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भारतीय कॉफी की विदेशों में मांग बढ़ी, मोदी काल में निर्यात 90 फीसदी बढ़ा

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भारत कॉफी उत्पादन में दुनिया के टॉप 10 देशों में शुमार है। हाल के वर्षों में विदेशों में भारतीय कॉफी की मांग बढ़ गई है। अब दुनिया के कई हिस्से में लोग सुबह उठने के बाद भारतीय कॉफी का आनंद लेकर अपने दिन की शुरुआत करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए जा रहे उपायों के असर की वजह से आज भारत हर सेक्टर में दमदार प्रदर्शन कर रहा है। मोदी काल में कॉफी निर्यात में 90 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल-जून 2013-14 में भारत से 979 करोड़ रुपये का कॉफी निर्यात किया गया था जबकि अप्रैल-जून 2022-23 में 1,864 करोड़ रुपये का कॉफी निर्यात किया गया। यही नहीं भारतीय कॉफी उद्योग को बढ़ावा देने की वजह से देश के कॉफी निर्यात में पिछले साल (2021-22) 42 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

भारत से 2 लाख टन से अधिक कॉफी का निर्यात

कॉफी बोर्ड के अनुसार, एशिया के तीसरे सबसे बड़े उत्पादक और निर्यातक भारत से कॉफी शिपमेंट चालू कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही में 19 प्रतिशत बढ़कर 2,24,293 टन हो गया। एक साल पहले की अवधि में देश ने 1,88,736 टन निर्यात किया था। इस अवधि के दौरान इटली, जर्मनी और बेल्जियम भारतीय कॉफी के प्रमुख निर्यात गंतव्य थे।

कॉफी की रोबस्टा और अरेबिका किस्म

भारत इंस्टेंट कॉफी के अलावा रोबस्टा और अरेबिका दोनों किस्मों का निर्यात करता है। बोर्ड के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-जून 2022 के दौरान रोबस्टा कॉफी का शिपमेंट 39.43 फीसदी बढ़कर 1,32,852 टन हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 95,280 टन था। इसी तरह इंस्टेंट कॉफी की शिपमेंट 24 फीसदी बढ़कर 15,858 टन हो गई, जो एक साल पहले की अवधि में 12,794 टन थी।

कोविड काल में निर्यात में आई थी गिरावट

भारत ने 2020-21 में लगभग 720 मिलियन डॉलर मूल्य की कॉफी का निर्यात किया, जिसमें से रोबस्टा कॉफी बीन्स का निर्यात 42 प्रतिशत था। कॉफी के निर्यात में आई गिरावट की मुख्य वजह COVID-19 महामारी थी। कोविड काल में मार्च 2020 में ग्रीन कॉफी बीन्स की शिपमेंट पर काफी प्रभाव पड़ा था, क्योंकि इसी दौरान रोबस्टा कॉफी की कटाई की जाती है और निर्यात के लिए सही अवधि माना जाता है।

मांग में सुधार होने के बाद कॉफी निर्यात 28 प्रतिशत बढ़ा

कोविड महामारी से ऊबरने के बाद कॉफी पीने वाले देशों में मांग में सुधार आया जिसके कारण 2021 में भारतीय कॉफी निर्यात में 28% की वृद्धि हुई। कॉफी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष निर्यात 395,716 टन तक पहुंच गया। यह पिछले एक दशक में सबसे अधिक आंकड़ा के रूप में दर्ज किया गया था।

भारत टॉप 10 कॉफी उत्पादक देशों में

भारत 2020 में वैश्विक उत्पादन के लगभग 3% के साथ शीर्ष 10 कॉफी उत्पादक देशों में शामिल रहा। भारतीय कॉफी अपनी उच्च गुणवत्ता के कारण दुनिया में सबसे अच्छी कॉफी में से एक है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उच्च प्रीमियम प्राप्त करती है। भारत दो प्रकार की कॉफी का उत्पादन करता है: अरेबिका और रोबस्टा। हल्के सुगंधित स्वाद के कारण अरेबिका का बाजार मूल्य रोबस्टा कॉफी से अधिक है। रोबस्टा कॉफी का उपयोग मुख्य रूप से अपने स्वाद के कारण विभिन्न मिश्रणों को बनाने में किया जाता है। कुल उत्पादन में रोबस्टा कॉफी की हिस्सेदारी 72% है।

कॉफी उद्योग में 20 लाख लोगों को रोजगार

यह उद्योग भारत में करीब 20 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है। चूंकि कॉफी मुख्य रूप से भारत के लिए एक निर्यात वस्तु है, घरेलू मांग और खपत कॉफी की कीमतों को बहुत अधिक प्रभावित नहीं करते हैं।

कर्नाटक में होती है सबसे ज्यादा कॉफी

कॉफी का उत्पादन मुख्यतः भारत के दक्षिणी भाग में होता है। कर्नाटक भारत में कुल कॉफी उत्पादन का लगभग 70% उत्पादन करता है और इस तरह वह कॉफी का सबसे बड़ा उत्पादक है। केरल कॉफी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जो कुल उत्पादन का लगभग 23% है। तमिलनाडु तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जहां भारत का 6% कॉफी का उत्पादन होता है। तमिलनाडु की लगभग आधी कॉफी नीलगिरि जिले में बनाई जाती है, जो अरेबिका उगाने वाला एक प्रमुख क्षेत्र है। उड़ीसा और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में उत्पादन का अनुपात कम है।

