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अवैध धर्मांतरण : आरोपी आईएएस पर कसा सीएम योगी का शिकंजा, देशभर में फैला है जाल

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उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार अवैध धर्म परिवर्तन के खेल पर नकेल कसने के लिए कमर कस चुकी है। अवैध धर्मांतरण पर सीएम योगी का रुख काफी सख्त है। अवैध धर्मांतरण के सामने आए नए मामले में वरिष्ठ आईएएस मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन के खिलाफ सीएम योगी के आदेश पर एसआईटी जांच शुरू हो चुकी है। सरकारी आवास पर धार्मिक कट्टरता की सभा और धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने में फंसे वरिष्ठ आईएएस पर आरोप है कि वे शहर की बस्तियों में अपने लोगों को भेजकर गरीब व जरूरतमंद लोगों को धार्मिक साहित्य बंटवाकर प्रचार प्रसार करते थे। प्रचार प्रसार के दौरान उनसे जुड़े लोग आम लोगों को मदद देने के नाम पर धर्मांतरण के जाल में फंसाते थे। मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन के तीन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। मुख्यमंत्री से मामले में शिकायत हुई जिसके बाद जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। शुरुआती जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि वीडियो कानपुर स्थित मंडलायुक्त कार्यालय के हैं। यानी जब वह कानपुर में मंडलायुक्त के पद पर थे उसी दौरान इस तरह की सभाएं हुई थीं। इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों से इस मामले में तह तक जाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा है कि जो भी दोषी है उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कारवाई की जाए।

साजिश के तहत धर्म प्रचार की आड़ में हो रहा रहा था धर्मांतरण का खेल, आईएएस ने तैयार कर रखी थी टीम

इफ्तिखारुद्दीन शुद्ध भक्ति नाम के साहित्य को लोगों को बांटते थे। उसको पढ़ने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाता था। सीटीएस बस्ती के लोगों ने इसकी पुष्टि भी की है। अगर ये बात आगे जांच में सच साबित होती है तो साफ हो जाएगा कि पूरी साजिश के तहत धर्म के प्रचार की आड़ में धर्मांतरण का खेल किया जा रहा था। ऐसा लगता है कि आईएएस ने एक अपनी टीम तैयार कर रखी थी जो ये पूरा प्रचार प्रसार और धर्मांतरण के लिए लोगों को प्रेरित करती थी। अब जब एसआईटी ने जांच शुरू की है तो यह तथ्य भी उसमें शामिल किया जाएगा। मोइनुद्दीन गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा व मकान आदि देने का लालच दिया था।

जमीन अधिग्रहण की शिकायत पर धर्मांतरण का लालच 
सीटीएस बस्ती के ग्रामीणों  ने बताया कि जब मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन मंडलायुक्त थे तब वह उनके पास मदद के लिए गए थे। मेट्रो के लिए जमीन अधिग्रहण संबंधी शिकायत थी। तब मंडलायुक्त कार्यालय से उनको भगा दिया गया था। कुछ दिन बाद उनकी बस्ती में कुछ लोग पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वह मंडलायुक्त कार्यालय से आए हैं। आप लोगों की सभी समस्याएं दूर की जाएंगी। ये कहते हुए शुद्ध भक्ति नाम की किताबें बांटी। यह भी कहा कि अगर वह सब इस्लाम कबूल कर लेंगे तो कभी भी कोई दिक्कत नहीं आएगी। इसी तरह से सीटीएस बस्ती के अन्य तमाम लोग जिनकी जमीन मेट्रो आदि में अधिग्रहीत की जानी थी उनमें से कइयों को यही कहकर धर्मांतरण करने के लिए प्रेरित किया गया। अब जब आईएएस के वीडियो वायरल हो गए तब यह मामला भी उजागर हो गया। 

आईएएस का करीबी उठाता था साहित्य छपवाने का खर्च   

आईएएस मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन धार्मिक प्रचार के लिए दो किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। उसकी प्रिंटिंग का खर्च आईएएस का करीबी उठाता था। ये शख्स काफी समय से कमिश्नर कार्यालय व आवास में सक्रिय है। एक बड़े पद की जिम्मेदारी भी उसको सौंपी जा चुकी है। वह कुछ न होकर भी बहुत कुछ है क्योंकि उस पर अफसरों का हाथ है। सूत्रों का कहना है कि धार्मिक प्रचार प्रसार के मामले में इसकी मुख्य भूमिका थी। तकरीरें होती थी, जिसमें धर्मांतरण को बढ़ावा देने पर चर्चा होती थी। ये सब बातें इस शख्स की जानकारी में थी। सूत्रों की मानें तो मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने बिहार में दो मदरसे बनवाए हैं। मंडलायुक्त के पद पर रहते हुए इफ्तिखारुद्दीन ने शहर से सोलर पैनल बिहार भिजवाए थे। जो मदरसों में लगाए गए थे।

