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08 नवंबर को मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले पर क्यों न हो जश्न, जानिए 10 वजहें

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5 साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी के फैसले ने देश में वो करिश्मा कर दिखाया, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। पीएम मोदी के नोटबंदी के साहसिक फैसले ने देश की तकदीर बदल दी। अंदाजा लगाइए अगर नोटबंदी की वजह से डिजिटल पेमेंट का एक बड़ा नेटवर्क देश में नहीं खड़ा होता, तो कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान लोगों का क्या हाल होता। मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले से ना सिर्फ देश में कालेधन पर चोट पड़ी है, बल्कि लोगों को लेनदेन में सुविधा होने के साथ, इससे सरकार की कमाई भी बढ़ी है।

लोकसभा चुनाव-2014 के दौरान पीएम मोदी ने देश के लोगों से कालेधन पर प्रहार का वादा किया था, साथ ही भारत की इकोनॉमी में पारदर्शिता लाने का भी ऐलान किया था। 8 नवंबर को पीएम मोदी ने अपने वादे को पूरा करने का जब फैसला किया तो देश की जनता इस फैसले के साथ खड़ी हो गई। रेस्त्रां से लेकर किराना स्टोर तक डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है। इन 10 वजहों से साफ हो जाएगा कि आखिर 8 नवंबर को देश में नोटबंदी के उत्सव का जश्न क्यों न हो।

8 नवंबर को क्यों न हो नोटबंदी के उत्सव का जश्न

वजह नंबर 1

डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में क्रांति

मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद देश में कैशलेश पेमेंट में क्रांति आ गई। क्रेडिट-डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस सभी तरीकों डिजिटल पेमेंट में इजाफा हुआ। देश में UPI की शुरुआत हुई । साल 2016 में UPI के शुरू होने के बाद इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा। एक रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2021 में इससे करीब 7.71  लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2021 में मार्च में यूपीआई के जरिये 5.04 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। वहीं, फरवरी में यह आंकड़ा 4.25 लाख करोड़ का था। नोटबंदी के पहले देश में डिजिटल पेमेंट का चलन बेहद दम था। लेकिन नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट के मामले में भारत ने बड़ा कीर्तिमान बनाया है।

8 नवंबर को क्यों न हो नोटबंदी के उत्सव का जश्न

वजह नंबर 2

मोदी सरकार के फैसले से 2025 तक 3 गुना बढ़ेगा डिजिटल भुगतान

साल 2025 तक भारत में डिजिटल भुगतान तीन गुना बढ़ कर 7,092 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। जानकारों का कहना है कि जिस तेजी से मोदी सरकार कारोबार के डिजिटलीकरण पर जोर दे रही है। उससे देश में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव हो रहे है। रेडसीर कंसल्टिंग की रिपोर्ट के मुताबिक इस समय 16 करोड़ मोबाइल उपयोगकर्ता डिजिटल भुगतान करते हैं, जिनकी संख्या 2025 तक पांच गुनी होकर 80 करोड़ हो जाएगी। भारत के बारे में अनुमान है कि यहां पर कुल पेमेंट में डिजिटल पेमेंट के वॉल्यूम का हिस्सा 2025 तक 71.7 पर्सेंट हो जाएगा।

8 नवंबर को क्यों न हो नोटबंदी के उत्सव का जश्न

वजह नंबर 3

मोदी सरकार के फैसले से रियल टाइम डिजिटल पेमेंट के मामले में भारत दुनिया में नंबर 1

नोटबंदी के फैसलों से कैश ट्रांजेक्शन पर लगाम और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के मोदी सरकार के फैसले से दुनियाभर में भारत की धाक बढ़ी है। रियल टाइम डिजिटल पेमेंट के मामले में भारत ने अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है। पूरी दुनिया के टॉप 10 देशों में रियल टाइम पेमेंट लेन-देन के मामले में भारत पहले नंबर पर है। जबकि चीन दूसरे नंबर पर है। अमेरिका जैसा विकसित देश इस मामले में 9 वें नंबर पर है। जापान सातवें नंबर पर है।

8 नवंबर को क्यों न हो नोटबंदी के उत्सव का जश्न

वजह नंबर 4

कालाधन पर चोट, पैन कार्ड होल्‍डर बढ़े

नोटबंदी के बाद मोदी सरकार कालाधन रोकने के लिए लगातार फैसले ले रही है।देश में पैन कार्ड धारकों की संख्या 50 करोड़ से ज्यादा है। अब पैन कार्ड को बैंक अकाउंट से लिंक करना जरूरी हो गया है। साथ ही बड़े ट्रांजैक्शन पर पैन नंबर देना भी जरूरी कर दिया गया है। पैन कार्ड को बैंक अकाउंट से लिंक करने से इस बात का पता आसानी से लगाया जा सकता है कि एक पैन कार्ड से कितने खाते जुड़े हैं। मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले का ये भी फायदा हुआ है कि देश में पैन कार्ड के होल्‍डर की संख्या बढ़ी है। 2016 में करीब 24.37 करोड़ पैन कार्ड के होल्‍डर थे जो 2020 में बढ़कर 50.95 करोड़ हो गए। सरकार की कोशिश जल्द से जल्द देश में पैन कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ने की है। ताकि लेनदेन में और पारदर्शिता लाई जा सके। आंकड़ों के मुताबिक देश में अभी तक 31.71 करोड़ पैन कार्ड आधार कार्ड से लिंक हुए हैं। 