भारत इंस्टेंट कॉफी का भी निर्यातक

भारत प्रमुख रूप से रोबस्टा कॉफी बीन्स का निर्यात करता है, जो अरेबिका कॉफी की तुलना में कम अम्लता और उच्च कड़वाहट वाली कॉफी बीन प्रजाति है। ग्रीन कॉफी बीन्स के अलावा, तैयार कॉफी (जिसमें से 31 फीसदी इंस्टेंट कॉफी है) का भी भारत के निर्यात बास्केट में महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के कुल कॉफी निर्यात का लगभग एक तिहाई इंसटेंट कॉफी है। हाल के वर्षों में भारत की स्पेशल कॉफी एक लोकप्रिय उत्पाद बन गई है, जो वैश्विक स्तर पर कॉफी को चाहने वाले लोगों में दिलचस्पी पैदा कर रही है। स्पेशल कॉफी को सावधानीपूर्वक खेती के तरीकों, एक स्पष्ट उत्पत्ति, तोड़ने की कला और ब्रांडिंग, हैंडलिंग के द्वारा तैयार किया जाता है।

भारत मात्रा के हिसाब से कॉफी का आठवां सबसे बड़ा निर्यातक

खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के आंकड़ों के अनुसार, भारत मात्रा के हिसाब से कॉफी का आठवां सबसे बड़ा निर्यातक है। देश अपने उत्पादन का 70% से अधिक निर्यात करता है। 2021-22 में, कुल निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 42% बढ़कर 1.04 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। मार्च 2022 में, कॉफी के निर्यात का मूल्य 114.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो फरवरी 2022 से 22% की वृद्धि है। कॉफी के निर्यात में यह मजबूत वृद्धि कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे प्रमुख राज्यों में कॉफी उत्पादकों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है।

भारत से 50 देशों में कॉफी का निर्यात

भारत दुनिया भर के 50 से अधिक देशों में कॉफी का निर्यात करता है। इटली, जर्मनी, बेल्जियम और रूस भारत से कॉफी के सबसे बड़े आयातक हैं, जिनकी औसत कुल हिस्सेदारी लगभग 45% है। अन्य कॉफी आयात करने वाले देश लीबिया, पोलैंड, जॉर्डन, मलेशिया, अमेरिका, स्लोवेनिया और ऑस्ट्रेलिया हैं। भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार इटली है जहां कॉफी निर्यात का 20% हिस्सा है। यूरोप, जहां लोग रोबस्टा मिश्रण के अधिक कड़वे और मजबूत स्वाद पसंद करते हैं, भारत के निर्यात का 42% हिस्सा है। अरेबिका कॉफी मिश्रण की मध्य पूर्व क्षेत्र से उच्च मांग है।

सरकार की पहल, कॉफी पर सब्सिडी

भारत सरकार ने पारंपरिक क्षेत्रों में कॉफी विकसित करने के लिए किसानों को 2,500 अमेरिकी डॉलर से 3,500 अमेरिकी डॉलर प्रति हेक्टेयर के बीच सब्सिडी प्रदान करने की पहल की है। योजनाओं के तहत जल संवर्धन, उपकरण, विपणन और प्रचार के लिए अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। सरकार कॉफी विकास कार्यक्रमों (सीडीपी) के तहत गैर-पारंपरिक कॉफी उगाने वाले क्षेत्रों का भी समर्थन करती है। इसके अतिरिक्त, आदिवासी विकास की राष्ट्रीय नीति के अनुसार, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में कॉफी की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन पहलों के तहत निर्यात आय को अधिकतम करने में मदद करने के लिए पारगमन और माल ढुलाई सहायता प्रदान की जाती है।

निर्यात प्रोत्साहन योजना – निर्यात प्रोत्साहन प्रदान करना

इस योजना का उद्देश्य महत्वपूर्ण उच्च मूल्य वाले अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मूल्य वर्धित कॉफी और उच्च मूल्य कॉफी की बाजार हिस्सेदारी को बढ़ाकर निर्यात आय को अधिकतम करना है। सरकार अलग-अलग क्षेत्र एवं अलग-अलग कॉफी की किस्म के लिए भी निर्यात प्रोत्साहन प्रदान करती है।

भारत के पूर्वी एवं पश्चिमी घाट में कॉफी

भारत में कॉफी पूर्वी एवं पश्चिमी घाट के संवेदनशील पर्यावरणिक क्षेत्र में छायादार पेड़ों के नीचे उपजाई जाती है। यह विश्व के 25 मह्त्वपूर्ण जैवविविधता के क्षेत्रों में से एक है। कॉफी न केवल इस क्षेत्र की अनोखी जैवविविधता को बनाए रखने के लिए सहायता प्रदान करती है बल्कि सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों के सामाजिक व आर्थिक विकास के लिए भी अपना योगदान देती है।

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