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पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत को बनाया दूसरों से बेहतर

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एक राष्ट्र तभी सबल और सफल होता है जब उसका नेतृत्व सक्षम और दूरदर्शी हो। कोरोना से निपटने को लेकर विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत का बेहतर काम करने का रहस्य नेतृत्व के सामर्थ्य में छिपा है। जहां दुनिया के अधिकांश पीड़ित देश कोरोना के कहर से बचने के बारे में सोच रहा है वहीं भारत का नेतृत्व यानि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना के बाद की स्थिति से बाहर आने पर विचार कर रहे हैं। इसका खाका उन्होंने जापान के प्रधानमंत्री सिंजो आबे से हुई बातचीत के बाद देश के सामने रख भी दिया। उन्होंने बताया है कि भारत और जापान का विशेष सामरिक एवं वैश्विक गठजोड़ कोविड-19 के बाद विश्व में नई प्रौद्योगिकी और समाधान विकसित करने में मदद पहुंच सकता है। आज अगर भारत कोरोना को परास्त करने में दुनिया को राह दिखाने वाले देश के रूप में आगे आया है, तो उसके पीछे मोदी की ठोस रणनीति और दूरदर्शी पहल है। उनके हर कदम की सराहना ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने अपने शोध में की है।

विदेश में रह रहे लोगों को लाने की तत्परता

जैसे ही कोरोना का कहर विश्वव्यापी हुआ, भारत ने सबसे पहले कोरोना पीड़ित देशों से अपने नागरिकों को स्वदेश लाया। लाख कठिनाइयां होने के बाद भी पीएम मोदी के निर्देश पर अपने सारे नागरिकों को स्वदेश लाया गया। भारत जैसा सराहनीय कदम दुनिया के किसी देश ने नहीं उठाया। चाहे वह चीन के वुहान शहर में फंसे भारतीय हों या फिर इटली में रहने वाले देशवासी हो। हर उस देश में फंसे लोगों को बाहर निकाल लाया जहां कोरोना का कहर व्याप्त था। ईरान, इटली और यूरोप के तमाम देशों में रहने वाले भारतीयों को देश वापस लाया गया, जबकि उन्हें वहां से लाने में बहुत ज्यादा मुसीबतें सामने आई थीं। इस प्रकार कोरोना के खतरे से निपटने की दिशा में भारत की कूटनीति ने दुनिया के सामने एक नई मिशाल पेश की है।

पीएम मोदी की दूरदर्शिता ने दिखाई सजगता

अमेरिका जैसा देश कोरोना की प्रारंभिक जानकारी मिलने के बाद भी उदासीन बना रहा। उसने उसे एक चीनी वायरस मानते हुए ज्यादा तवज्जो नहीं दिया। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना की प्राथमिक जानकारी मिलते ही देश को सचेत कर दिया बल्कि इससे निपटने की योजना भी तैयार कर ली। उन्होंने ने केवल सभी देशवासियों को भारत लाने का आदेश दिया बल्कि विदेश से आने वाले हर यात्री की निगरानी करने का आदेश दे दिया। अगर आज इस विश्वव्यापी महामारी का इतना कम असर भारत पर दिख रहा है तो इसका एक मात्र कारण प्रधानमंत्री की रणनीति के अनुरूप उसका क्रियान्वयन।

समय पर संपूर्ण लॉकडाउन का लिया फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वैश्विक महामारी के प्रकोप को पहले भांप चुके थे। तभी तो उन्होंने हाथ से बाजी निकलने से पहले देश में संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा कर इस पर अंकुश लगाने की भरसक कोशिश की। इससे पहले ही उन्होंने देश में एक दिन का जनता कर्फ्यू लगाया था। लॉकडाउन लगाने के बाद तो देश में कोरोना की स्थिति यह हो गई थी कि भारत इस पर शीघ्र ही अंकुश लगा लेगा। लेकिन इसी बीच दिल्ली स्थित निजाम्मुदिन मरकज में तबलीगी जमात के जमावड़े की घटना ने इसे और विषाक्त बना दिया। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते प्रधानमंत्री देश में संपूर्ण लॉकडाउन करने का फैसला न लिया होता तो आज भारत में मरीजों की संख्या लाखों तक पहुंच गई होती।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने की मोदी की प्रशंसा

