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मोदी सरकार के प्रयासों से नागालैंड में बढ़ी शांति और विकास की उम्मीद, एनएससीएन-के निकी ग्रुप ने हिंसा का रास्ता छोड़कर संघर्ष विराम समझौते पर किया हस्ताक्षर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश को एकजुट और मजबूत बनाने की दिशा में उल्लेखनीय काम हुआ है। जहां जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर देश के 70 साल पुराने एक देश, एक विधान और एक निशान के सपने को साकार किया गया, वहीं देश के पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवादी संगठनों के साथ संघर्ष विराम समझौता कर शांति और विकास को बढ़ावा दिया गया है। इसी क्रम में मोदी सरकार के प्रयासों से एक और बड़ी सफलता मिली है। नगालैंड में सक्रिय उग्रवादी संगठन एनएससीएन (के) निकी ग्रुप ने हिंसा का रास्ता छोड़कर संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किया है। इसके साथ ही निकी ग्रुप के 200 कैडर अपने 83 हथियारों के साथ शांति प्रक्रिया में शामिल हो गए हैं।

एक साल के लिए संघर्ष विराम समझौता

केंद्र सरकार और निकी ग्रुप के नेतृत्व वाले नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-खापलांग (एनएससीएन-के) के ग्रुप ने बुधवार (8 सितंबर, 2021) को एक साल के लिए 7 सितंबर, 2022 तक संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए। एनएससीएन-के निकी ग्रुप के प्रतिनिधियों और गृह मामलों के अतिरिक्त सचिव के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के अनुसार, युद्धविराम 8 सितंबर, 2021 से 7 सितंबर, 2022 तक एक वर्ष की अवधि के लिए लागू होगा। युद्धविराम दोनों पक्षों द्वारा पारस्परिक रूप से सहमत और नियमों के पालन के अधीन होगा। संघर्ष विराम के नियम दोनों पक्षों की भागीदारी के साथ पारस्परिक समीक्षा और संशोधन के अधीन होंगे।

उग्रवाद मुक्त और समृद्ध पूर्वोत्तर का संकल्प

गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि संघर्ष विराम समझौता नगा शांति प्रक्रिया और पूर्वोत्तर को उग्रवाद मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, ‘उग्रवाद मुक्त और समृद्ध पूर्वोत्तर’ के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को पूरा करने और नगा शांति प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (के) निकी समूह के साथ संघर्षविराम समझौता किया। 

एनएससीएन-आइएम से लोगों का मोहभंग 

एनएससीएन (आइएम) ने केंद्र सरकार के साथ 2015 में समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर किया था, लेकिन चार साल तक बातचीत के बाद फाइनल समझौते के समय वह अलग झंडे और संविधान को लेकर अड़ गया। नगालैंड पर नजर रखने वाले सूत्रों के अनुसार मुइवा के अडि़यल रवैये और भ्रष्टाचार के कारण आम लोगों का नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल आफ नगालैंड (एनएससीएन-आइएम) से मोहभंग होने लगा है। इसी बीच एनएससीएन (आइएम) के कैडर बड़ी संख्या में निकी सुमी के संगठन में शामिल हो रहे हैं। दो महीने पहले दीमापुर के नुईलैंड के कई पदाधिकारी एनएससीएन (आइएम) का साथ छोड़कर निकी सुमी के संगठन में शामिल हो गए थे। इससे पहले भी सैकड़ों कैडर दूसरे संगठनों में जा चुके हैं।

अमित शाह के गृहमंत्री बनने के बाद पांच समझौते

गौरतलब है कि अमित शाह के गृहमंत्री बनने के बाद पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादी संगठनों के साथ पांच समझौते हो चुके हैं। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नगालैंड में इसके पहले नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल आफ नगालैंड (एनएससीएन) (आइएम), एनएससीएन (एनके), एनएससीएन (आर) और एनएससीएन (के) के साथ युद्धविराम समझौता हो चुका है। इसके अलावा एनएससीएन (आइएम) के साथ नगा समस्या के समाधान के लिए एक प्रारूप पर समझौता हो चुका है। वहीं 4 सितंबर, 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और छह कार्बी संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में एक त्रिपक्षीय कार्बी शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे असम में एक दशक से चल रहे आंदोलन और हिंसा का अंत हो गया।

 

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