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देश में पहला आदिवासी जिसे सीएजी बनाया गया

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भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी गिरीश चंद्र मुर्मू देश के नए नियंत्रक व महालेखा परीक्षक यानी सीएजी बनाए गए हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें शपथ दिला दी है। देश में पहली बार किसी आदिवासी समुदाय के व्यक्ति को सीएजी बनाया गया है। आदिवासी कल्याण पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली तमाम पार्टियों ने आजादी के बाद से अब तक किसी आदिवासी को इस पद पर नहीं बिठाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहली बार किसी आदिवासी को सीएजी की कुर्सी पर बिठाया है।

प्रधानमंत्री मोदी की सरकार देश के सबसे पिछड़े जनजातीय समाज यानी आदिवासियों के उत्थान और कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है। मोदी सरकार में आदिवासी मामलों का मंत्रालय नई-नई योजनाएं लाकर और उनका क्रियान्वयन कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रहा है। मोदी राज में आदिवासियों के लिए इतने कार्य हुए हैं जो कि पहले कभी नहीं हुए। केंद्र सरकार ने जनजातीय लोगों के विकास के साथ ही उनकी सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्वायत्तता की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं। इसी का परिणाम है कि अब वो देश के अन्य लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने लगे हैं।

आजादी के बाद सीएजी बनने वाले मुर्मू चौदहवें भारतीय हैं। मूर्मू इस पद पर बैठने वाले पहले आदिवासी समुदाय के व्यक्ति के साथ इस पद पर आसीन होने वाले गुजरात कैडर के पहले आइएएस अधिकारी भी हैं। पुर्नगठन के बाद जम्मू-कश्मीर के पहले उपराज्यपाल रहे गिरीश चंद्र मुर्मू 1985 बैच के गुजरात कैडर के तेजतर्रार आईएएस अधिकारी हैं।

ओडिशा के मयूरभंज में 21 नवंबर 1959 में जन्मे मुर्मू उत्कल यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में एमए हैं। उन्होंने बर्मिंगम यूनिवर्सिटी (ब्रिटेन) से एमबीए किया है। इसके बाद सिविल सर्विसेज में आए। 1985 में आईएएस बनने के पहले मुर्मू स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में पीओ भी रह चुके हैं। कभी बैंक में काम कर चुके मुर्मू अब सभी बैंकों के परिचालन को देखने वाले डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज की अगुआई करेंगे। मुर्मू प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के डायरेक्टर भी रह चुके हैं। मुर्मू वित्त मंत्रालय में कई अहम पदों पर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

जीसी मुर्मू मीडिया से दूर लो प्रोफाइल में रहने वाले अधिकारी रहे हैं। मुर्मू के बारे में ज्यादातर लोगों को तब पता चला जब उन्हें जम्मू-कश्मीर का एलजी नियुक्त किया गया। लेकिन अब जबकि देश के नए नियंत्रक व महालेखा परीक्षक बन गए हैं, सुर्खियों में बने रहेंगे।

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