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मां काली के बाद अब भगवान शंकर का अपमान, क्या अब हिंदुओं को कहना चाहिए- सर तन से जुदा?

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अभी ज्यादा दिन नहीं हुए है जब मां काली को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया था और हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया था। अब केरल से प्रकाशित होने वाली पत्रिका The Week में भगवान शंकर की आपत्तिजनक नग्न तस्वीर छापी गई है। पैगंबर पर एक टिप्पणी लेकर देश में कितनी ही हत्याएं हो गई और कितनों को आज भी धमकियां मिल रही हैं। तो क्या अब हिंदुओं को भी कहना चाहिए- सर तन से जुदा? हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करना आजकल फैशन बन गया है। अपमानित करने वाले लोगों को पता है कि हिन्दू इतने सहिष्णु हैं कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे और कोर्ट उन्हें अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर सजा नहीं देगा। इससे उनके हौसले बढ़ते जा रहे हैं। सच में मन बहुत क्षुब्ध हो जाता है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के कुछ नागरिक करोड़ों हिन्दुओं के आराध्य देवी-देवताओं का बेशर्मी से अनादर कर रहे हैं। यहां एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि हिंदू कब तक सहिष्णु बने रहेंगे। हिंदू-देवी देवताओं के एक के बाद एक अपमान सामने आते जा रहे हैं और हिंदू अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं कि इससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। यहां एक सवाल यह भी उठता है कि The Week मैगजीन के संपादक फिलिप मैथ्यू ईसाई धर्म से हैं तो वे कभी ईसा मसीह या ईसाई धर्म से संबंधित आपत्तिजनक तस्वीर प्रकाशित क्यों नहीं करते। एमएफ हुसैन भारत के बड़े चित्रकार थे लेकिन उन्होंने भी अपनी प्रसिद्धि हासिल करने के लिए हिंदू देवी-देवताओं के नग्न चित्र बनाए और हिंदू भावनाओं को आहत किया। यक्ष प्रश्न यह है कि क्या इस तरह हिंदू देवी-देवताओं के अपमान पर अब हिंदुओं को भी कहना चाहिए- सर तन से जुदा?

भगवान शंकर की आपत्तिजनक तस्वीर छापी

अभी मां काली के फिल्मी पोस्टर को लेकर विवाद थमा भी नहीं था कि एक पत्रिका ने भगवान शंकर की आपत्तिजनक तस्वीर छाप कर हिंदुओं की भावनाओं को भड़काने का काम किया है। केरल से प्रकाशित The Week मैगजीन ने हिंदुओं के सबसे बड़े भगवान माने जाने वाले भगवान शंकर की आपत्तिजनक फोटो छाप कर विवाद पैदा कर दिया। यह तस्वीर हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाली है। भगवान शंकर की तस्वीर को लेकर कानपुर में मैगजीन ‘द वीक’ के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भड़काने को लेकर एफआईआर दर्ज हुई है। The Week देश की मशहूर पत्रिकाओं में शामिल है। 24 जुलाई के पत्रिका के अंक में हिंदू देवी मां काली को लेकर एक लेख छापा गया है लेकिन लेख में भगवान शंकर की जो तस्वीर छापी गई है, वह आपत्तिजनक है। एफआईआर दर्ज कराने वाले प्रकाश शर्मा ने अपनी तहरीर में लिखा है कि मैगजीन ने भगवान शिव और मां काली की आपत्तिजनक फोटो छापी है। इससे हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंची है।

The Week की स्टोरी “द पॉवर ऑफ काली” में आपत्तिजनक तस्वीर

भगवान शंकर की यह आपत्तिजनक तस्वीर ‘द वीक’ पत्रिका के पेज नंबर 62 और 63 में छपी हुई है। यह पूरा व्याख्यान माता काली के उस गुस्से के समय का प्रकाशित किया गया है, जब उन्हें रोकने के लिए भगवान शंकर उनके पैरों के नीचे लेट गए थे। मगर तस्वीर में भगवान शंकर को आपत्तिजनक तरीके से निर्वस्त्र दर्शाया गया है, जो कि आपत्तिजनक है और हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। शिकायतकर्ता प्रकाश शर्मा के मुताबिक “मैगजीन के 62 व 63 पेज पर भगवान शिव व मां काली की अश्लील फोटो छपी थी। ऐसी तस्वीरें हिंदुओं की भावनाएं को ठेस पहुंचाती हैं।” जॉइंट सीपी आनंद प्रकाश तिवारी के मुताबिक, “कोतवाली थाने में अज्ञात के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। मैगजीन का प्रकाशक, संपादक कौन है और केरल में कहां से छपती है, आदि की जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

