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मोदी राज में 454.49 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा विदेशी मुद्रा भंडार

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था की मजबूती की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। जिसकी वजह से विदेशी निवेशकों का विश्वास मोदी सरकार पर बना हुआ है। जिसका सकारात्मक परिणाम भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार बढ़ोतरी के रूप में दिखाई दे रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को बताया कि 13 दिसंबर को समाप्‍त सप्‍ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार 1.07 अरब डॉलर बढ़कर 454.492 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड स्‍तर पर पहुंच गया। इससे पिछले सप्‍ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 2.342 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 453.422 अरब डॉलर पर पहुंचा था।

स्‍वर्ण भंडार के मूल्‍य में बढ़ोतरी

आरबीआई के मुताबिक समीक्षाधीन सप्‍ताह के दौरान देश के स्‍वर्ण भंडार का मूल्‍य 11 करोड़ डॉलर बढ़कर 26.968 अरब डॉलर हो गया। इसके अलावा अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष के साथ देश का विशेष निकासी अधिकार का मूल्‍य भी 20 लाख डॉलर बढ़कर 1.444 अरब डॉलर हो गया। इसी प्रकार आईएमएफ के पास देश के आरक्षित मुद्रा भंडार का मूल्‍य भी 1.4 करोड़ डॉलर की वृद्धि के साथ 3.658 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

एक नजर डालते हैं उन संकेतों पर, जिनसे साफ जाहिर होता कि मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही है।

 नवंबर में हुआ 22,872 करोड़ का एफपीआई निवेश

मोदी सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर और अनुकूल आर्थिक परिस्थितियों के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने नवंबर महीने में घरेलू पूंजी बाजार में 22,872 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने एक नवंबर से 29 नवंबर के दौरान ऋणपत्रों से 2,358.2 करोड़ रुपये निकाले, जबकि इक्विटी में उन्होंने 25,230 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस तरह वे 22,871.8 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे। इससे पहले एफपीआई ने घरेलू पूंजी बाजार में अक्टूबर में 16,037.6 करोड़ रुपये और सितंबर में 6,557.8 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था।

अक्टूबर, 2019 में 3.31 अरब डॉलर रहा पीई-वीसी निवेश

पीई-वीसी निवेश यानी प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश में स्थिरता बनी हुई है। मूल्य और मात्रा के हिसाब से अक्टूबर में उद्यम-पूंजी निवेश 91 सौदों में 3.31 अरब डॉलर रहा है। सौदों पर परामर्श देने वाली कंपनी ईवाई के अनुसार सितंबर में 98 सौदों में निजी इक्विटी और उद्यम पूंजी कोषों का निवेश 3.74 अरब डॉलर रहा था। अक्टूबर, 2018 में यह आंकड़ा 64 सौदों में 3.33 अरब डॉलर का रहा था। ईवाई के मुताबिक मोदी सरकार की नीतियों की वजह से ही पीई-वीसी गतिविधियों ने लगातार तीन अरब डॉलर के मासिक ‘रन रेट’ को कायम रखा है। यह चालू चाल के पहले दस महीनो में 16.5 अरब डॉलर बढ़कर 43.7 अरब डॉलर पर पहुंच गई हैं।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन वृद्धि भारत में होगी

जहां कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, वहीं कर्मचारियों की सैलरी भी निरंतर बढ़ रही है। प्रमुख वैश्विक एडवाइजरी, ब्रोकिंग और सोल्यूशंस कंपनी विलिस टॉवर्स वॉटसन की ताजा तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 में कर्मचारियों के वेतन में रिकॉर्ड 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ये वेतन वृद्धि पूरे एशिया-पैसिफिक में सबसे अधिक होगी। विलिस टॉवर्स वॉटसन ने अपनी यह रिपोर्ट विभन्न औद्योगिक क्षेत्रों और कंपनियों की प्रगति का अध्ययन और सर्वे करने के बाद तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में वेतन वृद्धि 8 प्रतिशत, चीन में 6.5 प्रतिशत, फिलीपींस में 6 प्रतिशत और हांगकांग व सिंगापुर में 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। जाहिर है कि मोदी सरकार की सफल आर्थिक नीतियों की वजह से ही इस वर्ष भारत में औसत वेतन वृद्धि 9 प्रतिशत से अधिक रही।

आईएमएफ को भरोसा, वैश्विक अर्थव्यवस्था की अगुवाई करेगा भारत

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने कहा है कि भारत की अगुवाई में दक्षिण एशिया वैश्विक वृद्धि का केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है और 2040 तक वृद्धि में इसका अकेले एक-तिहाई योगदान हो सकता है। आईएमएफ के हालिया शोध दस्तावेज में कहा गया कि बुनियादी ढांचे में सुधार और युवा कार्यबल का सफलतापूर्वक लाभ उठाकर यह 2040 तक वैश्विक वृद्धि में एक तिहाई योगदान दे सकता है। आईएमएफ की एशिया एवं प्रशांत विभाग की उप निदेशक एनी मेरी गुलडे वोल्फ ने कहा कि हम दक्षिण एशिया को वैश्विक वृद्धि केंद्र के रूप में आगे बढ़ता हुए देख रहे हैं।

अगले साल 7 प्रतिशत हो जाएगी विकास दर- आईएमएफ

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने पिछले दिनों देश की अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा कि अगले साल भारत की आर्थिक वृद्धि दर सुधरकर 7 प्रतिशत पर पहुंच जाने का अनुमान है। आईएमएफ के एशिया प्रशांत विभाग के उप-निदेशक जोनाथन ओस्ट्री ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर अगले वित्त वर्ष (2020-21) में सात प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है। चालू वित्त वर्ष में इसके 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। मौद्रिक नीति प्रोत्साहन जैसे उपायों से आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि हाल में कर कटौती, सरकार के वित्तीय क्षेत्र में समस्याओं को दूर करने के लिये उठाये गये कदमों तथा विभिन्न क्षेत्रों को समर्थन देने के उपायों से निकट भविष्य में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में सुधार की उम्मीद है।

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