8 नवंबर को क्यों न हो नोटबंदी के उत्सव का जश्न

वजह नंबर 5

जनधन खातों से ऐतिहासिक बदलाव, बैंकों में बढ़ा पैसा

नोटबंदी से पहले देश के गरीबों की पहुंच बैंक खातों तक नहीं थी। इस वजह से कैश ट्रांजेक्शन उनकी मजबूरी थी , लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोशिशों से देश में जनधन योजना के तहत खुले बैंक खातों की तादाद तेजी से बढ़ी है। मोदी सरकार के जनधन खाते शुरू करने के 7 साल के भीतर , अक्टूबर 2021 तक जन धन बैंक खातों की संख्या बढ़कर 44 करोड़ हो गई है, इन जनधन खातों  में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए जमा हैं। मोदी सरकार के फैसले से अब देश की बैंकिंग सिस्टम का लाभ भी गरीबों तक तेजी से पहुंच रहा है ।

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वजह नंबर 6

नोटबंदी से टैक्स के माध्यम से सरकार की कमाई बढ़ी

नोटबंदी के फ़ैसले के बाद देश में टैक्स कलेक्शन तेजी से बढ़ा है, क्योंकि देश में टैक्स जमा कराने वालों की संख्या बढ़ी है। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 22 सितंबर तक डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन के रुप में 5,70,568 करोड़ रुपये जमा हुए हैं. जबकि पिछले वित्त वर्ष यानी 2020-21 की इसी अवधि में 3,27,174 करोड़ रुपये का टैक्स कलेक्शन हुआ था. वित्त वर्ष 2021-22 में 22 सितंबर तक नेट कलेक्शन ने वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है। वित्त वर्ष 2019-20 नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 4,48,976 करोड़ रुपये हुआ था।

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वजह नंबर 7

नोटबंदी के बाद फर्जी कंपनियों पर मोदी सरकार की बड़ी चोट

नोटबंदी के बाद सरकार ने 2,10,000 से ज्यादा फर्जी कंपनियों के खिलाफ एक्शन लिया। नोटबंदी के दौरान पकड़ी गयी हजारों शेल कंपनियों को बंद कर दिया गया। लंबे समय से फर्जी कंपनियां भारत की इकोनॉमी पर तगड़ी चोट कर रही थीं। दरअसल इन फर्जी कंपनियों को पैसों के अवैध लेनदेन के लिए ही बनाया गया था। इनके जरिए किसी तरह का कारोबार नहीं हो रहा था। शेल कंपनियां चलाने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई ताकि देश में पूरी तरह से कालाधन खत्म हो सके।

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वजह नंबर 8

नोटबंदी से आतंक और देश विरोधियों पर वार

मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले से देशविरोधी काम करने वाले गिरोहों और उनके आकाओं पर तगड़ी चोट पड़ी है। कश्मीर की पत्थरबाज़ी, हवाला कारोबार, ड्रग्स का कारोबार, नकली नोट, उत्तर पूर्व का आतंकवाद और नक्सली हिंसा की गतिविधियों पर लगाम लगी है। नोटबंदी के फैसले के बाद देशविरोधी गतिविधियों में भारी कमी देखी गई है। हवाला को जरिए कालेधान का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए करने वाले, कई कश्मीर के अलगाववादी अब जेल में है। हर उस रास्ते पर शिकंजा कसा जा रहा है , जिससे कालाधन देश में अशांति फैलाने में इस्तेमाल हो रहा था। नोटबंदी के बाद देश में नक्सलियों की गतिविधियों में भी कमी आई है। ड्रग और हवाला के धंधे से जुड़े कई लोग भी सलाखों के पीछे हैं।

8 नवंबर को क्यों न हो नोटबंदी के उत्सव का जश्न

वजह नंबर 9

देश में बेनामी संपत्ति पर मोदी सरकार का वार

नोटबंदी के बाद सरकार ने बेनामी संपत्ति रखने वालों पर भी सख्ती शुरू की। आयकर विभाग टैक्स चोरों के साथ ही बेनामी संपत्ति रखने वालों पर भी विशेष निगाहे रख रहा है। बेनामी संपत्ति के मामले में आयकर विभाग और सख्त रवैया अपना रहा है।अब बेनामी संपत्ति मिलने पर पूरी संपत्ति जब्त होने के साथ ही 25 फीसद जुर्माना के साथ, एक से सात साल तक जेल की हवा खानी पड़ सकती है। देश के कई बड़े शहरों में बेनामी संपत्ति रखने वालों पर ताबड़तोड़ छापे पड़ रहे हैं, जिसमें करोड़ों-अरबों की संपत्ति जब्त की गई है।

  • मोदी सरकार ने काले धन का पता लगाने और कर चोरी में कमी लाने के आयकर विभाग के प्रयासों में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से ‘बेनामी लेन-देन मुखबिर पुरस्कार योजना 2018’  शुरू की । 
  • इस योजना का उद्देश्य छिपे हुए निवेशकों और लाभान्वित होने वाले स्वामियों द्वारा किये गए बेनामी लेन-देन तथा संपत्तियों और ऐसी संपत्तियों पर अर्जित आय के बारे में सूचना देने के लिये लोगों को प्रोत्साहित करना है।

8 नवंबर को क्यों न हो नोटबंदी के उत्सव का जश्न

वजह नंबर 10

नकली नोटों पर शिकंजा, सरकार का कम होगा खर्च

नोटबंदी के बाद कागज के नोटों की जरूरत अर्थव्यवस्था में कम हुई है। कैश की जरूरत कम होने से भविष्य में नोट छपने और उनके मेंटेनेंस का खर्चा काफी कम हो जायेगा। इससे भ्रष्टाचार में भी भारी कमी आ रही है। साथ ही देश में नकली नोटों की समस्या पर भी तगड़ी चोट पड़ी है।

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