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प्रधानमंत्री मोदी की ‘ मन की बात’ से जल संरक्षण बना जन आंदोलन

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आजादी के बाद सत्तर सालों के दौरान देश में जल भंडारों के संरक्षण से अधिक सरकारों का ध्यान उसके उपयोग पर रहा, इसका परिणाम हमारे सामने जल संकट के रूप में आ रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले एक से दो दशक में पानी की कमी से देश में युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है, इस स्थिति का अंदाजा हम गर्मियों के दौरान पानी के लिए चेन्नई शहर में हुई हिंसक झड़पों से लगा सकते हैं। हमारे सामने अब ऐसी स्थिति खड़ी हो गई है कि अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जरूरी हो गया है कि ‘जल का संरक्षण’ किया जाए।

प्रधानमंत्री मोदी का जल संरक्षण का मंत्र-   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जो सामाजिक चेतना और सामूहिक सह अस्तित्व बनाए रखने वाले कामों के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम करते हैं। हर महीने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए वह हमेशा इन्हीं विषयों पर देश की 130 करोड़ जनता से सीधे संवाद करते हैं। अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 30 जून को उन्होंने देश में जल संरक्षण के महत्व पर चर्चा की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने जब देश के 130 करोड़ जनता से देश को जलसंकट से मुक्त कराने की बात कही तो सभी देशवासी एक साथ उठ खड़े हुए। जल संकट से देश को बाहर लाने के लिए देश में एक जन आंदोलन खड़ा हो गया, फिल्मी सितारों से लेकर धर्मगुरुओं ने जल संरक्षण के लिए समाजिक चेतना को जगाने का काम किया।

देशवासियों ने वृक्षारोपण किया
पेड़ पौधे जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे भूमिगत जल का स्तर बढ़ता है। मन की बात कार्यक्रम ने देशवासियों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया। ऐसी ही एक अनोखी पहल उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के बरजी गांव के प्रकाश उपाध्याय ने की है। प्रकाश उपाध्याय ने अपने बेटे के जन्मदिन पर केक काटने और उसे अपने लोगों के बीच बांटने की जगह, सबको एक-एक पौधा दिया और अनुरोध किया कि सभी इस पौधे को अवश्य लगाएं। इस अवसर पर उन्होंने 200 से अधिक फलदार वृक्षों के पौधों को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच बांटा। प्रकाश उपाध्याय का कहना है कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में पहली मन की बात में जल संरक्षण और पर्यावरण को लेकर जो सीख दी, उसी से प्रभावित होकर मैंने यह किया है। मैंने इस मौके पर सभी से यह भी अपील की है कि किसी भी खास मौके पर हम सभी पौधारोपण करें।’ प्रकाश उपाध्याय भारतीय वायु सेना में टेक्नीशियन के पद पर तैनात हैं।

देश में जल संचयन के लिए आगे बढ़े हाथ-मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने देश वासियों से अपील की थी कि जल संचयन को आगे बढ़ाएं और परंपरिक जल संचयन के तरीकों को एक दूसरे को बताने के लिए सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें। प्रधानमंत्री मोदी की इन बातों का चमत्कारिक प्रभाव पड़ा। लोग जल संचयन के लिए अपने अपने क्षेत्रों में काम करने लगे। पीलीभीत के एक पब्लिक स्कूल मे जहां 3,000 छात्र अध्ययन करते हैं, वहां वाटर हार्वेस्टिंग का काम मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी की अपील से प्रभावित होकर शुरू हुआ। स्कूल के प्रबंधक प्रधानमंत्री मोदी की इस बात से प्रभावित हुए कि पूरे देश में मात्र 8 प्रतिशत जल ही की वाटर हार्वेस्टिंग हो पाती है। जल जैसे महत्वपूर्ण जीवनदायिनी शक्ति के बारे में ऐसा सुनकर स्कूल प्रबंधन ने 200 वर्ग फीट के दो विशेष ऐसे गड्डे बनवाए, जिससे वाटर हार्वेस्टिंग हो सके। बरसात के दिनोंं में पूरे स्कूल के मैदान का पानी जहां सड़कों पर बहकर बाढ़ की स्थिति पैदा कर देता था, अब वही पानी बहकर इन वाटर हार्वेस्टिंग गड्डों में पहुंच रहा है। इससे भूमिगत जल का स्तर बढ़ने लगा है।

ऐसा ही वाटर हार्वेस्टिंग का काम मन की बात से प्रभावित होकर कोलकाता के एक उद्यमी प्रियम बुधिया ने अपनी फैक्टरी में किया है। यह काम स्टील बनाने वाली कंपनी के हावड़ा के फुलवारिया प्लांट में किया गया है।

देश में प्रधानमंत्री मोदी के जल संरक्षण के कार्यक्रम में सभी बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। देश में स्वच्छता आंदलोन की तरह ही जल संरक्षण का आंदोलन भी एक सामाजिक क्रांति के रूप परिवर्तित हो रहा है।

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