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उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिल्ली बीजेपी का मत प्रतिशत, बीजेपी के साथ हमेशा जुड़े रहे वोटर

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दिल्ली में 1993 के बाद से अब तक सात बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें हार-जीत भले ही किसी की भी रही हो, लेकिन वोट का गणित हमेशा दिलचस्प रहा। 15 साल तक सत्ता संभालने वाली शीला दीक्षित सरकार हो या 2015 में अब तक का सबसे अधिक वोट पाने वाली केजरीवाल सरकार,  बीजेपी वोटरों को अपने साथ जोड़े रखने में कामयाब रही है। इसकी पुष्टि 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिले मत प्रतिशत से होती है, जिसमें पिछले 27 सालों में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।  

2020 में बीजेपी के मत प्रतिशत में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी सीटों की संख्या तीन से बढ़ाकर आठ की है। बीजेपी को दिल्ली में 38.5 प्रतिशत मिले हैं, जो 2015 की तुलना में छह प्रतिशत ज्यादा है। दिल्ली बीजेपी के प्रमुख मनोज तिवारी ने मंगलवार को कहा कि पार्टी इस बात की समीक्षा करेगी कि वह अपनी उम्मीदों को हासिल करने में क्यों विफल रही। हालांकि उन्हें इस बात में नैतिक जीत नजर आई कि पार्टी का मत प्रतिशत 2015 की तुलना में बढ़ गया है।

मनोज तिवारी ने कहा, ‘दिल्ली ने सोच समझकर जनादेश दिया होगा। हमारा मत प्रतिशत 32 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गया। दिल्ली ने हमें खारिज नहीं किया। हमारे मत प्रतिशत में वृद्धि हमारे लिए एक अच्छा संकेत है।’

1998 से 2015 तक लगभग स्थिर रहा वोट बैंक 

1993 के चुनावों को छोड़ दें तो 1998 से लेकर 2015 तक विधानसभा चुनाव में बीजेपी का वोट बैंक लगभग स्थिर रहा। बीते 22 सालों में दिल्ली बीजेपी का वोट बैंक 32 से 36 फीसदी के बीच ही रहा। 1998 में पार्टी को 34.02 फीसदी वोट मिले। 2003 में 35.22, 2008 में 36.34, 2013 में 33 और 2015 के चुनाव में 32.3 फीसदी वोट मिले थे।

1993 में बीजेपी को मिला था 42 प्रतिशत वोट

दिल्ली नगर निगम और लोकसभा चुनाव में भले ही बीजेपी ने कई बार जीत के परचम लहराए हो, लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी को अब तक सिर्फ एक बार ही 40 फीसदी से ज्यादा वोट मिला है। वर्ष 1993 में मदनलाल खुराना की सरकार में बीजेपी को 42.82 फीसदी वोट मिले थे। 

तेज से गिरा कांग्रेस का मत प्रतिशत, बीजेपी ने संभाला

1993 से 2008 तक के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर थी, लेकिन 2013 में AAP की एंट्री ने दिल्ली के सियासी गणित में काफी बदलाव लाया। अरविंद केजरीवाल के उदय के बाद 2013 और 2015 के विधानसभा चुनाव परिणामों पर गौर करें तो कांग्रेस का वोट प्रतिशत काफी तेजी से नीचे गिरा, जबकि बीजेपी ने 2013 के चुनाव में 3.4 फीसदी वोट का गोता खाने के बाद 2015 के चुनाव में अपने वोट बैंक को संभाला। 

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