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पीएम मोदी के व्यक्तित्व के सामने झुका अमेरिका, पूरे जम्मू-कश्मीर को माना भारत का अटूट हिस्सा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व आज विश्व के सबसे प्रभावशाली नेताओं में भी सबसे अग्रणी हो चुका है। इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण अमेरिका की ओर से हाल में किया गया एक भूल सुधार है। दरअसल अमेरिका ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में गलत शब्दों का चुनाव किया। लेकिन जैसे ही मोदी सरकार ने ट्रंप सरकार को इस संबंध में टोका, उन्होंने बिना समय बिताये अपनी गलती को ठीक कर लिया। अमेरिका ने इस सुधार के माध्यम से पाकिस्तान को भी अपना संदेश दे दिया। दरअसल, अमेरिका में ओबामा प्रशासन रहा हो या ट्रंप प्रशासन, सभी पीएम मोदी की छवि के प्रभाव में रहे हैं। इसका आकलन मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत की चिंता के प्रति अमेरिकी गंभीरता से अनुभव किया जा सकता है।

अमेरिका ने कैसे सुधारी गलती ?
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा मानते हुए अपने पहले कहे गये शब्दों को वापस ले लिया है। दरअसल अमेरिकी प्रशासन की ओर से जम्मू-कश्मीर के लिये ‘भारत प्रशासित कश्मीर’ शब्द का प्रयोग कर दिया गया था। इसके तुरंत बाद मोदी सरकार ने अमेरिकी प्रशासन को इसपर तीखी आपत्ति जताई। भारत ने दो टूक कह दिया कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और अमेरिका को इस बात को गंभीरता से ध्यान में रखना चाहिए।

अमेरिका से कहां हुई थी चूक ?
मामला पिछले 26 जून का है। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से आतंकी सरगना सैयद सलाहुद्दीन को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के लिये एक नोट जारी हुआ था। इस नोट में लिखा था, “हिजबुल मुजाहिद्दीन आतंकी संगठन का नेता एक ग्‍लोबल टेररिस्‍ट है. हिजबुल कई आतंकी हमलों का जिम्‍मेदार है जिसमें अप्रैल, 2014 में ‘भारत प्रशासित कश्‍मीर’ में हुए धमाके भी शामिल हैं जिसकी वजह से 17 लोग घायल हुए थे।”

क्या है पूरे जम्मू-कश्मीर की स्थिति ?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर समेत पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अखंड हिस्सा है। दुनिया जानती है कि PoK पर पाकिस्तान ने अवैध तरीके से कब्जा कर रखा है। यही कारण है कि वहां के लोग भी अब पाकिस्तानी शासन के विरोध में खुलकर आवाजें उठाने लगे हैं। वो दुनिया भर में प्रदर्शन कर रहे हैं। जब से भारत में पीएम मोदी की सरकार बनी है, उन्हें भरोसा है कि एक न एक दिन वो पाकिस्तान के कब्जे से निकलकर भारत से दोबारा जुड़ सकेंगे। अमेरिका ने जिस तरह से मोदी सरकार के दबाव में अपना स्टैंड वापस लिया है, उससे PoK पर भी पाकिस्तान की स्थिति काफी कमजोर हो गई है।

PoK में ही पाकिस्तान की आतंक फैक्ट्री
लश्कर ए तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन जैसे जितने भी आतंकवादी संगठन हैं उन्हें पाकिस्तान अपनी धरती पर या अपने कब्जे वाले कश्मीर में प्रशिक्षण देता है। इस काम में आतंकवादी संगठनों के मुखिया तो केवल मुखौटे की तरह इस्तेमाल होती हैं। असल में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के अफसर इस ट्रेनिंग में सीधे तौर पर जुड़े रहते हैं। जब सैकड़ों ट्रेनिंग कैंप्स में आतंकवादियों को हिंसा की ट्रेनिंग दे दी जाती है तो उन्हें हथियारों और बाकी सामानों के साथ भारत में भेजने का खेल चलता है। इस काम में भी पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स का सक्रिय योगदान होता है।

पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित कर चुका है
पीएम मोदी के प्रभाव का ही असर है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकी देश मानकर उसे पूरी दुनिया में बेनकाब कर दिया है। अमेरिका ने उसे आतंकवादी गतिविधियों को संरक्षण और बढ़ावा देने वाले देशों की सूची में डाल दिया है। अमेरिका ने साफ कहा है कि पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन खुलेआम भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय हैं, लेकिन वह उनपर लगाम नहीं लगा रहा है। बड़ी बात है कि भारत के दबाव में पिछले कुछ सालों से कई अमेरिकी सांसद भी पाकिस्तान को टेररिस्ट नेशन घोषित करने की मांग कर रहे थे।

आतंकी सरगना सलाहुद्दीन पर भी बैन लगा चुका है
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के ठीक पहले अमेरिका ने हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन को ग्लोबल टेररिस्ट की लिस्ट में डाल दिया था। सलाहुद्दीन भारत के कई आतंकवादी वारदातों में शामिल है और पाकिस्तान में रहकर भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देता है। ये आतंकी जनवरी, 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले का भी आरोपी माना जाता है।

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