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पढ़िए, टेलीग्राफ अखबार के येलो जर्नलिज्म के ये 7 सबूत

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मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। भारतीय संविधान द्वारा भारतीय मीडिया को दी गई स्वतंत्रता की प्रशंसा पूराी दुनिया में होती है, लेकिन कुछ मीडिया हाउस खुले तौर पर येलो जर्नलिजम कर देश और सरकार की साख को बट्टा लगा रही है। परफॉर्म इंडिया सबूतों के साथ आपको बता रहा है कि कैसे अंग्रेजी अखबार ‘टेलीग्राफ’ खबरों को गलत तरीके से पेश कर भारत की छवि को देश-दुनिया में नुकसान पहुंचा रहा है।    

सबूत नंबर-1 

11 फरवरी को दिल्ली विधानसभा के नतीजे सामने आने के बाद टेलीग्राफ ने CURRENTJRIWAL शीर्षक से मुख्य पृष्ठ पर खबर लगाई। इस खबर में पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को करंट लगते हुए कार्टून छाप कर कहा गया कि नफरत की राजनीति का अंत। खबर को अमित शाह के चुनाव के दौराान दिए बयान को प्रमुखता से स्थान दिया गया लेकिन दिल्ली चुनाव के दौरान दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया द्वारा शाहीन बाग और टुकड़े टुकड़े वाले बयान को नजरअंदाज कर दिया गया। 

सबूत नंबर-2

11 दिसंबर को राज्यसभा से नागरिकता संशोधन कानून बिल पास होने के बाद टेलीग्राफ अखबार ने निगेटिव खबर छापकर मुख्य पृष्ठ पर OUR TRYST WITH THE DARK AGES शीर्षक दिया। इस खबर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पूर्वोतर राज्यों में हिंसा और भाजपा के सहयोगी दलों में बेचैनी के बारे में लिखा गया।  

सबूत नंबर-3 

अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टेलीग्राफ ने 10 नवंबर को हेडलाइन IN THE NAME OF RAM, THE SITE IS NOW HINDU STHAN लगाई। कोर्ट के फैसले के बाद अखबार ने रिपोर्ट में शनिवार को फैसला सुनाने को लेकर कमेंट किया, क्योंकि शनिवार को छुट्टी होती है। इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि यह पहली बार है कि किसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश ने किसी राज्य के चीफ सेक्रेटरी और पुलिस डायरेक्टर जनरल से मुलाकात की। इसके साथ फैसले के बाद पांच जजों के एक फाइव स्टार होटल में डिनर करने की भी बात लिखी गई। 

सबूत नंबर-4

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 A हटाने के बाद मोदी सरकार के फैैसले का देशभर में स्वागत हुआ, लेकिन कोलकाता से छपने वाला अखबार टेलीग्राफ ने मुख्य पृष्ठ पर PARTITION नाम से खबर लगाई। इस खबर में रामचंद्र गुहा जैसे लोगों के जरिए केंद्र सरकार के फैसले की गलत ठहराने की कोशिश की गई। हेडलाइन का शीर्षक PARTITION of minds and state, this time by the largest democracy on the planet, without asking J&K से लगाया गया।  

सबूत नबंर-5 

झारखंड चुनाव के बाद टेलीग्राफ अखबार ने Hemant unseats BJP शीर्षक से खबर लगाई। बेंगलुरू में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध मार्च के साथ इस खबर की हेडलाइन The day thousands resolved not to submit documents and Jharkhand denied Modi-Shah a chance to divert attention बनाई गई। जिसका ये मतबल निकलता है कि झारखंड के लोगों ने सीएए कानून के खिलाफ वोटिंग कर बीजेपी को सत्ता से बेदखल कर दिया। 

सबूत नबंर-6  

टेलीग्राफ के येलो जर्नलिज्म का एक और उदाहरण यह है कि हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे पर अखबार ने हेडलाइन ABROGATTED ARROGANCE 370 से हेडलाइन लगाई। अखबार ने लिखा है कि आर्थिक राजधानी यानि मुंबई में भाजपा पूरी तरह विखर गई, हालांकि महाराष्ट्र चुनाव में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिला लेकिन इसके बावजदू अखबार ने इस तरह खबर लगाई। 

सबूत नंबर-7

31 जुलाई 2019 को राज्यसभा से तीन तलाक बिल पास हुआ लेकिन टेलीग्राफ अखबार ने इस खबर को कोई महत्व नहीं दिया। इसके बदले Cafe Coffee Day founder missing खबर लगाई गई और तीन तलाक पर एक छोटी खबर बनाकर अखबार ने अपने काम का इतिश्री कर लिया। 

 

 

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