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आयुर्वेद भारत की एक विरासत है, जिसके विस्तार में पूरी मानवता की भलाई समाहित है: प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को आयुर्वेदिक दिवस के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जामनगर में आयुर्वेद शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआरए) और जयपुर में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा, “आयुर्वेद भारत की एक विरासत है जिसके विस्तार में पूरी मानवता की भलाई समाई हुई है। हर भारतीय को यह देखकर खुशी होगी कि हमारा पारंपरिक ज्ञान, अब अन्य देशों को भी समृद्ध कर रहा है। आज ब्राजील की राष्ट्रीय नीति में आयुर्वेद शामिल है। भारत-अमेरिका संबंध हों, भारत-जर्मनी रिश्ते हों, आयुष और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से जुड़ा सहयोग निरंतर बढ़ रहा है। यह भी प्रत्येक भारतीय के लिए बहुत गर्व की बात है कि WHO ने ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन की स्थापना के लिए भारत को चुना है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “देश में अब पहली बार हमारे पुरातन चिकित्सीय ज्ञान-विज्ञान को 21वीं सदी के आधुनिक विज्ञान से मिली जानकारी के साथ जोड़ा जा रहा है, नई रिसर्च की जा रही है। तीन साल पहले ही हमारे यहां अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान की स्थापना की गई थी। लेह में सोवा-रिग्पा से जुड़ी रिसर्च और दूसरे अध्ययन के लिए राष्ट्रीय सोवा रिग्पा संस्थान विकसित करने का काम जारी है। आज गुजरात और राजस्थान के जिन दो संस्थानों को अपग्रेड किया गया है, वो भी इस सिलसिले का विस्तार है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा मिलने के बाद अब Institute of Teaching and Research in Ayurveda यानि ITRA, जामनगर अब IIT के समकक्ष आ गया है। इसी तरह जयपुर का राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान अब डीम्ड यूनिवर्सिटी के रूप में स्किल डेवलपमेंट से जुड़े नए कोर्स शुरु कर पाएगा। उन्होंने कहा कि अब इस डीम्ड यूनिवर्सिटी में दवाओं को लेकर और विस्तृत अध्ययन हो पाएगा और ज्यादा क्वालिटी रिसर्च होगी। इसका बहुत बड़ा लाभ हमारे युवा साथियों को मिलेगा, देश के हेल्थ सेक्टर को मिलेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत अब टुकड़ों में नहीं होलिस्टिक तरीके से सोचता है। हेल्थ से जुड़ी चुनौतियों को भी अब होलिस्टिक तरीसे से ही सुलझाया जा रहा है। आज देश में सस्ते और प्रभावी इलाज के साथ-साथ Preventive Healthcare पर, Wellness ज्यादा फोकस किया जा रहा है। स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ ही रहे, इसी सोच के साथ ऐसे हर कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे बीमार करने वाली स्थितियां दूर हों। एक तरफ साफ-सफाई, शौचालय, साफ पानी, धुआंमुक्त रसोई, पोषण इन सभी पर ध्यान दिया जा रहा है तो वहीं डेढ़ लाख हेल्थ और वेलनेस सेंटर्स तैयार किए जा रहे हैं। इनमें विशेष तौर पर साढ़े 12 हजार से ज्यादा आयुष वेलनेस सेंटर्स बन रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा के वेलनेस का भारतीय दर्शन आज पूरी दुनिया को आकर्षित कर रहा है। कोरोना के इस मुश्किल समय ने फिर दिखाया है कि Health and Wellness से जुड़ी भारत की ये पारंपरिक विधा कितनी कारगर है। जब कोरोना से मुकाबले के लिए कोई प्रभावी तरीका नहीं था, तो भारत के घर-घर में हल्दी दूध और काढ़ा जैसे अनेक इम्युनिटी बूस्टर उपाय बहुत काम आए। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में पूरी दुनिया में आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स की मांग तेज़ी से बढ़ी है। बीते साल की अपेक्षा इस साल सितंबर में आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्यात लगभग 45 प्रतिशत बढ़ा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज हम आयुर्वेदिक दवाओं, जड़ी-बूटियों के साथ-साथ इम्यूनिटी को बढ़ाने वाले न्यूट्रिशियस फूड पर भी विशेष बल दे रहे हैं। मोटे अनाज यानि मिलेट्स का उत्पादन बढ़ाने के लिए आज किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यही नहीं गंगा जी के किनारे और हिमालयी क्षेत्रों में ऑर्गेनिक उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि दुनिया की वेलनेस में भारत ज्यादा से ज्यादा कंट्रीब्यूट करे, हमारा एक्सपोर्ट भी बढ़े और हमारे किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हो।

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