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जब सोनिया गांधी के ‘अपशब्दों’ से आहत होकर अटल जी ने कहा – देश की मर्यादा का ध्यान रखें!

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पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी की शुचिता, शालीनता, विश्वसनीयता, सरलता और सहजता की प्रशंसा उनके विरोधी भी करते हैं, हालांकि इसमें गांधी-नेहरू परिवार अपवाद है। विशेषकर सोनिया गांधी ने अटल जी के बारे में कई बार आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। 

सोनिया गांधी ने 1999 के दौरान उज्जैन, मध्य प्रदेश में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ‘गद्दार’ कहा था।

1999 में सोनिया गांधी ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी को ‘झूठा’ कहा।

वर्ष 2002 में, सोनिया गांधी ने वाजपेयी जी के लिए कहा कि वे अपना ‘मानसिक संतुलन’ खो चुके हैं।

2002 में ही सॊनिया गांधी ने कहा था कि भाजपा एक सांप्रदायिक पार्टी है और प्रधानमंत्री वाजपेयी उसके ‘मुखौटा’ हैं।

गौरतलब है कि अटल जी ने कांग्रेस पर आरॊप लगाया था कि सरकार को मध्यावधि चुनावों में जाने के लिए मजबूर करने की कोशिश हो रही है।

आपको बता दें कि सत्ता की ‘भूखी’ सोनिया गांधी ने 1996 में 13 दिन में ही अटल जी की सरकार गिरवा दी। 1998 में भी सोनिया गांधी ने साजिश रची और अविश्वास प्रस्ताव लाकर महज एक वोट से सरकार गिरवा दी। 1999 से 2004 तक अटल जी के कार्यकाल में भी सोनिया गांधी बार-बार अविश्वास प्रस्ताव लाती रही।

पानी सिर से तब गुजर गया जब 2003 में सोनिया गांधी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लिए घोर आपत्तिजनक अपशब्दों का इस्तेमाल किया। इससे अटल जी काफी आहत हुए और उन्हें देश की मर्यादा बनाए रखने की सलाह भी दी।

सोनिया गांधी के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए वाजपेयी ने कहा, ”अभी तो मैं पढ़कर दंग रह गया जब मैंने श्रीमति सोनिया जी का भाषण पढ़ा। उन्होंने सारे शब्द इकट्ठे कर दिए हैं एक ही पैरा में Incompetent (अक्षम), Insensitive (असंवेदनशील), Irresponsible (गैर जिम्मेदार) और Brazenly Corrupt (भ्रष्टतम)। राजनीतिक क्षेत्र में जो आपके साथ जो कंधा से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं इसी देश में मतभेद होंगे, उनके बारे में ये आपका मूल्यांकन है, मतभेदों को प्रकट करने का ये तरीका है? ऐसा लगता है कि शब्दकोश खोलकर बैठे गए हैं और उसमें से ढूंढ़-ढूंढ़ कर शब्द निकाले गए हैं Incompetent (अक्षम), Insensitive (असंवेदनशील), Irresponsible (गैर जिम्मेदार) लेकिन यह शब्दों का खेल नहीं है। हम यहां लोगों से चुन कर आए हैं और जब तक लोग चाहेंगे हम रहेंगे, आपका मैनडेट कौन होता है हमारा फैसला तय करने वाला। किसने आपको जज बनाया है? आप यहां तो शक्ति परिक्षण के लिए तैयार नहीं है अब जब असेंबली के चुनाव होंगे तो हो जाएगें दो-दो हाथ लेकिन यह क्या है। सभ्य तरीके से लड़िए, इस देश की मर्यादा का ध्यान रखिए।”

आपको बता दें कि वाजपेयी जी वही शख्सियत हैं जिन्होंने सोनिया गांधी के बेटे और वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को ड्रग तस्करी के मामले में अमेरिका में गिरफ्तारी से बचाया था। दरअसल 2001 में बोस्टन एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था।

प्रतीकात्मक तस्वीर

आरोप था कि राहुल गांधी 2001 में ‘हेरोइन’ ले जा रहे थे और उन्हें बोस्टन हवाई अड्डे पर पकड़ा गया था। सोनिया गांधी ने वाजपेयी जी से अनुरोध किया कि वे क्लिंटन सरकार की मंत्री Rice से कहें कि राहुल को छोड़ दे। माना जाता है कि उन्होंने अपने प्रभाव का उपयोग किया और राहुल गांधी को गिरफ्तार होने से बचाया। इस संबंध कई अखबारों में रिपोर्ट भी छपी थी।

सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी हमेशा बुजुर्गों का अपमान करती रही है। 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष रहे सीताराम केसरी की धोती खुलवाने का उदाहरण हमारे सामने है। यह सिर्फ इसलिए किया गया था कि सोनिया गांधी पार्टी की अध्यक्ष बनना चाहती थीं। 

वहीं पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के शव को भी कांग्रेस मुख्यालय में भी नहीं रखने दिया था। इसका कारण यह था कि बोफोर्स मामले की सीबीआई जांच की इजाजत उन्होंने दी थी। इसके साथ माना जाता है कि सनिया गांधी तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव द्वारा वाजपेयी जी को संयुक्त राष्ट्र मानवधिकार कांफ्रेंस में पाकिस्तान के कश्मीर अभियान का जवाब देने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करने के लिए चने जाने से भी सोनिया गांधी नाराज थीं। आपको बता दें कि नरसिम्हा राव ने अटल बिहारी वाजपेयी को अपना राजनीतिक गुरु भी कहा था।

महान राष्ट्रभक्त और आधुनिक भारत के सबसे बड़े नेताओं में से एक वाजपेयी जी ने जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश सेवा में लगा दिया। भारत रत्न अटल जी न केवल शानदार वक्ता रहे हैं बल्कि प्रभावशाली कवि, असाधारण जनसेवक, उत्कृष्ट सांसद और महान प्रधानमंत्री के तौर पर भी जाने जाते हैं। जाहिर है सोनिया गांधी दुर्भावना के कारण उनकी छवि को खराब करने की कोशिश की थी। 

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