भारत में कोरोनो के विस्तार को थामे रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास की ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी काफी प्रशंसा की है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने हाल ही में लॉकडाउन लगाने वाले देशों पर एक शोध रिपोर्ट जारी की है। अपनी रिपोर्ट में उसने वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने में भारत के लॉकडाउन को सबसे कारगर बताया है। ऑक्सपोर्ड यूनिवर्सिटी ने कोरोना के खिलाफ भारत के मुहिम को परफेक्ट बताया है। इतना ही नहीं इसके लिए भारत को परफेक्ट 100 अंक भी दिया है। जबकि इसी काम के लिए अमेरिका को 100 में से 67 अंक दिया है। दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत की रणनीति को उपयुक्त बताया है। शोध में जिन 11 मापदंडों को आधार बताया गया है उस पर भारत को सफल बताया गया है।

पूरे विश्व का मददगार बना भारत

जहां पूरी दुनिया में कोरोना से पीड़ित देश अपने हित की चिंता में लगा है वहीं आज भारत एक ऐसे नेतृत्व के हाथ में है जिन्होंने न केवल देश की चिंता की बल्कि इस कठिन परिस्थिति में भी देश के लिए एक बेहतर अवसर खोज लाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी दुनिया की मदद कर देश की साख भी बढ़ाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई देशों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाकर अमेरिका की मदद की वहीं कई देशों को भी इसकी आपूर्ति की। भारत के इस पहल की न केवल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बल्कि अमेरिका, ब्राजील, इजरायल, नेपाल, बांग्लादेश, मालदीव जैसे दुनिया के कई देशों ने जमकर प्रशंसा की। आज भारत की दवाइयों से जो-जो देश लाभान्वित हुए हैं उनमें अमेरिका सहित बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव जैसे देश शामिल हैं.

भारत ने की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहल

दुनिया का कोई भी देश कोरोना से लड़ने के लिए कोई वैश्विक पहल नहीं की बल्कि भारत एक मात्र देश है जिन्होंने आपसी मतभेद भूलकर भी कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के लिए अंतरराष्ट्रीय पहल की। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही जज्बा है जिन्होंने अपने देश के साथ समस्त दक्षिण एशियाई देशों को मदद पहुंचाने की पहल की। उन्होंने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सार्क के सदस्य देशों के सम्मेलन का आयोजन किया। खास बात है कि इस विकट परिस्थिति में पाकिस्तान समेत सभी देशों ने शिरकत की। श्रीलंका, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मालदीव और पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर कोरोना से लड़ने के लिए एक संयुक्त फंड बनाने पर अपनी सहमति जताई।

मानवता के रक्षक के रूप सामने आया भारत

इस वैश्विक संकट की स्थिति में दुनिया की महाशक्तियों की तुलना में भारत के बर्ताव पर जरा गौर करिए। एक तरफ जहां भारत अपने देश में लॉकडाउन और सामाजिक दूरी जैसे उपायों के सहारे कोविडि -19 को हराने में जुटा है वहीं संकट में फंसे दूसरे देश की मदद भी कर रहा है। भारत का यह प्रयास पूरी दुनिया के सामने मानवता के रक्षक के रूप में सामने आया है। कोरोना से लड़ाई में मदद करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, ब्राजील के राष्ट्रपति बोल्सोनारों के अलावा स्पेन और ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष दिल खोल कर भारत की तारीफ कर रहे हैं।

इस विकट परिस्थिति में पीएम मोदी के धैर्य को देखकर पुरानी कहावत याद आती है कि संकट में ही व्यक्ति का असली व्यक्तित्व और उसका चरित्र का पता चलता है। तभी तो कहा गया है कि संकट के गोद में ही मजबूत नेतृत्व की उत्पत्ति होती है। जिस कोरोना के आगे दुनिया के शक्तिशाली से शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्षों ने घुटने टेक दिए वहीं पीएम मोदी न केवल अपने देश को समर्थ नेतृत्व देने में सफल रहे हैं बल्कि विश्व का नेतृत्व करने में समर्थ हैं।

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