लेखक बिबेक देबरॉय ने संपादक को लिखी चिट्ठी

इस विवाद के बाद इस लेख के लेखक एवं स्तंभकार बिबेक देबरॉय ने The Week के संपादक फिलिप मैथ्यू को पत्र लिखकर भगवान शंकर की आपत्तिजनक तस्वीर लगाने पर विरोध दर्ज किया और साथ ही लिखा कि अब आगे से वे इस पत्रिका के लिए स्तंभ नहीं लिखेंगे। देबरॉय ने कहा, “मैगजीन ने मुझसे पूछे बिना लेख में माँ काली की आपत्तिजनक तस्वीर का इस्तेमाल किया। मैं इससे आहत हूँ।” डॉ बिबेक देबरॉय एक अर्थशास्त्री और सम्मानित लेखक के रूप में जाने जाते हैं।

The Week ने अब खेद जताया

द वीक वैग्जीन ने माफी मांगते हुए लिखा कि हमें गहरा खेद है कि हमने 24 जुलाई, 2022 के द वीक अंक में प्रख्यात लेखक बिबेक देबरॉय द्वारा लिखित ‘ए टंग ऑफ फायर’ शीर्षक से एक विद्वतापूर्ण लेख में भगवान शिव और देवी काली का एक अनुचित चित्रण प्रकाशित किया। ये एक गलती के कारण हुआ इसके पीछे कोई द्वेषपूर्ण उद्देश्य नहीं था।

दी वीक पत्रिका पर प्रतिबंध लगाने की मांग

अयोध्या में सभी साधु संत व विहिप ने इस पत्रिका पर वैन लगाए जाने की मांग उठाई है। विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि समाज और राष्ट्र को अपमानित करने वाली अंग्रेजी पत्रिका “दी वीक”पर त्वरित कार्यवाही होनी चाहिए। समाज में विद्वेष, समाज को शर्मसार करना, कलंकित करना, देवी देवताओं का अपमान करना यह बहुत ही गलत है। दी वीक पत्रिका के द्वारा जिस प्रकार से भगवान शिव शंभू भोलेनाथ का अपमान किया है और माता काली दोनों का चित्र अपनी पत्रिका में प्रकाशित करके सीधे तौर पर हिंदू समाज पर आक्रमण किया है, चित्रों का प्रकाशन और समाज को उद्धृत करना यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इसलिए केंद्रीय सूचना प्रसारण विभाग व राज्य सूचना प्रसारण विभाग के साथ भारत के गृहमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री से हमारी मांग है कि ऐसी पत्रिका पर प्रतिबंध लगाया जाए। इसके संपादक, मुद्रक और प्रकाशक जिन्होंने हिंदू समाज की भावनाओं का अपमान किया है उन लोगों पर भी विधि संगत कार्रवाई की जाए ताकि इस प्रकार से कोई दोबारा हरकत ना हो। आज देश का वातावरण किस प्रकार से हैं यह सामने दिखाई दे रहा है जहां पहले माता काली को सिगरेट पीता हुआ दिखाया गया उस पर भी विवाद हुआ विरोध हुआ कई दिनों तक इस मामले को लेकर चलता रहा उसके बाद भी इस प्रकार से भोलेनाथ और माता काली को इस प्रकार से दिखाया गया उन्हें गलत अवस्था में चित्र को प्रदर्शित करके। यह किस प्रकार से हिंदू समाज पर आक्रमण हो रहा है या एक षड्यंत्र है इसकी जांच होनी चाहिए और जो लोग इस में सम्मिलित है उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

इससे पहले देवी काली को सिगरेट पीते दिखाया गया था 

इससे कुछ समय पहले कनाडा में डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर का भारत में काफी विरोध हुआ। इस पोस्टर में एक महिला को हिंदू देवी काली के रूप में सिगरेट पीते हुए दिखाया गया है। काली के एक हाथ में एलजीबीटी समुदाय का झंडा भी दिखाया गया है। इस पोस्टर को लेकर कनाडा के ओटावा स्थित भारतीय उच्चायोग ने विरोध जताया था साथ ही सोशल मीडिया पर काली के इस रूप को देखकर लोगों ने तीखी प्रतिक्रया व्यक्त की और फिल्म की निर्माता निर्देशक लीना मणिमेकलाई की गिरफ्तारी की मांग की। विवादित पोस्टर को लेकर दिल्ली के वकील विनीत जिंदल ने लीना के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी।

