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पश्चिम बंगाल में ममता का खूनी लोकतंत्र, निकाय चुनाव में टीएमसी के गुंडों द्वारा हिंसा व धांधली, राज्यपाल धनखड़ ने किया एसईसी को तलब

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पश्चिम बंगाल के ममता बनर्जी सरकार में लोकतंत्र का गला घोंटने का सिलसिला जारी है। राज्य में हुए 108 नगर पालिका के चुनावों में हिंसा और हमले के बीच हथियारों की नोक पर मतदान हुआ। इस दौरान कानून व्यवस्था चौपट रही और राज्य की प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह से नाकाम रही। इन चुनावों में टीएमसी के गुंडों, असामाजिक तत्वों और कार्यकर्ताओं ने जमकर उत्पात मचाया। इसमें राज्य पुलिस व प्रशासनिक अमला भी उनका भरपूर साथ दिया। यहां तक कि हिंसा को कवरेज कर रहे मीडिया कर्मियों पर भी हमले किए गए। राज्यपाल ने इस मामले में राज्य निर्वाचन आयुक्त को तलब किया। 

पूरे देश के लोगों ने बंगाल निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की गु़ंडागर्दी व आतंक को देखा। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि निकाय चुनावों के दौरान हुई हिंसा में बीजेपी के कार्यकर्ता घायल हो गए और उन्हें डराया व धमकाया गया। हिंसा की इन घटनाओं में कई कार्यकर्ताओं को गंभीर चोटें आईं। बीजेपी उम्मीदवारों को पुलिस ने गैर कानूनी तरीके से हिरासत में रखा। इसके अलावा पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सुकांता मजूमदार समेत पार्टी के कई बड़े नेताओं पर भी हमला किया गया। वहीं बीजेपी ने बूथ कैप्चरिंग का आरोप भी लगाया। टीएमसी के गुंडों ने पुलिस के संरक्षण में हिंसा के साथ बूथ लूटने व बीजेपी समर्थक मतदाताओं को डराने-धमकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने हिंसा पर नाराजगी जाहिर करते कहा कि मतदान के दौरान हिंसा की तस्वीर और कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासन का पक्षपातपूर्ण रवैया देखने को मिला। प्राथमिक रूप से यह दिखता है कि वह प्रजातांत्रिक व्यवस्था को सुस्थापित करने में विफल रहे हैं। उन्होंने ट्वीट किया, “राज्य चुनाव आयुक्त सौरब दास को हिंसा और अराजकता के परिदृश्य को दर्शाने वाली खतरनाक रूप से परेशान करने वाली इनपुट, पक्षपातपूर्ण तरीके से प्रशासन और प्रणालीगत विफलता के मद्देनजर कल सुबह 10 बजे से पहले कभी भी राज्यपाल को जानकारी देने के लिए बुलाया गया है।”  

व्यापक पैमाने पर हुई हिंसा के विरोध में बंगाल बीजेपी ने सोमवार को सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक बंगाल बंद का आह्वान किया। इसके साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग पर अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभाने का आरोप लगाया। बीजेपी ने कहा कि कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद चुनाव आयोग राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान करने में नाकाम रहा। मतदान के बाद शाम में पार्टी के वरिष्ठ नेता शिशिर बाजोरिया के नेतृत्व में बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य चुनाव आयुक्त से मिलकर ज्ञापन सौंपा और चुनाव को रद्द करने की मांग की। शिशिर बजौरिया ने कहा कि केंद्रीय वाहिनी के नेतृत्व में फिर से चुनाव कराये जाएं।

प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि सुबह छह से शाम छह बजे तक के बंगाल बंद से स्वास्थ्य, दूध आपूर्ति एवं मीडिया को छूट रहेगी। उन्होंने कहा, ‘‘आज जो हुआ, वह मतदान नहीं बल्कि लोकतंत्र का मखौल था। उत्तरी और दक्षिणी बंगाल के करीब हर नगरपालिका में सत्तारूढ़ दल के बदमाशों ने चुनाव को तमाशा बनाकर रख दिया है। हमारे कई एजेंटों एवं प्रत्याशियों के साथ मारपीट की गयी लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी आंखें बंद रखीं।’’ उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं एवं पत्रकारों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकर कंचन गुप्ता ने एक वीडिया शेयर कर बताया कि रिपोर्टिंग करते समय ABP के पत्रकारों और कैमरापर्सन को बेरहमी से पीटा गया। राज्य में कोई भी सुरक्षित नहीं है। 

पश्चिम बंगाल के निकाय चुनावों में हिंसा और बूथ लूट को कवर करने के दौरान विभिन्न मीडिया हाउस के कम से कम नौ पत्रकारों को पीटा गया। हिंसा में घायल पत्रकारों को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया। टीएमसी के गुंडों ने पत्रकारों के कैमरे तोड़े दिए और माइक छीन कर नाले में फेंक दिए।

कोन्नगर के वार्ड 10 के बीजेपी प्रत्याशी और पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा भट्टाचार्य पर हमला किया गया। बीजेपी का आरोप है कि उम्मीदवार को सड़क पर पीटा गया, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई है। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। बीजेपी नेता और आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक वीडियो ट्वीट किया। उन्होंने कहा, यूपी विधानसभा चुनाव के अलावा बंगाल में भी पार्षद के चुनाव हो रहे हैं, लेकिन बंगाल में लोकतंत्र को लूटा जा रहा है, चुनाव में खून-खराबा देखने को मिल रहा है। तृणमूल के गुंडों ने बीजेपी के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष पर हमला किया।

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