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पाक में ननकाना साहिब पर हमला, कहां छिपे हैं CAA विरोधी ? अल्पसंख्यकों के पैरोकार खामोश क्यों ?

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पाकिस्तान में सिख धर्म के पवित्र स्थल गुरुद्वारा ननकना साहिब पर सैकड़ों लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया। उग्र भीड़ ने गुरुद्वारे पर पत्थरबाजी की और जमकर तोड़-फोड़ किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली भारत सरकार ने बिना देरी किए हुए ननकाना साहिब में तोड़-फोड़ की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उसकी सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई करने और सिख समुदाय की सुरक्षा की मांग की।

लेकिन हैरानी की बात यह कि भारत में अल्पसंख्यकों के नाम पर राजनीति करने वाले खामोश है। नागरिकता संशोधन कानून (सीसीए) को अल्पसंख्यक विरोधी बताने और इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर देशभर में दंगा-फसाद कराने वालों के पास इस घटना की निंदा करने का समय नहीं है। क्योंकि उन्हें मुसलमानों को भड़काकर मरवाने के बाद उनकी मौत पर मातम मनाने से फुर्सत नहीं है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी शनिवार की सुबह नूर मोहम्मद के परिजनों से मिलने मुजफ्फरनगर पहुंचीं, जिसकी 20 दिसम्बर, 2019 को हुई हिंसा में मौत हुई थी। प्रियंका गांधी के पास ननकाना साहिब पर हुए हमले के खिलाफ बोलने के लिए एक शब्द नहीं है,लेकिन मौत पर अपनी सियासी रोटियां सेकने के लिए पूरा समय है। आज देश की जनता इनके दोहरे चरित्र को बखूबी समझ रही है।

उधर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ननकाना साहिब पर हमले के खिलाफ मौन है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सीसीए और एनआरसी को लेकर देशभर में आग लगाने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करने में देरी नहीं की, लेकिन ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हुए हमला मामले में पाकिस्तान के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला है। 

इन सबके बीच कांग्रेस नेता और पूर्व क्रिकेटर नोवजोत सिंह सिद्धू सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रहे हैं। ट्विटर यूजर्स ने सवाल किया कि अब क्यों नवजोत सिंह सिद्धू खामोश हैं, अब क्यों नहीं वह पाकिस्तान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर अपनी राय दे रहे हैं। यूजर्स पूछ रहे हैं कि जिस शख्स (इमरान खान) को आप शांतिप्रिय बता रहे थे, देखिए उनके राज में क्या हो रहा है। इसके अलावा कई लोग इस बात से भी नाराज है कि सिख समुदाय से होने के बावजूद अभी तक सिद्धू ने इस घटना की निंदा नहीं की है और ना ही पाकिस्तान सरकार की फटकार लगाई है। देखें लोगों की प्रतक्रियाएं…

मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून लाने के पीछे जो कारण बताया था, उसकी पुष्टि भी ननकाना साहिब गुरुद्वारे की मौजूदा घटना से होती है। इस मामले में बीजेपी ने शनिवार को कांग्रेस पर निशाना साधा। पाकिस्तान में गुरुद्वारा ननकाना साहिब पर हमले के बाद बीजेपी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से पूछा है कि आप के लिए ये सबूत काफी है या और चाहिए? 

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीटर पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि ‘ननकाना साहिब में एक भी सिख़ ना रहने देना …इस्लाम के नाम पे’ यह धमकी दी जा रही थी पाकिस्तान में हमारे सिख़ भाइयों को… इन कांग्रेसियों को “शोषित धार्मिक अल्पसंख्यक ” का और सबूत चाहिए? राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आप के लिए ये सबूत काफ़ी है या और चाहिए?

वहीं केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान में ननकाना साहेब/सिखों पर हमला हुआ और यहां पाक का विरोध के बजाए जिन पर पाकिस्तान में अत्याचार हुए उनको वापिस लेने का विरोध हो रहा। कहां गए राहुल के पाक ब्रांड अम्बेसडर सिद्दू, टुकड़े-टुकड़े गैंग व विपक्ष, सब चुप। क्या मोदी इनका दर्द न सुनें, क्या इन्हें नागरिकता न मिले।

जब प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे हमले के खिलाफ देश को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए और पाकिस्तान को विश्व स्तर पर बेनकाब करना चाहिए, तो कांग्रेस की अध्यक्ष और उनके शागिर्द पाकिस्तान की भाषा बोलने लगते हैं। वे प्रधानमंत्री मोदी से इतना नफरत करते हैं कि भारत की खिलाफत और पाकिस्तान की हिमायत करने से भी नहीं चूकते। आज पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जो हो रहा है, उसके खिलाफ आवाज उठाने का बेहतर मौका है, लेकिन वैट बैंक की राजनीति में अंधी कांग्रेस, वामपंथी, समाजवादी पार्टी, बसपा और आम आदमी पार्टी जैसी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां मौन रहकर इस मौके को भी गंवाने में अपनी हित देख रही है।

आइए अब आपको इस घटना के बारे में बतते हैं, कब और क्यों घटी यह घटना…

शुक्रवार यानी 3 जनवरी, 2020 को मुस्लिमों की आक्रोशित भीड़ ने पाकिस्तान स्थित ननकाना साहिब गुरुद्वारे को घेरकर उसपर पत्थरबाजी करने लगी। ट्विटर पर बीबीसी के पत्रकार रविंद्र सिंह रॉबिन ने इस घटना की वीडियो डाली। वे लगातार इस मामले पर जानकारी देते रहे।

ट्विटर पर बीबीसी के पत्रकार रविंद्र सिंह रॉबिन ने इस घटना से जुड़े कई वीडियो पोस्ट किए। उनके द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में दंगाई यह कहते हुए नज़र आ रहे थे कि वे ननकाना साहिब में एक भी सिख को नहीं रहने देंगे और गुरुद्वारे का नाम बदलकर गुलाम-ए-मुस्तफा कर देंगे।

पत्रकार द्वारा जारी वीडियो में देखा जा सकता है कि ननकाना साहिब में मुस्लिम भीड़ कितनी उग्र है। जिसमें एक मुस्लिम युवक सिख लड़की (जगजीत कौर) का अपहरण कर उसे इस्लाम कबूल करवाकर निकाह करने के मामले पर खुलेआम बातें कर रहा है और बाकी मुस्लिम पीछे उसके नारे लगा रहे हैं। इनका आरोप है कि ‘अपनी मर्जी से इस्लाम कबूलने’ और ‘शादी करने वाली’ लड़कियों को लेकर सिख समुदाय बेवजह हंगामा खड़ा करता है।

बता दें कि पिछले साल जिस जगजीत कौर का जबरन धर्मांतरण हुआ था, वह ननकाना साहिब गुरुद्वारे के ही ग्रंथी ज्ञानी भगवान सिंह की बेटी हैं। जगजीत कौर का अपहरण कर उसका धर्मातरण करवाने वाले मोहम्मद हसन के रिश्तेदार राणा मंसूर ने मुस्लिम भीड़ को उकसाया और ननकाना साहिब के गेट पर पत्थरबाज़ी की। इस घटना को अंजाम तब दिया गया, जब मुस्लिम समुदाय के लोग जुमे की नमाज अता कर अपने घर लौट रहे थे। ननकाना साहिब में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ननकाना साहिब के मुख्य बाजार में धरना भी दिया। धरने का नेतृत्व राणा मंसूर ने किया।

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