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प्रधानमंत्री मोदी का 3 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान, 20 अप्रैल के बाद कुछ जगहों पर दी जा सकती है सशर्त छूट

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना महामारी फैलने के बाद से मंगलवार को चौथी बार देश को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने 21 दिनों से जारी लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने का ऐलान किया, साथ ही उन्होंने कहा कि 20 अप्रैल के बाद जिन जगहों पर संक्रमण फैलने का खतरा नहीं होगा, वहां शर्तों के साथ लॉकडाउन में कुछ छूट दी जा सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि कल यानी 15 अप्रैल को केंद्र सरकार लॉकडाउन को लेकर नई गाइडलाइन जारी करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार लॉकडाउन का पालन और कठोर तरीके से किया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने संतोष जताया कि कोरोना के खिलाफ भारत की लड़ाई मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। देशवासियों की तपस्या की वजह से भारत काफी हदतक कोरोना के खतरे को टालने में सफल रहा है। श्री मोदी ने देशवासियों का आभार जताते हुए कहा कि आप लोगों ने कष्ट सहकर भी देश को बचाया है। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान में जिस वी द पीपल ऑफ इंडिया है की बात कही गई है, वो यही तो है। बाबासाहेब अम्बेडकर की जन्म जयंती पर हम भारत की लोगों की तरफ से अपनी सामूहिक शक्ति का ये प्रदर्शन ये संकल्प बाबासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज पूरे विश्व में कोरोना महामारी की जो स्थित है, उससे हम सब परिचित हैं। अन्य देशों के मुकाबले भारत ने कैसे अपने यहां संक्रमण को रोकने के प्रयास किए। आप इसके सहभागी भी रहे हैं और साक्षी भी। जब हमारे यहां कोरोना का एक भी केस नहीं था, उससे पहले ही भारत ने कोरोना प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी। 100 मरीजों दर्ज होने से पहले ही विदेश से आए यात्रियों के लिए 14 दिन का आइसोलेशन अनिवार्य कर दिया गया था। देशभर में माल, थियेटर, जिम आदि बंद किए जा चुके थे। और जब हमारे यहां कोरोना के 550 केस थे, तभी भारत ने 21 दिन के लॉकडाउन का कदम उठा लिया था। उन्होंने कहा कि भारत ने समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं किया, बल्कि जैसे ही समस्या दिखी उसे तेजी से फैसले लेकर उसी समय रोकने का भरकस प्रयास किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर दुनिया से बड़े देशों में कोरोना से जुड़े आंकड़े देखें तो उनकी तुलना में आज भारत बहुत संभली हुई स्थित में है। उन्होंने कहा कि भारत ने अगर होलिस्टिक और इंटीग्रेटेड एप्रोज न अपनाई होती, समय पर तेज फैसले न लिए होते तो आज भारत की स्थित क्या होती इसकी कल्पना करते ही रोएं खड़े हो जाते हैं। श्री मोदी ने कहा कि बीते दिनों के अनुभवों से ये साफ है कि सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन का बहुत बड़ा लाभ देश को मिला है। अगर सिर्फ आर्थिक दृष्टि से देखों तो ये महंगा जरूर लगता है। हमें इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है, लेकिन भारतवासियों की जिंदगी के आगे इसकी कोई तुलना नहीं हो सकती है। सीमित संसाधनों के बीच जिस मार्ग पर भारत चला है, उस मार्ग की चर्चा आज दुनियाभर में होना बहुत स्वाभाविक है। देश की राज्य सरकारों ने भी बहुत जिम्मेदारी के साथ काम किया है।

इन सब प्रयासों के बीच कोरोना जिस तरह फैल रहा है उसने विश्वभर में सरकारों को और ज्यादा सतर्क कर दिया है। भारत में भी कोरोना के खिलाफ लड़ाई अब आगे कैसे बढ़े, हम विजयी कैसे हों, हमारे यहां नुकसान कम से कम कैसे हो, दिक्कतें कम कैसे हों इन बातों को लेकर राज्यों के साथ कई बार चर्चा की गई है। इन चर्चाओं में यही सुझाव आता है कि लॉकडाउन को बढ़ाया जाए। कई राज्य फैसला कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सारे सुझावों को ध्यान में रखते हुए ये तय किया गया है कि भारत में लॉकडाउन को अब 3 मई तक और बढ़ाना पड़ेगा। तीन मई तक हम सभी को लॉकडाउन में ही रहना होगा। इस दौरान हमें अनुशासन का उसी तरह पालन करना है, जैसे हम करते आ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कहा कि अब कोरोना को हमें किसी भी कीमत पर नए क्षेत्रों में फैलने नहीं देना है। स्थानीय स्तर पर अब एक भी मरीज बढ़ता है तो ये हमारे लिए चिंता का विषय होना चाहिए। श्री मोदी ने कहा कि हॉटस्पॉट को लेकर पहले से भी ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी। जिन स्थानों के हॉटस्पॉट में बदलने की आशंका है उस पर भी हमें कड़ी नजर रखनी होगी। नए हॉटस्पॉट का बनना हमारे परिश्रम और तपस्या को और चुनौती देगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसलिए अगले एक सप्ताह में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कठोरता और ज्यादा बढ़ाई जाएगी। 20 अप्रैल तक हर कस्बे, हर थाने, हर जिले, हर राज्य को बारीकी से परखा जाएगा। ये देखा जाएगा कि लॉकडाउन का कितना पालन हो रहा है, उस क्षेत्र ने खुद को कोरोना से कितना बचाया है, इसका मूल्यांकन किया जाएगा। जो क्षेत्र अग्नि परीक्षा में सफल होंगे, वहां पर 20 अप्रैल से कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। ये अनुमति सशर्त होगी और बाहर निकलने के नियम बहुत सख्त होंगे। लॉकडाउन के नियम यदि टूटते हैं और कोरोना का पैर हमारे इलाके में पड़ता है तो सारी अनुमति तुरंत वापस ले ली जाएगी। इसलिए न खुद कोई लापरवाही करनी है और न किसी और को लापरवाही करने देना है।

श्री मोदी ने बताया कि 15 अप्रैल को इस बारे में सरकार की तरफ से एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 20 अप्रैल से चिन्हित क्षेत्रों में सीमित छूट का प्रावधान हमारे रोज कामने खाने वाले गरीबों की आजीविका को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में एक इनके जीवन में आई मुश्किल को कम करना है। पीएम गरीब कल्याण योजना के माध्यम से सरकार ने उनकी मदद करने का हर संभव प्रयास किया है। नई गाइडलाइन के समय उनके हितों का पूरा ध्यान रखा गया है।

श्री मोदी ने कहा कि हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी हम आगे बढ़ रहे हैं। पहले जहां एक लैब में कोरोना टेस्टिंग की सुविधा थी, वहीं अब 220 से ज्यादा लैब टेस्टिंग का काम कर रही हैं। विश्व का अनुभव कह रहा हैं कोरोना के 10 हजार मरीज होने पर 1600 बेड की जरूरत होती, लेकिन भारत में इस समय एक लाख बेड की उपलब्धता है। देश में 600 से अधिक अस्पताल कोविड के इलाज में लगे हैं। इन सुविधाओं को तेजी से बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के युवा वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि विश्व कल्याण और मानव कल्याण के लिए आगे आएं और कोरोना की वैक्सीन बनाने का बीड़ा उठाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि धैर्य बनाकर रखेंगे, नियमों का पालन करेंगे तो कोरोना को परास्त करने में जरूर कामयाब होंगे।

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