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पीएम मोदी की सख्ती का असर: तीन सालों में पकड़ी गई 72 हजार करोड़ की अघोषित आय

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”न खाऊंगा, न खाने दूंगा”। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के इस संकल्प को आयकर विभाग अपनी कार्रवाई से आगे बढ़ा रहा है। बेनामी संपत्ति के मामले में देश भर में कार्रवाई जारी है। सरकार कई स्तर पर ऐसी अघोषित-बेनामी संपत्तियों का पता लगाने में लगी हुई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि उसने सघन खोज, जब्ती और छापे में करीब 71,941 करोड़ रुपये की ‘अघोषित आय’ का पता लगाया है।

दो हजार से ज्यादा कंपनियों पर मारे गए छापे
वित्त मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामें (affidavit) में बताया है कि बीते तीन सालों के दौरान विभाग ने 2 हजार से ज्यादा कंपनियों पर छापे मारे जिसमें इसमें 36,051 करोड़ रुपये से अधिक की अघोषित आय बरामद हुई। इसके अतिरिक्त करीब 2890 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति भी जब्त की गई। शपथ पत्र में 1 अप्रैल 2014 से 28 फरवरी 2017 तक की जानकारी दी गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि तीन साल के दौरान आयकर विभाग ने 2027 समूहों की तलाशी ली।

नोटबंदी में 5400 करोड़ की अघोषित आय जब्त
9 नवंबर से 10 जनवरी तक नोटबंदी के दौरान 5400 करोड़ की अघोषित आय जमा हुई। इसमें 3 सौ किलो से ज्यादा सोना जब्त हुआ। नोटबंदी के दौरान आयकर विभाग ने 1100 सर्चिंग-सर्वे और 5100 वेरिफिकेशंस किए। इस कार्रवाई के कारण 610 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई, जिसमें 513 करोड़ का नकद शामिल है। पिछले साल नंवबर और दिसंबर में क्रमश: 147.9 करोड़ और 306.89 करोड़ रुपये जब्त किए गए। इस दौरान नवंबर में 69.1 और दिसंबर में 234.26 किलोग्राम सोना भी जब्त किया गया। छानबीन के बाद बाद 400 मामले इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट और सीबीआई के भेजे गए हैं।

पीएम मोदी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को दी थी चेतावनी
पीएम मोदी ने जुलाई के पहले हफ्ते में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के एक कार्यक्रम में नोटबंदी के बाद सीए के रोल पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को समझाया फिर सही रास्ते पर आने की हिदायत भी दी थी। उन्होंने कहा भी था कि देश के लाखों चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) और तीन लाख रजिस्टर्ड कंपनियां आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के राडार पर हैं।

9 लाख कंपनियां कारोबार की जानकारी नहीं देती
दरअसल देश में 9 लाख ऐसी कंपनियां हैं जो सरकार को अपने सालाना कारोबार की कोई जानकारी नहीं देती है। एक जानकारी के अनुसार देश में इस वक्त 15 लाख कंपनियां रजिस्टर्ड हैं, पर सिर्फ 6 लाख ही ऐसी कंपनियां है जो अपना टैक्स रिटर्न फाइल करती हैं। इसके साथ ही इन 6 लाख में से 3 लाख कंपनियां ऐसी हैं जो अपनी सालाना आय शून्य दिखाती हैं। मोदी सरकार मानती है कि देश के लाखों चार्टर्ड अकाउंटेंट्स इन कंपनियों के कालेधन को सफेद करते हैं।

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को पीएम मोदी का ‘झटका’
देश के कई चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पर आरोप हैं कि पिछले पांच साल में ही लगभग 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कालाधन सफेद कर दिया गया। जाहिर है ऐसे में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी सिलसिले में पीएम मोदी ने पहल की है और अब मुखौटा कंपनियों की कथित रूप से मदद करने को लेकर कम से कम 26 चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) इंस्टीच्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (ICAI) की जांच के घेरे में है। आईसीएआई अकाउंटेंसी फ्रफेशनल्स के लिए रेग्युलेटर है और गड़बड़ी करने वाले सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।

11 सालों में केवल 25 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को मिली सजा
ICAI के अनुसार कई चार्टर्ड अकाउंटेंट्स मुखौटा कंपनियां बनाने से लेकर अवैध रकम को सफेद करने का काम करते हैं। इस कारण देश के राजस्व को बड़ा नुकसान पहुंचता है। पीएम मोदी के आह्वान के बाद कई चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ICAI की राडार पर हैं। ऐसे में इनके निलंबन से लेकर पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई तक हो सकती है। हालांकि एक तथ्य यह भी है कि पिछले 11 सालों में महज 25 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को ही नियमों के उल्लंघन के मामले में सजा मिली है।

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