेक्शन दिए गए हैं जिससे लगभग 140,040 से अधिक लोगों शुद्ध पेयजल का लाभ दिया जा रहा है।

स्वच्छ पेयजल से इंसेफेलाइटिस का इलाज

विशेषज्ञों के मुताबिक जापानी इंसेफेलाइटिस की बीमारी कई कारणों से होती है, लेकिन इसके असर को कम करने के लिए बेहतर स्वच्छता और स्वच्छ पेयजल आवश्यक है क्योंकि कुपोषण की एक वजह दूषित पानी है। जब कुपोषित बच्चे जापानी इंसेफेलाइटिस से पीड़ित होते हैं, तो उन्हें या तो ठीक होने में अधिक समय लगता है या उनके बचने की संभावना कम होती है। अब मोदी सरकार के प्रयासों से जब घरों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति हो रही है, तो बच्चों को इस बीमारी से बचाने और उन्हें नई जिंदगी देने में मदद मिलेगी।

17 लाख से अधिक स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों को नल से मिलने लगा पानी

देश के स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य और कुशलता के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 100 दिवसीय अभियान की घोषणा की थी, जिसे जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने दो अक्टूबर, 2020 को शुरू किया था। इसके तहत फरवरी 2022 तक देश के 8.46 लाख (82 प्रतिशत) स्कूलों और 8.67 लाख (78 प्रतिशत) आंगनवाड़ी केंद्रों में पीने तथा मध्याह्न भोजन बनाने, हाथ धोने और शौचालयों में इस्तेमाल करने के लिये नल से जल की आपूर्ति की जा रही है। देशभर के स्कूलों में 93 हजार वर्षाजल संरक्षण सुविधायें और पानी को दोबारा इस्तेमाल योग्य बनाने के लिये 1.08 लाख संरचनायें विकसित की गई हैं।

14 राज्यों के प्रत्येक स्कूल में नल से जल की व्यवस्था

अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, आंध्रप्रदेश, दादर एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, कर्नाटक, केरल, पुदुच्चेरी, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तराखंड ने प्रत्येक स्कूल में नल से जल की व्यवस्था कर ली है। केंद्र सरकार ने राज्यों से आग्रह किया है कि वे बाकी बचे स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में जल्द से जल्द साफ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करें, ताकि बच्चों के लिये बेहतर स्वास्थ्य, स्वच्छता और साफ-सफाई की व्यवस्था बन सके।

देशभर में 4.69 लाख पानी समितियों का गठन

जल जीवन मिशन ‘सोपान’ (बॉटम-अप) दृष्टिकोण का पालन करता है, जहां समुदाय योजना बनाने से लेकर उसे कार्यान्वित करने, प्रबंधन, संचालन और रख-रखाव के काम में अहम भूमिका निभाते हैं। इसे प्राप्त करने के लिये ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्लूएससी) /पानी समिति का गठन किया जा रहा है तथा उन्हें मजबूत बनाया जा रहा है। समुदाय की सहभागिता से ग्रामीण कार्य-योजना विकसित की गई है, कार्यान्वयन समर्थन एजेंसियों को साथ लाया गया, ताकि कार्यक्रम के क्रार्यान्वयन में ग्रामीण समुदायों का समर्थन किया जा सके तथा लोगों में जागरूकता पैदा की जा रही है। अब तक देशभर में 4.69 लाख पानी समितियों का गठन किया गया है और 3.81 लाख ग्राम कार्य-योजनायें विकसित की गई हैं। समुदाय जल सुविधा का कारगर प्रबंध कर सकें, इसकी क्षमता पैदा करने के लिये जल जीवन मिशन कार्यान्वयन समर्थन एजेंसियों, 104 प्रमुख संसाधन केंद्रों और सेक्टर साझीदारों की मदद से क्षमता निर्माण कार्यक्रम चला रहा है तथा देश भर में जल-क्षेत्र में काम कर रहा है।

नौ पैमानों पर होती है पानी की जांच

जल जीवन मिशन के तहत जल गुणवत्ता निगरानी और सतर्कता गतिविधियों को उच्च प्राथमिकता दी जा रही है। हर गांव की पांच महिलाओं को हर तरह के अशुद्ध जल की जांच करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसके लिये फील्ड टेस्ट किट का इस्तेमाल होता है। इन किटों को पंचायतों को सौंपा जाता है। किटों की मदद से नौ पैमानों पर पानी की जांच होती है, जैसे पीएच, एल्केलाइन, क्लोराइड, नाइट्रेट, पानी में सख्तपन, फ्लोराइड, आयरन, अंश रहित क्लोरीन और एच2एस (हाइड्रोजन सल्फाइड)। इन किटों के जरिये 9.13 लाख से अधिक महिलाओं को जल की शुद्धता की जांच करने के लिये प्रशिक्षित किया जा चुका है।

पानी की जांच के लिए देश में 2,022 प्रयोगशालाएं

देश में पानी की जांच करने के लिये 2,022 प्रयोगशालायें हैं। इनमें से 454 प्रयोगशालायें एनएबीएल (NABL- National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) से मान्यता-प्राप्त हैं। देश में पहली बार, जल जांच प्रयोगशालाओं को आम लोगों के लिये खोल दिया गया है, ताकि वे मामूली दरों पर अपने पानी के नमूनों की जांच करवा सकें। कई राज्यों को मोबाइल वैन भी दिये गए हैं ताकि वे दूर-दराज के गांवों में पानी के नमूनों की जांच कर सकें।

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