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धोलावीरा को लेकर पीएम मोदी के खिलाफ फर्जी तथ्य फैलाना एजेंडा पत्रकार दीपल त्रिवेदी को पड़ा महंगा, लोगों ने दिखाया आईना

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यूनेस्को ने मंगलवार को गुजरात के हड़प्पा शहर धोलावीरा को अपनी वर्ल्ड हेरिटेज स्थलों की सूची में शामिल किया है। गुजरात का यह चौथा स्थल है, जिसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में जगह मिली है। इसको लेकर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीट कर खुशी जताई थी।

पीएम मोदी ने ट्वीट में कहा, “मैं अपने छात्र जीवन के दौरान पहली बार धोलावीरा गया था और उस जगह को देखकर मंत्रमुग्ध हो गया था। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में, मुझे धोलावीरा में विरासत संरक्षण और जीर्णोद्धार से संबंधित पहलुओं पर काम करने का अवसर मिला। हमारी टीम ने वहां टूरिज्म फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का भी काम किया।”

लेकिन एजेंडा पत्रकार दीपल त्रिवेदी को यह रास नहीं आया और उन्होंने धोलावीरा को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की बातों को झूठ साबित करने की कोशिश की। इसके लिए दीपल त्रिवेदी ने फर्जी तथ्यों का सहारा लिया।

दीपल त्रिवेदी ने पीएम मोदी द्वारा ट्वीट में कही गई बात कि वह स्कूल में पढ़ाई के दौरान धोलावीरा गए थे, को झूठा साबित करने का प्रयास किया। उन्होंने गलत तथ्य दिया कि एएसआई ने धोलावीरा की पहली खुदाई 1990 में की थी, और उस समय मोदी जी की आयु 40 वर्ष की रही होगी। यानि स्कूल में पढ़ाई के दौरान वहां जाने का उनका दावा झूठा है। उन्होंने अपने ट्वीट में यह भी कहा कि वे एक गरीब चायवाले थे, इसलिए वडनगर से 332 किलोमीटर दूर धोलावीरा जाना भी उनके लिए असंभव था।

लेकिन देशवासियों ने एजेंडा पत्रकार दीपल त्रिवेदी के ट्वीट में दिए गए फर्जी तथ्यों का जवाब दिया और उसे आईना दिखाने का काम किया।

सच्चाई यह है धोलावीरा साइट को 1968 जे पी जोशी ने खोजा था। लेकिन दीपल त्रिवेदी ने इस तथ्य की अनदेखी की और मोदी के प्रति अपनी नफरत के चलते मनगढ़ंत बातें लिख दीं। अन्य लोगों ने भी इस एजेंडा पत्रकार को खरीखोटी सुनाईं।

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