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मोदी सरकार ने पेश की मानवता की मिसाल, कोरोना प्रभावित देशों की मदद के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात का फैसला

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कोरोना संकट से पूरा विश्व जूझ रहा है। लेकिन अभी तक इस बीमारी के इलाज के लिए कोई कारगर दवा का विकास नहीं हो सका है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार ने मानवता की मिसाल पेश की है। सरकार ने कोरोना प्रभावित पड़ोसी देशों के साथ ही अन्य देशों को मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात का फैसला किया है। यह फैसला वैश्विक महामारी से निपटने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप लिया गया है। साथ ही मोदी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सबसे पहले अपने देश की जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा और उसके बाद दवा का निर्यात किया जाएगा। 

अपने लोगों को प्राथमिकता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि किसी भी सरकार का दायित्व होता है कि पहले वह सुनिश्चित करे कि उसके अपने लोगों के पास दवा या इलाज के हर जरूरी संसाधन उपलब्ध हों। इसी के मद्देनजर शुरू में कुछ एहतियाती कदम उठाए गए थे और कुछ दवाओं के निर्यात को प्रतिबंधित किया गया था।

निर्यात पर हालात के हिसाब से फैसला
श्रीवास्तव ने कहा कि पैरासेटामॉल और ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन लाइसेंस दवा की श्रेणी में ही रहेंगी, उनकी मांग पर लगातार नज़र रखी जाएगी। स्टॉक रहा तो इन दवाओं के निर्यात की इजाज़त दी जा सकती है।
भारत पर निर्भर पड़ोसी देशों का ख्याल
श्रीवास्तव ने कहा कि वैश्विक महामारी के मानवीय पहलुओं के मद्देनजर, यह तय किया गया है कि भारत अपने उन सभी पड़ोसी देशों को पेरासिटामोल और एचसीक्यू (हाइड्रोक्लोरोक्वीन) को उचित मात्रा में उपलब्ध कराएगा जिनकी निर्भरता भारत पर है। भारत को अपने निकटतम पड़ोसियों श्रीलंका और नेपाल के अलावा कई अन्य देशों से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति को लेकर अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
ट्रंप के बयान को अधिक तवज्जो देने से इनकार
भारतीय विदेश मंत्रालय ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति  ट्रंप के बयान को अधिक तवज्जो देने से मना करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है। ट्रंप ने अमेरिका में दिये अपने बयान में कहा था कि अगर भारत ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर से प्रतिबंध नहीं हटाया तो अमेरिका भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है। 
अमेरिका ने मानी मोदी सरकार की तीन मांगें
अमेरिका चाहता था कि भारत Hydroxychloriquine दवा फौरन उसे बेचना शुरू करे। चतुर बनिए की तरह मोदी सरकार ने अमेरिका के सामने तीन मांगें रख दी। मौजूदा हालात को देखते हुए अमेरिका ने मांगें मानने में देरी नहीं की और 24 घंटे में ही भारत की मांग मना ली। भारत ने अमेरिका के सामने ये तीन मांगें रखी थीं-  
1. भारतीय दवा कंपनियों के लिए अमेरिकी बाज़ार खोलो।
2. FDA के नाम पर जितनी पाबंदियां लगाई गई हैं हटाओ।
3. आगे भी हमारी दवा कंपनियों को परेशान न किया जाए।
‘जरूरतमंद देशों को करेंगे सप्लाई’
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि कोरोनावायरस महामारी के समय भारत ने हमेशा कहा है कि ऐसे कठिन हालात में पूरे विश्व को एक होकर इससे लड़ना होगा। इसमें मानवीय पहलू के बारे में भी सोचना होगा। भारत ने कहा कि वह इन दवाओं को उन जरूरतमंद देशों को भी भेजेगा जो इस बीमारी से सबसे अधिक ग्रसित हैं। विदश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे कठिन परिस्थिति में किसी तरह के अनर्गल विवाद को खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।
भारत ने अन्य देशों के नागरिकों को उनके देश पहुंचाया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ‘भारत का रुख हमेशा से यह रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुटता एवं सहयोग दिखाना चाहिए। इसी नजरिए से हमने अन्य देशों के नागरिकों को उनके देश पहुंचाया है।‘
भारत ने हाइड्रोक्सीलक्लोरोक्वीन के निर्यात पर लगायी थी रोक
बता दें कि पिछले महीने, भारत ने हाइड्रोक्सीलक्लोरोक्वीन के निर्यात पर रोक लगा दी थी जब ऐसी खबरें आईं कि कोविड-19 मरीजों का इलाज कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को संक्रमण से बचाने के लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत में इंडियन कौंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च ने कहा है कि कोरोना का इलाज कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों पर इस दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे सकारात्मक नतीजे मिले हैं।
दवा के निर्यात पर क्यों लगायी थी रोक ? 
अब सवाल यह है कि आखिर भारत सरकार ने दवा देने से अमेरिका को मना क्यों किया? दरअसल भारत में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। चूंकि इसकी कोई दवा नहीं है, इसलिए डॉक्टर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को प्रयोग के तौर पर खासकर उन लोगों को जो कोरोना संक्रमितों के साथ काम कर रहे हैं, उन्हें दे रहे हैं। हालांकि इस बात को पक्के तौर पर अभी नहीं कहा जा सकता है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से कोरोना ठीक हो रहा है। लेकिन कुछ मरीजों पर कारगर प्रतीत होने के बाद इस दवा को कोरोना के मरीजों को खिलाया जा रहा है। इसी वजह से भारत सरकार ने इस दवा का निर्यात बंद कर दिया था।
भारत में सबसे ज्यादा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का उत्पादन 
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का उत्पादन विश्व में सबसे ज्यादा भारत में होता है। वर्तमान में भारत में 20 करोड़ गोलियों का उत्पादन होता है। भारत सरकार ने दो कंपनियों को 10 करोड़ गोलियों के उत्पादन का आर्डर दिया है। विशेषकर स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सरकार ने इस दवा का उपयोग करने का सोचा है। भारत अमेरिका को दवाई निर्यात करेगा या नहीं इसपर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। लेकिन यह तो तय है कि भारत अपनी जरूरत को देखकर ही दवा दूसरे देशों को निर्यात करेगा।

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