मौलाना संग उच्च शिक्षित लोगों से लेकर बड़े पदों पर बैठे अधिकारी तक काले धंधे में शामिल 

धर्मांतरण के धंधेबाजों का जाल देशभर में फैला हुआ है। इस धंधे में न केवल कट्टरवादी मौलाना बल्कि उच्च शिक्षित लोगों से लेकर बड़े पदों पर बैठे सीनियर आईएएस अफसर तक शामिल हैं। जिनके कंधे पर प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने का भार होता है वैसे लोगों के इस काले धंघे में शामिल होने देश की एकता और अखंडता पर भी सवालिया निशान उठने लगे हैं। देश में धर्मांतरण गैंग का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड मौलाना कलीम सिद्दकी को कुछ दिन पहले योगीजी की पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस मौलाना के तार विदेशों से जुड़े थे। इससे पहले यूपी एटीएस ने उमर गौतम और जहांगीर आलम नामक दो व्यक्तियें को गिरफ्तार कर बड़ी संख्या में किए जा रहे धर्मांतरण का खुलासा किया था। उमर गौतम दिल्ली के जामिया नगर स्थित बटला हाउस में इस्लामिक दावा सेंटर नामक संस्था का संचालक है। उस पर आरोप है की नोएडा के मूक बधिर स्कूल के दर्जनों छात्रों का धर्मांतरण कराया है। उमर गौतम और जहांगीर आलम से पूछताछ में पता चला था कि देश भर के 24 राज्यों में उन दोनों का नेटवर्क फैला हुआ है। पता चला है कि उमर गौतम ने विदेशों में भी कई लोगों का धर्मांतरण करवाया था।

विदेशों में भी धर्मांतरण करवाने 18 बार इंग्लैंड, 4 बार अमेरिका जा चुका है उमर
अवैध धर्मांतरण का कथित नेटवर्क चलाने वाले मोहम्मद उमर गौतम ने धर्म परिवर्तन के कार्यक्रमों के लिए 18 बार इंग्लैंड, 4 बार अमेरिका, सिंगापुर, पोलैंड व अफ्रीका के कई देशों की यात्राएं की। उसने विदेश में भी कई लोगों का धर्मांतरण करवाया था। उमर के सामने आए दो वीडियो से यह खुलासा हुआ है। उधर, उमर और जहांगीर के पास से बरामद दस्तावेज से लखनऊ के अलीगंज के मेंहदी टोला व तेलीबाग की दो लड़कियों का धर्म परिवर्तन करवाए जाने की बात सामने आई है। वीडियो में उमर कह रहा है कि वह 18 बार इंग्लैंड जा चुका है, जिस यूनिवर्सिटी में वह पढ़ता था, वहां भी उसने सात लोगों का धर्मांतरण करवाया था, इनमें उसका गोरखपुर का एक यादव मित्र भी है। वह कानपुर की छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी की एक हिंदू छात्रा का भी धर्मांतरण करवाए जाने का दावा कर रहा है। वीडियो में वह स्वीकार कर रहा है कि उसके दिल्ली के इस्लामिक दावाह सेंटर से धर्मांतरण के करीब एक हजार से ज्यादा सर्टिफिकेट जारी किए हैं। सेंटर से हर माह करीब 15 सर्टिफिकेट जारी किए जाते थे। इसी तरह उसने पोलैंड, पुर्तगाल, जर्मनी, सिंगापुर, अमेरिका से इंग्लैंड में भी धर्मांतरण करवाने के बाद उन्हें विधिक भी मजबूती दिलवाई। विडियों में वह कई शादियां करवाने और धर्मांतरण करवाने वालों की मदद करने की अपील भी कर रहा है।

पढ़ा लिखा मौलाना बना धर्मांतरण गैंग का मास्टरमाइंड

मौलाना कलीम ने मुजफ्फरनगर के इंटर कॉलेज खतौली से विज्ञान में इंटरमीडिएट किया। इसके बाद उसने मेरठ कॉलेज मेरठ से बीएससी की पढ़ाई की, मौलाना ने पहले मेडिकल सेक्टर में भविष्य बनाने की कोशिश की। लेकिन इसके बाद इसने दारुल उलूम नदवतुल उलमा, लखनऊ में दाखिला लिया और इस्लामिक शिक्षा के रास्ते चल पड़ा।

योगी राज में बच नहीं पाएंगे धर्म परिवर्तन के आरोपी 

 धर्मांतरण गैंग पर योगी सरकार के कड़े एक्शन का ये पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी यूपी एटीएस ने धर्मांतरण गैंग का पर्दाफाश किया था। इस गैंग पर करीब 1000 लोगों के जबरन धर्मांतरण का आरोप है। इस गैंग के दो प्रमुख आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस की जांच में पता चला की धर्मांतरण रैकेट चलाने के आरोपियों के पास देश विदेश से 1 करोड़ से ज्यादा की रकम हवाला के जरिये आई थी। इस मामले में यूपी एटीएस ने नागपुर से 3 और आरोपियों को गिरफ्तार किया था। 

 

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