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दिल्ली में एक हिन्दू युवक की मॉब लिंचिंग, चोरी के शक में मुस्लिम युवकों ने डंडों से पीट-पीट कर मार डाला, सेक्युलर गैंग ने साधी चुप्पी

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पश्चिमी दिल्ली के नारायणा में एक हिन्दू युवक की मॉब लिंचिंग का मामला सामने आया है। शुक्रवार को चार मुस्लिम युवकों ने एक 32 वर्षीय राहुल को मोबाइल चोरी करने के आरोप में पीट-पीट कर मार डाला। लेकिन मुस्लिम समुदाय के किसी व्यक्ति की मॉब लिंचिंग पर तूफान खड़ा करने वाला तथाकथित सेक्युलर मीडिया इस घटना पर मौन है। इन लोगों को हिंदुओं की हो रही मॉब लिंचिंग दिखाई नहीं देती है। देश में हिंदुओं, दलितों, आदिवासियों के साथ मॉब लिंचिंग की घटनाएं आम हैं, लेकिन हिंदू विरोधी ताकतों को ये दिखाई नहीं देता है।

मॉब लिंचिंग की इस घटना को अंजाम देने वाले चार आरोपितों की पहचान मुश्ताक अहमद, उसके भाई शिराज अहमद, अनीश और इश्तिहार के रूप में हुई है, जिन्होंने राहुल को एक पेड़ से बांधकर डंडों और लोहे के छड़ों से उसे बेहरहमी से मारा। जिससे उसकी मौत हो गई। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को चश्मदीद शेष कुमार ने बताया कि सुबह उसके पड़ोसी मुश्ताक अहमद, उसका भाई सिराज अहमद, अनीश और इश्तिहार (चारो लोहा मंडी के निवासी थे।) पार्क में इस लड़के की बुरी तरह से पिटाई कर रहे थे। उन्होंने लड़के को पेड़ से बाँधा हुआ था। और लाठी डंडों, पाइप और लोहे की रॉड से उसकी पिटाई कर रहे थे। उन लोगों ने उस व्यक्ति को तब तक मारा जब तक उसकी हालत बदतर नहीं हो गई। उसके बाद वे उसे छोड़ कर भाग गए।

डीसीपी दीपक पुरोहित ने बताया 28 अगस्त को पीसीआर कॉल से नारायणा के लोहा मंडी के एमसीडी पार्क में एक शख्स की हत्या की सूचना मिली थी। जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए नारायणा पुलिस स्टेशन की एक टीम घटना स्थल पर पहुँची तो उन्हें 32 साल के लड़के का शव पड़ा हुआ मिला। लड़के के पूरे शरीर पर चोट के निशान थे।

पुलिस के मुताबिक, चारो आरोपितों को घटना के तुरंत बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया। राहुल और उसके साथियों ने मिलकर शिराज के सेलफोन को उसके ट्रक से चुरा लिया था। जिसके बाद राहुल के दोस्त फ़ोन लेकर भाग गए लेकिन राहुल उन लोगों के हत्थे चढ़ गया। जिसपर चारों आरोपितों ने उसकी इतनी पिटाई की कि उसे जान से हाथ धोना पड़ा।

हैरानी बात यह है कि मुस्लिम समुदाय के किसी व्यक्ति की मॉब लिंचिंग होने पर मोदी सरकार को कोसने वाला सेक्युलर मीडिया इस घटना को लेकर मैन है। उसे हिन्दू युवक का यह मॉब लिंचिंग दिखाई नहीं दे रहा है। अगर यह घटना किसी मुस्लिम युवक के साथ हुई होती, तो सेक्युलर गैंग टीवी चैनलों में बहस और सोशल मीडिया पर पोस्ट करते नजर आता। दिल्ली से लेकर बॉलीवुड तक सभी के हाथों में प्लेकार्ड और पोस्टर नजर आता। लेकिन आज सभी गायब है।

किसी भी व्यक्ति की हत्या मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख देती है, मरने वाला चाहे किसी भी धर्म, जाति या रंग का हो। लेकिन सेक्युलर गैंग और बुद्धिजीवी व्यक्ति के धर्म, जाति और रंग को आधार बनाकर विरोध करते हैं। महज क्षुद्र राजनीतिक और व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण कुछ लोग मोदी सरकार के खिलाफ मॉब लिंचिंग के नाम पर झूठ फैलाने से बाज नहीं आते हैं। सेक्युलर और टुकड़े-टुकड़े गैंग हमेशा पक्षपाती चिंता जाहिर कर अपना हित साधने की कोशिश करता है।   

 

 

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