Home झूठ का पर्दाफाश साजिश के तहत हिंदू अस्मिता का अपमान कर रहा एजेंडा मीडिया!

साजिश के तहत हिंदू अस्मिता का अपमान कर रहा एजेंडा मीडिया!

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कठुआ में बच्ची के साथ जुल्म पर जिस तरह की राजनीति हुई उसने न सिर्फ देश के सम्मान को नुकसान पहुंचाया बल्कि देश के करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई। कैसे एक घटना को हिंदू-मुस्लिम रंग दे दिया गया और हिंदू, हिंदुत्व और मंदिरों को टारगेट कर लिया गया। एक बार फिर हरियाणा के यमुनानगर में हुई दुष्कर्म के वारदात को हिंदू-मुस्लिम एंगल देने की कोशिश की जा रही है और हिंदू मंदिर को बदनाम करने का काम किया जा रहा है। यह इसलिए भी दुखद है क्योंकि इस कुकृत्य में बड़े मीडिया हाउस भी शामिल हैं।

ABP न्यूज और MIRROR NOW  फैला रहा झूठी खबर
ABP न्यूज और कुछ अन्य मीडिया घराने मंदिरों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए फेक न्यूज फैला रहे हैं। दरअसल हरियाणा के यमुनानगर में एक रेप की घटना सामने आई है। एक नाबालिग के साथ चार लोगों ने गैंगरेप किया है। लेकिन कुछ मीडिया हाउस इस खबर को जान बूझकर हिंदुओं को बदनाम करने के लिए इस्तेमाल कर रही है। वह बार-बार कह रही है कि रेप एक मंदिर परिसर में किया गया है।

मंदिर में नहीं, धर्मशाला में हुई रेप की वारदात
सच्चाई ये है कि रेप एक धर्मशाला में हुआ है।  गांव के पूर्व सरपंच शराफत अली के अनुसार रेप गांव के बाहर धर्मशाला में हुआ है। इस धर्मशाला का कोई केयर टेकर नहीं है और यह बिना ताले के ही रहता है। इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने सुनसान कमरे में किशोरी से दुष्कर्म किया। जबकि कुछ मीडिया हाउस गलत खबरें चलाकर हिंदुओं और उनके पूजा स्थलों को बदनाम करने में जुटा हुआ है।

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मुसलमान आरोपियों की पहचान छिपा रहा मीडिया
मीडिया का दोहरा चरित्र देखिये कि इस वारदात के चार आरोपी हैं, जिनमें दो हिंदू और दो मुस्लिम हैं। लेकिन मीडिया दो हिंदू आरोपियों का नाम तो ले रही है, जबकि दो मुस्लिम आरोपी दानिश और भूरा का नाम भी नहीं ले रही है। ABP न्यूज़ और मिरर नाऊ जैसे चैनल कठुवा मामले पर भी कई दिनों तक फेक न्यूज फैलाता रहा, जबकि कठुवा में रेप हुआ ही नहीं था। जाहिर है कि हिंदुओं के खिलाफ मीडिया का एजेंडा चरम पर है।

कठुआ मामले में मीडिया का एजेंडा हुआ एक्सपोज
कठुआ मामले में पीड़िता का नाम बार-बार जाहिर किया गया। देश के सभी लोगों ने बच्ची के साथ अत्याचार पर रोष जाहिर किया और सबने इसे मानवता के साथ अन्याय माना। हालांकि कुछ मीडिया हाउस ने इसे मजहब के आईने से देखा और बड़ी धूर्तता के साथ पीड़िता को भारत की बेटी नहीं मुसलमान की बेटी बना दिया गया। बाद में ये सच्चाई भी सामने आ गई कि कठुआ मामले में रेप हुआ ही नहीं था। जाहिर है फरेबी पत्रकारों के ‘लाल एजेंडे’ की पोल भी जल्दी ही खुल गई।

पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर जुल्म की खबरें नहीं दिखाता मीडिया
पिछले कुछ सालों में मीडिया की पक्षपाती और संकीर्ण दृष्टि के कारण मीडिया का एक वर्ग भयंकर रूप से ‘दोहरेपन’ का शिकार है। एक ओर तो छोटी-मोटी बातों पर भी ये राष्ट्रीय बहस खड़ी कर देते हैं। ऐसा लगने लगता है कि मानो देश में आपातकाल आ गया है, वहीं दूसरी ओर केरल, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में बेरहमी से किए गए हत्याओं पर भी चुप्पी साधे रहते हैं। पश्चिम बंगाल में 8000 गांव हिंदू विहीन हो गए, यह बात मीडिया को नहीं दिखती है। दर्जनों जिलों में आबादी का समीकरण बिगड़ गया और हिंदुओं पर जुल्म की खबरें आम हो गई हैं, लेकिन मीडिया नहीं दिखाता है। इसी दोहरेपन की वजह से आज पत्रकारिता जैसा पवित्र पेशा भी संदेह के घेरे में है।

केरल-कर्नाटक में हिंदुओं के कत्लेआम पर क्यों है चुप्पी?
बीते कई दशकों से वामपंथियों का गढ़ रहा केरल में राजनीति का आधार ही नफरत की बुनियाद पर टिका है। केरल में हर रोज बीजेपी-आरएसएस कार्यकर्ताओं को राजनीतिक दुश्मनी के चलते मारा जा रहा है। वामपंथी इस ‘हेट थ्योरी‘ के तहत माताओं-बहनों और मासूम बच्चों तक को नहीं छोड़ते हैं। रोज हो रही हिंसा में सैकड़ों हिंदुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी है। बड़ा सवाल ये है कि मानवाधिकार आयोग, ओबीसी आयोग एससी-एसटी आयोग, न्यायालय अब तक चुप क्यों है और मीडिया चुप क्यों है?

 

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