एमएफ हुसैन ने बनाए थे हिंदू देवियों के नग्न तस्वीर 

प्रसिद्ध चित्रकार एमएफ हुसैन ने हिंदू देवियों की ऐसी तस्वीरें बनाई, जिससे हिंदू धर्म के लोगों को बड़ा झटका लगा। हुसैन ने सन 1970 में ये पेंटिंग बनाई थीं मगर इन पेंटिंग को ‘विचार मीमांसा’ नाम की पत्रिका में साल 1996 में छापा गया था। इसका शीर्षक दिया गया, ‘मकबूल फिदा हुसैन-पेंटर या कसाई’। अश्लील पेंटिंग बनाने के विरोध में हुसैन के खिलाफ देश भर में कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए। उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुए। 1998 में हिंदू संगठनों ने हुसैन के घर रखी दूसरी तस्वीरों को नष्ट कर दिया था।

एमएफ हुसैन ने भारतमाता को दिखाया नग्न

2006 में एक मैगजीन के कवर पेज पर भारत माता की नग्न तस्वीर की वजह से हुसैन की काफी आलोचना हुई। इसमें एक नग्न युवती को भारत माता के रूप में दिखाया गया, जो भारत के मानचित्र पर लेटी हुई थी। उसके पूरे जिस्म पर भारत के राज्यों के नाम थे। हिंदू समाज ने इसे अश्लील मानते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

एमएफ हुसैन अंतिम समय छोड़ना पड़ा भारत

हुसैन को जितना सम्मान भारत ने दिया, उनकी विवादित पेंटिग्स ने भारत को ही सबसे ज्यादा आहत किया। उसका असर ये हुआ कि 2006 में हुसैन पर लगातार विरोध प्रदर्शन, मुकदमे हुए। उसके बाद हुसैन ने स्वेच्छा से भारत छोड़ दिया। वे लंदन और दोहा में निर्वासित जीवन बिताने लगे। 2010 में उन्हें कतर की नागरिकता मिल गई। 9 जून 2011 को लंदन में उनका निधन हो गया।

हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब ने भी किया था हिंदू देवी देवताओं का अपमान

हिंदू देवी-देवताओं का अपमानजनक चित्रण कोई नई बात नहीं है। मशहूर हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब ने 2017 में अपने सैलून के लिए एक समाचार पत्र में दिए गए विज्ञापन में ‘‘हिंदू देवी देवताओं’’ का अपमान किया था। विज्ञापन में हिंदू देवी देवताओं का अपमानजनक तरीके से चित्रण किया गया था। लेकिन तब हिंदुओं ने तो नहीं कहा- ‘सर तन से जुदा’। अभी पिछले साल की ही बात है जब अमेजन प्राइम वीडियो पर वेब सीरीज ‘तांडव’ के कुछ दृश्यों में हिंदु देवी-देवताओं का अपमान किया गया था। इस दृश्य को देखकर दर्शकों की भावनाएं आहत हुई थीं और बाद में अमेजन ने एक बयान जारी कर इस ‘आपत्तिजनक दृश्य पर’ माफी मांगी थी।

फिल्मों में हिंदू देवी-देवताओं का ही अपमान क्यों?

फिल्मों में आखिर हिंदू देवी-देवताओं को ही विवादित रूप में क्यों दिखाया जाता है। कभी इस्लाम या ईसाई धर्म को भी इस रूप में क्यों नहीं दिखाया जाता है। डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर विवाद के बाद एक और फिल्म का विवादित पोस्टर सामने आया था। फिल्म ‘मासूम सवाल’ के मेकर्स ने कुछ पोस्टर्स शेयर किए थे, जिनमें से एक पोस्टर में सैनिटरी पैड पर भगवान कृष्ण की फोटो बनी हुई है। इस पोस्टर के सामने आने के बाद अब हिंदू समाज में रोष व्याप्त हो गया। यह कोई पहला मामला नहीं है जब हिंदू देवी-देवताओं को फिल्मों के जरिए अपमानित किया जा रहा हो। इससे पहले भी कई फिल्मों में हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया गया है। आखिर फिल्मों में हिंदू देवी-देवता ही आसान टारगेट क्यों बनते हैं। हैरानी इस बात की है कि देवी देवताओं का यह मजाक बड़े कलाकारों की फिल्मों में देखने को भी मिलता है।

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