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पंजाब में लोकतंत्र का गला घोंटने के लिए कांग्रेस सरकार ने लिया डीजे का सहारा, प्रदर्शनकारी कॉलेज शिक्षकों की आवाज दबाने की कोशिश

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कांग्रेस लोकतंत्र का रक्षक होने का दावा करती है, लेकिन उसके शासन में सबसे अधिक लोकतंत्र का गला घोंटा गया है। 25 जून, 1975 को देश पर इमरजेंसी थोपना इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। इसके अलावा ऐसे कई उदाहरण मौजूद है, जिससे पता चलता है कि कांग्रेस लोकतंत्र को अपनी सुविधा के लिए इस्तेमाल करती है। साथ ही विपक्ष और अन्य लोगों की आवाज दबाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाती है और दमन करती है। अब पंजाब की कांग्रेस सरकार प्रदर्शनकारी कॉलेज शिक्षकों की आवाज को दबाने के लिए डीजे का सहारा लेने जा रही है।

मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के कानों तक प्रदर्शनकारी शिक्षकों की मांगों को लेकर उठने वाली आवाज न पहुंचे, इसके लिए पंजाब पुलिस डीजे का सहारा लेगी। पंजाब के पुलिस आईजी (विशेष सुरक्षा) ने इसके लिए सभी पुलिस कमिश्नर को बकायदा पत्र भी लिखा है। पुलिस के इस आदेश का कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ ने विरोध किया है। उन्होंने ट्विटर पर आदेश को साझा करते हुए लिखा, “यह सच नहीं हो सकता! लोकतंत्र का अपमान और मजाक।”

पंजाब के आईजी का आदेश गुरमुखी में लिखा हुआ है। इस लिए एक ट्विटर यूजर ने इसे अंग्रेजी में अनुवाद कर शेयर किया है। इस पत्र में कहा गया है, “ऐसा देखने में आता है कि पंजाब के मुख्यमंत्री का जब भी आपके जिलों में कार्यक्रम होता है तो मुख्यमंत्री के रास्ते में दो अलग-अलग संगठन ऊंची-ऊंची आवाज में नारेबाजी करते हैं। इसलिए भविष्य में जब भी मुख्यमंत्री आपके जिले के किसी कार्यक्रम में आएं तो उन जगहों पर डीजे लगा दिए जाएं, जहां ये दो संगठन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं। डीजे पर गुरबाणी शबद या धार्मिक गीत चलाए जाएं, ताकि उनकी आवाज सुनाई न दे।” अब आईजी का यह अनोखा पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इस पत्र के बाद राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चाएं शुरू हो गई हैैं कि मुख्यमंत्री अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले संगठनों के नारों से परेशान हो गए हैं। यूथ अकाली दल के अध्यक्ष परमबंस सिंह रोमाणा ने लिखा, बेहद हास्यास्पद आदेश है। इन लोगों को इस बात का एहसास नहीं है कि गुरबाणी लोगों की आवाज दबाती नहीं है बल्कि आवाजहीनों को आवाज देती है। थोड़े दिन इंतजार करो चरणजीत सिंह चन्नी, लोग आपका ही बैंड बजा देंगे।

गौरतलब है कि पंजाब में शिक्षक 7वें यूजीसी आयोग को लागू करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। चन्नी सरकार ने उनके मुद्दों को हल करने का एक नया तरीका खोज लिया है और वह तरीका है, उनकी आवाज को दबा देना। पंजाब के 184 कॉलेजों में ‘टोटल एजुकेशन बंद’ है। पंजाब सरकार के खिलाफ शिक्षकों में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। वहीं मुख्यमंत्री जहां कहीं समारोह करने जाते हैैं वहां बेरोजगार शिक्षक, अनुबंधित कर्मचारी खुद को नियमित करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं और मुख्यमंत्री का विरोध किया जा रहा है।

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