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देखिए! खान मार्केट गैंग के सरदार प्रशांत भूषण का दोगलापन

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देश में PIL का संगठित गिरोह चलाने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण और उनका खान मार्केट गैंग सदमे में है। ऐसा सदमा लगा है कि पूरा गैंग ही सोशल मीडिया पर संविधान, सुप्रीम कोर्ट और सरकार के खिलाफ उतर आया है। एक से एक भड़काऊ बयान विडियो और शब्दों के माध्यम से फैलाए जा रहे हैं। सदमे में गैंग सन्निपात की स्थिति में आ गया है। गैंग को सदमा सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त को सुनाए फैसले में प्रशांत भूषण को सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया है औऱ इस दोष की सजा 20 अगस्त को तय करेगा।

आज तक प्रशांत भूषण ने अनगिनत बार लोगों पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का दोष मढ़ा है। लेकिन अपने को देव तुल्य मानते हैं, औऱ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करना अपना प्राकृतिक अधिकार समझते हैं। प्रशांत भूणण द्वारा पोस्ट किए गए Tweets इस दोगलेपन को स्पष्ट करता है-

09 मई 2017
जस्टिस कन्नन को अवमानना में सजा मिलने पर प्रसन्न हुए।

14 नवंबर 2017
प्राइवेट मेडिकल कालेजों के खिलाफ PIL पर अवमानना की मांग को उठाया

21 अगस्त 2018
उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की कार्यवाई करने की मांग की।

29 अक्टूबर 2018
को सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव द्वारा मोईन मामले में जांच को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बताया।

01 फरवरी 2019
अंतरिम सीबीआई निदेशक नागेश्वर राव की नियुक्ति को प्रधानमंत्री द्वारा सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बताया।

20 फरवरी 2019
अनिल अंबानी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना का दोषी पाये जाने पर खुशी
जाहिर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथी साथ यह कैसे संभव है?

06 मार्च 2019
राफेल के मामले में चोरी के कागज को सुप्रीम कोट में दिए जाने पर सरकार ने याचिका कार्ताओं के खिलाफ Official Secreats Act में कार्यवाई करने की मंशा पर, पर कहा कि याचिकाकर्ताओं को धमकाना सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है।

लेकिन  प्रशांत भूषण उन मठाधीशों में से एक हैं जो अपने गैंग के लोगों पर हुई अवमाननना कार्यवाई का हमेशा से विरोध किया
11 मार्च 2019
न्यायालय ने शिलांग टाइम्स के संपादक को अवमानना का नोटिस दिया तो उसका विरोध किया

यही नहीं, प्रशांत भूषण हमेशा से जम्मू कश्मीर में जनमत संग्रह का एजेंडा चलाते रहे हैं और जब जम्मू-कश्मीर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की अवमानना अमेरिका की एक पत्रिका करती है फिर भी उसका समर्थन करते है।

04 अक्टूबर 2019
The Economist द्वारा सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का समर्थन किया

प्रशांत भूषण, जिस तरह से लगातार बिना रुके सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करते आ रहे थे, उसके लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है। प्रशांत भूषण को भी अपनी लक्ष्मण रेखा खींचने का समय आ गया है।

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